सीएम सर वन विभाग आपकी भी नही सुनता क्या ?

25 मई को ग्राम भनस्वाड़ी, जौनपुर गढ़वाल के ऊप्पर बांज, देवदार, बुरांस के जंगल में भीषण आग लग गई, जिसकी जानकारी वन विभाग को समय पर दे दी गयी परन्तु विभाग द्वारा कोई सहयोग नही किया गया ।।    शाम होते होते आग विकराल रूप धारण ले चुकी थी, आग को काबू में करने के लिए ग्राम सभा के समस्त महिला पुरुष द्वारा शाम से रात तक आग बुझाने का प्रयास किया  गया              शाम तक गाव निवासी द्वारा दीपक चौहान जी शासन व सरकार से फ़ोन व मेल के माध्यम से शिकायत की गई परन्तु कोई प्रतिक्रिया नही आई। ग्रामीणों द्वारा रात 11 बजे तक आग बुझाने का प्रयास किया गया, परन्तु रात को तेज़ हवा होने के कारण आग पूरे जंगल मे फैल गयी, सुबह होते ही गांव के युवा और बच्चे दोबारा अपनी जान को जोखिम में डालकर जंगल की ओर आग बुझाने के लिए है बड़े पर आग बहुत विकराल रूप ले चुकी थी , दिनांक 26 मई 2018 को ग्रमीणों द्वारा वन विभाग के खिलाफ बहुत आक्रोश पैदा हो गया था क्योंकि अभी तक विभाग द्वारा कोई मदद नही मिल पाई                  
गावँ के बुजुर्ग जयेंद्र सिंह चौहान द्वारा बताया गया कि जंगल को गावँ के लोगों द्वारा सालों से बचाया गया है, गावँ का जंगल जो आज इस स्थिति मे है उससे पूरे गावँ के लोग आहत है ।
दीपक चौहान जी द्वारा बताया गया आग लगने की सूचना वन विभाग को 4 दिन पहले ही दे दी गई थी परंतु विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा उक्त घटना में लापरवाही दिखाई गई है जंगल को गांव के लोगों ने पाल-पोश कर बड़ा किया है और अब जब जंगल आग की लपटों में है तो जंगल को ग्रामीणों अपनी जान पर खेल कर भी जंगल नही बचा पाए रहे हैं उन्होंने कहा कि आज के बाद वन विभाग को यहां के जंगलों में घुसने नहीं दिया जाएगा
आग को लगे हुए 3 दिन से ज्यादा का समय हो गया है आग बहुत धीमी थी आज जब हवा तेज़ हुई तो आग पूरे जंगल में फैल गई जिसमें सभी गांव के लोगों ने आग को बुझाने का पूरा प्रयास किया है इसकी सूचना गाँव वालों ने फिर वन विभाग को दी और मेल भी कर दी और CM के ऐप पर भी जानकारी दी गयी है।         
उक्त घटना मे भनस्वाड़ी गावँ के जनेंद्र सिंह,महावीर सिंह,अवतार सिंह, बुद्धि सिंह, जयवीर सिंह, विजय सिंह, अब्बल सिंह, मनमोहन सिंह, अंकित, सोहन, विनोद, विककी, उपेन्द्र सिंह, जीवन सिंह, प्यारु, भीमु और गावँ की सभी महिलाएं सम्लित रही  
वही वहां के फारेस्ट रेंजर से जब गांव वालों ने फोन पर बात की तो वह 30 किलोमीटर दूर बैठकर क्या बोल रहै थे कि हम आग को कंट्रोल करने की यहां से कोशिश कर रहे हैं जबकि गांव के समस्त नागरिक वहां अपनी जान में जोखिम में डालकर आग बुझा रहे हैं लेकिन अब तक सब कुछ तहस-नहस हो चुका है अब ग्रामीण ख़बर लिखे जाने तक अपने घरों में बैठे हैं और रो रहे है क्योंकि वो चाहकर भी कुछ ना कर पाए जितना कर सकते थे उतना उन्हीने किया क्योंकि जंगल किबआग ने अब बहुत बड़ा रूप ले लिया है पूरा जंगल जल कर खाक हो रहा हैं ऐसे में जंगली जानवर,ओर पक्षी भी आग की चपेट मेए। जलकर भस्म हो चुके हैं पूरा प्रकति का संतुलन बिगड़ गया हैं याबी सवाल ये उठाता है कि सूबे के मुखिया ने हाल ही मैं वन महकमे के साथ साथ जिला आधिकारी को भी फटकार लगाई थी और d.m से कहा था कि आप से पुछुगा की आग कैसे लगी और आग लगने पर क्या किया याबी देखना ये है कि इस ख़बर के बाद सीएम त्रिवेन्द्र रावत कठोर कदम उठाते है या फिर वही फटकार लगाकर बात को खत्म कर देंगे क्योकि सवाल यह पर जहा वनसंपदा को नुकसान पहुचने का है उससे ज्यादा प्रकतिक संतुल बिगड़ने का है क्योंकि आज पूरे पहाड़ के जंगल आग की चपेट मे है और वन महकमा लाचार तो वन मंत्री छूमंतर।

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