सीएम सर भगत दा बोल गए रास्ते खोल गए!

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी जब बोलते है तो खुल कर बोलते है और उनके जवाब के बाद फिर सबके सवाल अपने आओ खत्म हो जाते है  
अल्मोड़ा मैं पूर्व मुख्यमंत्री एवं नैनीताल के सांसद भगत सिंह कोश्यारी खुल कर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के साथ खड़े नज़र आये आपको बता दू की उतरा पंत बहुगुणा ओर सीएम त्रिवेन्द्र रावत विवाद पर भगत दा बोले कि शिक्षिका प्रकरण पर मचे सियासी बवाल दुःखद घटना है ओर इस पूरे मामले के अत्यधिक तूल पकड़ने को मीडिया पर एक पक्ष ही लेने आरोप भी लगाया। उन्होंने एक नया राग छेड़ दिया और वो बोले कि अगर सरकारी कर्मचारियों को परिवार के साथ रहने का अधिकार है तो, एमएलए एवं एमपी को साथ रहने का अधिकार क्यों नहीं मिल सकता है।                                    भगत दा शनिवार को जिला भ्रमण पर सर्किट हाउस पहुंचे थे इस दौरान उन्होंने उत्तरा प्रकरण पर बेबाकी से अपनी राय रखी। इस मामले पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नेताओं, एमपी और एमएलए के पत्नियों की देहरादून में कार्यरत होने पर इन दिनों जिस तरह एक राजनैतिक मुद्दा बनाया जा रहा है वह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को सीएम से मिलने का एक मंच होता है, शिक्षिका को भी जनता दरबार में नहीं जाना चाहिए था। अगर, सीएम ने क्षिक्षिका को डाॅट भी दिया तो क्या हुआ। भगत दा बोल पड़े की जो मना करने पर अधिक बोले तो, उसे क्या गले लगाना चाहिए था। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और अधिकारियों को अपनी पत्नी के साथ रह कर कार्य करने का अधिकार हासिल है। तो एमपी, एमएलए को क्यों नहीं यह अधिकार मिल सकता। फिलहाल ज़िज़ तरह से भगत दा ने खुलकर अपनी बात रखी उस देख कर ये देखना होगा कि क्या अब भगत दा से सीख लेकर राज्य के ओर बड़े नेता भी इस प्रकरण पर कुछ बोलेगे या अब भी चुप ही रहेगे ओर देखना ये भी है कि भगत दा के इस बयान के बाद उतरा पंत बहुगुणा का क्या बयान आता है और राजनतिक गलियारों में अब कोन सी बात तूल पकड़ती है ये जल्द ही देखने को मिलेगा

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