सीएम सर ये ख़बर सिर्फ आपके लिए हैं

सीएम सर ख़बर गाँव से आई हैं आप की सरकार से उम्मीद हैं पहाड़ वालो को इसलिए बोलता उत्तराखण्ड उनके शब्दों को आप तक पहुचा रहा हैं आज फिर रिखणीखाल क्षेत्र के भयांसू गाँव की महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान कोई उपचार न मिलने की वजह से तकलीफ झेलनी पड़ी। ग्राम भयांसू की बीना देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सड़क के अभाव में चारपाई में लेटा कर रिखणीखाल स्थित सरकारी अस्पताल ले जाया गया ।रिखणीखाल अस्पताल में   डॉक्टर ना  होने की वजह से औरत को पूरी रात अस्पताल के बाहर जमीन पर लेटाया गया काम चलाऊ चतुर्थ श्रेणी की साफाई कर्मचारी महिला द्वारा प्रसूति की तैयारी कराई गई मगर कामयाबी नही मिली। आखिर हार थक के महिला को कोटद्वार भेजना पड़ा और ढाबखाल के नजदीक महिला ने जंगल   के   बिच मेें बच्चे  को जन्म दिया जो सांसे तोड़ चुका था।

माँ ने तो पीड़ा सहन कर ली मगर नवजात अपनी सांसों की लीला को समाप्त कर चुका था। यह है सरकार द्वारा पहाड़ों के प्रति उदासीन रवैया। यह कोई पहली घटना नही है हाल ही के दिनों में क्षेत्र वासी 15 दिन पहले प्रेम सिंह रावत ग्राम डबराड वालो की घटना के आंसू अभी पोंछ भी नही पाए थे कि आज फिर से कोई सरकारी तंत्र के आगे हार चुका है।

उल्लेखनीय है कि रिखणीखाल ब्लॉक की वर्तमान आबादी करीब 35 हजार है मगर यहां के सरकारी अस्पताल में डॉक्टर न होने की स्थिति में सबसे निकटस्थ अस्पताल कोटद्वार है जो 80km दूर है।

सवाल वही है कि आखिर कब तक और क्यों..? आधुनिकता की दौड़ में हम पिछड़ रहे है या हम को मजबूर किया जा रहा है यह सब करने के लिए ताकि माफिया का राज हो पहाड़ पर।

डबल इज़न की सरकार से पहाड़ को उम्मीद हैं  लिहाज़ा वो अपना दर्द अपने शब्दों  से सरकार को बता रही हैं  अब देखना ये हैं कि सरकार कितनी जल्दी यहा बुनियादी सुविधाओं को पहुचाते हैं नही तो वो दिन दूर नही जब यहा भी लटके मिलेगे ताले ओर हो  चुका होगा तब  पलायन 

 

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