सीएम सर स्वास्थ्य मंत्री किसी ओर को बना दो !!

राज्य के मुख्यमंत्री के लिए अगर कोई चुनोती है तो वो है उनका खुद का स्वास्थ्य विभाग क्यो की मुख्य मंत्री जी इस विभाग के मंत्री है और अकसर कोई ना कोई ख़बर स्वास्थ्य महकमे से जब भी आती है सीएम के लिए मुसीबत बन जाती है बात देहरादून की है और जगह है दूंन अस्पताल  
अब सूनने मे आ रहा है कि दून अस्पताल में भी यदि बीपीएल कार्ड धारक के पास भी भेंट चढ़ाने को रकम नहीं है , तो उसका उपचार नही हो सकता आपको बता दे कि उत्तरकाशी के बड़कोट तहसील की भाटिया गाँव की एक 25 वर्षीय महिला 10 जून से दून अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों ने कई प्रकार की जांचे कराई और फिर बताया गया कि महिला के पेट मे ट्यूमर है। महिला को बताया गया कि यदि ऑपरेशन करना है तो साठ हजार रुपए देने होंगे। दो बार साठ हजार के इंतजार में आपरेशन की डेट टाल दी गयी। लेकिन, पीड़िता साठ हजार इकट्ठा नहीं कर पाई, तो डॉक्टर ने
यह कहकर ऑपरेशन करने से मना कर दिया कि तुम अस्पताल से चले जाओ ऑपरेशन कराना तुम्हारे बस की बात नहीं।
दो छोटे-छोटे बच्चे और साथ मे ससुर के साथ अपने टयूमर के ऑपरेशन की उम्मीद में एक महीने से दून अस्पताल में पड़ी इस महिला और परिजनों के पास घर में जो कुछ था, सब खर्च हो गया । अब अलग से साठ हजार रुपए, पीड़ित बीपीएल परिवार के लिए पहाड़ खोदने से कम नहीं। महिला के पास इतनी बड़ी रकम देने को नहीं है।
शुक्रवार को एक बार फिर परिजनों ने अस्पताल के सीएमएस को लिखित शिकायत कर पूरी आपबीती सुनाई, लेकिन सीएमएस के कानों में भी जूं तक नहीं रेंगी ।
इस पर उपचार कर रहे चिकित्सक ने बुरा भला अलग से कह दिया। परेशान परिजन चिकित्सकों के इस अभद्र व्यवहार की शिकायत लेकर कोतवाली पहुंचे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
किसी तरह ये बात शुक्रवार को जब यह बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची, बताया गया कि दून अस्पताल के CMS को CM कार्यालय से फोन कर उक्त महिला का इलाज तत्काल करने के निर्देश दिए गए, लेकिन पीड़ित महिला देविका देवी की फिर भी सुध नहीं ली गयी। देविका आज भी वार्ड 12 के बैड न. 20 पर अपने दो नौनिहालों के साथ जीवन और मौत के बीच जूझ रही है।
इस बीच एक और हैरान कर देने वाली खबर आई कि सीएम कार्यालय के फोन से राहत तो दूर उल्टे शनिवार सुबह दून अस्पताल ने पीड़िता को जबरदस्ती अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया। हालांकि, पीड़िता अभी भी अस्पताल में ही है।
रिपोटर सुनील थपलियाल ने जब इस सम्बंध में दून अस्पताल के सीएमएस डॉ पंत से जानकारी ली तो उनका कहना था कि प्रकरण उनके सँज्ञान में है और पीड़िता को देख रहे डॉ अभय कुमार का स्पष्टीकरण तलब कर लिया गया है। यदि , पीड़िता के आरोप सही पाए गए तो दोषी डॉ के खिलाफ गम्भीरता के साथ कार्रवाई की जाएगी। सीएम सचिवालय के फ़ोन के बाद पीड़िता के उपचार की बजाए उसको डिस्चार्ज कर दिए जाने के मामले में डॉ पंत ने कहा कि डिसचार्ज करने का मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। पता किया जा रहा है।
महिला के ससुर प्यारेलाल का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर के पांव भी पकड़े कि उनके पास जितने पैसे थे इतने दिन अस्पताल में रहते हुए वो सब समाप्त हो गए। अब उनके पास पैसे नहीं है। लेकिन, धरती के भगवान माने जाने वाले पैसे के इन लालचियों का दिल नहीं पसीजा।
ये जब तब ज़ीरो टॉलरेंस का नारा देकर सीना फुलाने वाली सरकार और उसके नुमाइंदों की असली हकीकत भी है कि जब बीपीएल परिवार को भी सरकारी अस्पताल में बिना पैसे के इलाज नहीं मिल पा रहा है। इलाज तो छोड़िए सीएम सचिवालय का फोन उलटे भारी पड़ गया पीड़िता पर सोचिए क्या कोई सीएमएस सच मे सीएम सचिवालय के निर्देश टाल सकता है वो भी इस हद तक कि जिसका ठीक से इलाज करने को बोला गया वो, डॉक्टर इलाज करने के बजाए उसे अस्पताल से बाहर कर दे। ऐसा नहीं हो सकता, या सीएम सचिवालय से फोन ही नहीं किया गया या फिर फोन करके डॉक्टर को सलाह दे दी गयी कि डिस्चार्ज कर दो. टेंशन खत्म। अब आप ही बताये फिर हम क्यो ना कहे कि राज्य के मुख्यमंत्री को स्वास्थ्य मंत्री किसी ओर को बना देना चाइए क्योकि उनके पास पूरे राज्य की जिमेदारिया है और इसलिए पूरा फोकस स्वास्थ्य विभाग पर नही हो सकता यदि सच मे राज्य मे स्वास्थ्य विभाग को दुरस्त करना है तो स्वास्थ्य मंत्री राज्य का अलग होना चाइए ओर उनके पास सिर्फ यही विभाग हो और कुछ नही तब जाकर स्वास्थ्य विभाग पर ठीक से फोकस होगा बुरा मत मानाना सीएम सर पर बात सच यही है कि तब ही हालत सुधरगे ।   ग्राउण्ड जीरो की  रिपोर्ट  – सुनील थपलियाल

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