आपको बता दे कि 15वां वित्त आयोग और नीति आयोग हिमालयी राज्यों को लेकर भविष्य में क्या नजरिया और नीति अपनाते हैं, उसके लिये मसूरी में रविवार का दिन ख़ास होगा क्योंकि यहा हिमालयन कॉन्क्लेव में खाका तैयार होगा वही हिमालयन कॉन्क्लेव में जो खाका तैयार होगा उसके
निष्कर्षों और सुझावों पर उक्त आयोगों के साथ केंद्र सरकार व पीएमओ की भी सीधी नजर रहने वाली है रहेगी ओर हो भी क्यो ना आखिर हिमालयी राज्यों के लिए भावी नीति नियोजन और बजट प्रबंधन के लिहाज से ये हिमालयन कॉन्क्लेव अहम जो है बता दे कि 15वें वित्त आयोग, नीति आयोग की मौजूदगी में नौ हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साझा रुख पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी सीधी नजर होगी। ओर पीएमओ के अपर प्रमुख सचिव डॉ पीके मिश्रा भी इस सम्मेलन में रविवार को मौजूद रहेंगे।


रविवार को मसूरी मै हो रहे इस कॉन्क्लेव में हिमालयी राज्य अपनी दिक्कतों और चुनौती पर गम्भीर मंथन करता नजर आएगा
उदहारण के लिए जैसे हिमालयी पर्यावरण, जैव विविधता, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सभी हिमालय राज्य साझा तौर पर रणनीति तैयार करेंगे। इस कॉन्क्लेव के बिंदुओं में हिमालयी राज्यों का सतत विकास, नदियां, ग्लेशियर व जल संसाधन, आपदा प्रबंधन, इको सिस्टम सर्विसेज, पर्यटन व वेलनेस की संभावनाओं और साथ ही हिमालयी राज्यों को ग्रीन बोनस के रूप में विशेष प्रोत्साहन दिए जाने पर विशेष तौर पर चर्चा होनी तय है। ओर फिर इस चर्चा के जरिये ही तमाम पर्वतीय राज्य हिमालय की अलहदा भौगोलिक, पर्यावरणीय, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के लिए अलग से नीति नियोजन की दमदार पैरवी करते नज़र आएंगे
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया को बताया कि हिमालयन कॉन्क्लेव में पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, वन अधिनियम व वन क्षेत्र की अधिकता जैसे ज्वलंत विषयों पर चर्चा के बाद सभी हिमालयी राज्यों के कॉमन एजेंडे को मूर्त रूप दिया जा सकेगा। हिमालयी राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संचय, जल संरक्षण की मुहिम को भी आगे बढ़ाएंगे। वही सम्मेलन का प्रमुख एजेंडा जल संरक्षण भी रहेगा। भारत की अधिकतर नदियों का स्रोत हिमालय है बता दे कि 11 हिमालयी राज्य किस प्रकार जल संरक्षण में केंद्र का सहयोग कर सकते हैं, इस पर भी मंथन किया जाना तय है
वही इस कॉन्क्लेव में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी के आने की संभावना है तो 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, प्रधानमंत्री कार्यालय में अपर प्रमुख सचिव पीके मिश्रा, हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों में अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू, हिमाचल प्रदेश के जयराम ठाकुर, मणिपुर के एन बीरेन सिंह, मेघालय के सीके संगमा, मिजोरम के जोरामथांगा, नागालैंड के एन रियो, त्रिपुरा के बिपलब कुमार देब और जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के सलाहकार केके शर्मा भाग ले रहे है वही असम में बाढ़ के चलते वहां के मुख्यमंत्री इस कॉन्क्लेव में शिरकत नहीं कर पा रहे है।
वही बता दे कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने असम में आई बाढ़ एवं अतिवृष्टि से हुई जन व धन हानि पर गहरा दुख जताया है। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावितों की सहायता के लिए राज्य सरकार की ओर से पांच करोड़ की धनराशि देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में उत्तराखंड की जनता असमवासियों के साथ है। वही उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओर नैनीताल से सांसद अजय भट्ट ने कहा कि मसूरी में होने वाली हिमालयन कॉन्क्लेव को प्रशंसनीय पहल करार देते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कान्क्लेव हिमालयी राज्यों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।
बहराल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को सुभकामनाये , बधाई कि जिस सोच के साथ मसूरी मैं उत्तराखंड मे पहली बार सभी हिमालय राज्य एक साथ एक मंच पर होंगे , उम्मीद करते है कि इस मंथन से हिमालय राज्यो के लिए अमृत जरूर निकलेगा जिस पर भविष्य मैं मुहर जल्द लगेगी ।



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