सीएम सर धर्मयुद्ध लड़ने का समय आ गया है !

राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी जब से आप मुख्यमंत्री बने है तब से ही आपके अपने कुनबे के कुछ लोग यही सोचते रहे कि कैसे आपको कुर्सी से हटाया जा सकता है ओर आपके खिलाफ षडयंत्र भी खूब हुए पर बीजेपी हाईकमान का आप पर विस्वास ही है जो आपको ओर मज़बूत करता है                                          लेकिन सरकार जब आप खुद ही कही पर किसी को मौका दे दोगे तो आपके खिलाफ बोलने वालों की कमी नही ओर अब तो आप भी समझ गए होंगे कि हा मुझे थोड़ा आराम से बात करनी थी महिला टीचर से चाहे उनके कठोर ओर गलत शब्द आपको कितने ही चुभे होंगे पर आपको थोड़ा नर्म रहना था.                                            बस एक यही बात है बाकी अपने कोई अपराध नही कर दिया कोई गुनहा नही कर दिया कोई चोरी नही की जो आज़ आप इतने मीडिया मैं शोशल मीडिया मैं हीरो बने हुए है या विलन ये तो आप ही तय करे हम तो बस यही कहेंगे कि जितना मीडिया ने आपको सीएम बनते वक़्त नही दिखाया उससे ज्यादा आप अब जनता को दिखाए जा रहे है                        और जिसका कारण सिर्फ़ यही है कि आपने मतलब राज्य के मुख्यमंत्री ने महिला टीचर को सयंम रखने को कहा पर वो चुप नही हो पाई तो आप भी छोटे नेताओ की तरह बात करने उस समय महिला से लग गए बस इसे आप गलती माने या अपना अहंकार या कह ले आपका स्वभाव क्योकि आप भले ही शक्ल ओर भाव से कठोर दिखते है पर अंदर से आपका दिल है तो भावनात्मक ,पर जो दिखा वही बिकता है सर आपके गुस्से वाले या सयंम वाले  आदेश का पालन हो चुका है महिला टीचर निलंबित है और कही खामियां भी उनकी गिनाई गयी पर एक बात बताए सर क्या जब आप उनको जनता दरबार मे मिले तब क्या आपको महिला टीचर की खामियों या कमियों का ज्ञान था मतलब जानकारी थी मुझे लगता है आपको जानकारी नही थी                               खेर आज हर कोई आप पर शब्दो का वार कर रहा है पर आपके पक्ष मे किसी बीजेपी नेता का बयान अभी तक कुछ सुना नही है शिक्षा मंत्री तो ना जाने कहा चुप चाप बैठे गए है जो कुछ हुवा उसके लिए राज्य की सभी सरकारे बराबर की जिमेदार है क्योंकि सिस्टम का सिर्फ नाम है बाकी सब जुगाड़ से काम है ओर महिला टीचर का गुसा व्यस्था के खिलाफ था त्रिवेन्द्र रावत के खिलाफ नही बस शब्दो ने यहा पर त्रिवेन्द्र रावत को खलनायक बना डाला और बात बीजेपी हाईकमान तक पहुच गई है जो त्रिवेन्द्र से चिढ़ने वाले चाहते थे वही हुवा बोलता उत्तराखण्ड फिर बोल रहा है कि आपके आगे अभी साढ़े तीन साल ओर है और आपको कुर्सी से हटाने वाले 350 से ज्यादा इसलिए आप किसी को कोई मौका ना दे क्योकि बीजेपी हाईकमान बार बार साथ नही देने वाला आप पहाड़ के दर्द को समझने ओर जानने वाले नेता है इसलिए आप से उम्मीद है कि आप खुल कर राज्य हित मे अब फैसले ले जब शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ ही गया है तो फिर एक्ट के अनुसार जिस भी शिक्षक की तैनाती एक्ट के अनुसार नही उनको तुरंत एक्ट के अनुसार ही वही तैनाती के आदेश दिलवाइये आपकी धर्म पत्नी की तैनाती पर दुनिया और विपक्ष ने सवाल खड़े कर दिए है याबी आपका फ़र्ज़ बनाता है कि किसी भी नेता फिर चाहे वो बीजेपी का हो या काग्रेस का इनके परिवार से यदि कोई टीचर है तो संबको एक्ट के अनुसार वही तैनाती दिलवाए जहा होनी चाइए अगर किसी की इस समय एक्ट अनुसार तैनाती नही है तो आपने कहा था एक योद्धा की तरह आप धर्मयुद्ध लडेंगे तो सर समय आगया है क्योंकि आप ने देख लिया होगा कि महिला टीचर ओर आपकी बीच की बात पर अपनी बात रखने के लिए हमारी जानकारी के अनुसार राज्य का कोई भी मंत्री खबर लिखे जाने तक अभी तक आगे नही आया तो क्या ये मान लिया जाए कि उन्होंने अपने कप्तान को ही गलत मांन लिया है या ये समझा जाये कि आपने ही संबको इस प्रकरण में चुप रहने को। बोला है बात जो भी हो वो तो आप ही जाने बस हम तो ये जानते है कि महिला टीचर सालो साल से दुखी थी और उसके लिए पूरा सिस्टम 15 सालो से दोषी है आप तो बस एक मोहरा थे जो बस फ़स गए या फ़साये गए लेकिन अब आप अगर धर्मयूद्ध लड़े ओर एक्ट के अनुसार राज्य के सभी शिक्षकों की तैनाती वही हो जो नियम कहता है तो फिर इस बार आप विलन नही नायक बनेंगे फैसला आपको लेना है

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