सीएम सर आप को फिर बदनाम करने की साजिश !

राज्य के मुख्यमंत्री मंन्त्री पर लगातार हो रहे जुबानी हमलों ने अब एक नया रूप ले लिया है मुख्य रूप से सुभाष शर्मा ओर रघुनाथ नेगी लगातार c.m ओर उनकी पत्नी पर आरोप लगाते है जब भी मौका मिले तब पत्रकार वार्ता कर खुब हो हल्ला मचाया जाता है सच क्या है किनके आरोप में दम है ये तो सीएम त्रिवेन्द्र रावत ओर सुभाष शर्मा और रघुनाथ नेगी ही जाने पर अब इन दो लोगो के लिए सोशल मिडिया ओर वटसप पर संदेस आने लगे है जिसमे इन दोनों को गुलाम बताया गया है और इनके आका का नाम नही लिया गया है आप भी पड़े क्या चल रहा है सोशल मीडिया में ये सारे शब्द बोलता उत्तराखंड़ के नही है बल्कि जो वट्सअप पर चल रहा है वो आपके आगे ला रहा हूँ                                  आका के ग़ुलाम – भाग १

कहते है ग़ुलाम नही बनना चाहिए क्यूँकि ग़ुलामी की ज़िंदगी ज़िल्लत भरी होती है, गाली की तरह होती है और अगर मजबूरी में बनना भी पड़ा तो कम से कम आका तो सोच समझकर चुनना चाहिए। आजकल देहरादून में एक ग़ुलाम अपने आप को सुर्ख़ियो में रखने में मशरूफ़ है। छुटभये की गुंडागर्दी से शुरू हुई यात्रा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े गिरोह से लेकर कुख्यात निक्कू गैंग के सक्रिय सदस्य के रूप में आगे बढ़ती हुई शराब माफ़िया और भूमाफ़िया के रूप में बदस्तूर जारी रही। शराब की स्मगलिंग, डकैती, ज़मीनों का फ़र्जीवाड़ा और फिर गुंडा एक्ट में गिरफ्तारी इनकी उपलब्धियों में शुमार रही। ना तो ख़ुद के परिवार को चैन से जीने दिया और ना ही समाज को, जब कुछ कहा तो ग़लत ही कहा और जब कुछ किया तो ग़लत ही किया। गली के गुंडे से लेकर गैंगस्टर और नेता से लेकर फर्जी स्वयंभू समाज सेवक की विवादित यात्रा के इस मुसाफ़िर ने अपना नया पर्दापरण अब सोशल मीडिया एक्टविस्ट के रूप में किया है जो आजकल अपने आका के कहने पर लगातार प्रेस कांफ्रेस करने में लगा हुआ है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के प्रबल विरोधी इसके आका अपने तरकश से इस ग़ुलाम के अलावा रघुनाथ नेगी और विधायक संजय गुप्ता जैसे कई बाण मुख्यमंत्री की और छोड़ चुके है।।                    ये अलग बात है कि इन बाणों का मुख्यमंत्री की छवि पर कुछ ख़ास असर नही हुआ बल्कि अब इन्ही पर जो सवाल उठे है प्रेस कांफ्रेस कर उनके जवाब देने की ज़िम्मेदारी इन पर आ गयी है।
ग़ुलाम सुभाष शर्मा के लिए कुछ सवाल जिनका जवाब उत्तराखंड की जनता सुनना चाहती है…….

सवाल नं० १- उत्तर प्रदेश के कुख्यात निक्कू गैंग से आपके क्या और क्यूँ सम्बंध थे?

सवाल नं० २- पश्चिम उत्तर प्रदेश के बदमाशों के साथ-साथ कुख्यात अपराधी सुशील मूँछ के गिरोह के सदस्य आपके घर में क्यूँ शरण लेते थे?

सवाल नं० ३- १९९३ में देहरादून के एसएसपी गर्ग और शहर कोतवाल के के गौतम ने आपका सिर मुंडवा कर और गले में तख़्ती लटकाकर शहर की सड़कों पर पैदल क्यूँ घुमाया था?

सवाल नं० ४- उतराखंड बनने के बाद भी सीओ सिटी अजय सिंह द्वारा आपको घर से उठाकर डालनवाला हवालात में डालते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत मुक़दमा क्यूँ लगाया गया था?

सवाल नं० ५- अपनी धर्मपत्नी और बेटी को राजपुर रोड़ स्थित अपने घर से निकाल कर रायपुर स्थित दूसरे घर में किसी ग़ैर महिला के साथ आप क्यूँ रहते है?

सवाल नं० ६- मेरठ की एक महिला से फ़र्जीवाड़ा कर कर क्यूँ आपने उसके 80 लाख रुपए हड़प रखे है?

सवाल नं० ७- देहरादून में कुछ भी आपराधिक वारदात होने के बाद दून पुलिस सबसे पहले आपकी तलाश क्यूँ करती थी?    

आका के ग़ुलाम भाग – १ में देवभूमि की समस्त जनता आपसे इन सात सवालों के जवाब चाहती है आशा है आप प्रेस कांफ्रेस और सोशल मीडिया के ज़रिए हमें अविलंब जवाब उपलब्ध क़रायेंगे।।               अब बोलता है उत्तरखंड की इनके आका जो होंगे वो होंगे पर इस संदेश को लिखने वाले का आका कोन है ? क्योंकि जिस तरह से रघुनाथ नेगी ओर सुभाष शर्मा सीएम त्रिवेन्द्र रावत के पीछे पड़े है उसे देख कर तो ये लगता है कि सीएम के चाहने वाले अब इन लोगो की बैंड बजाने को तैयार है।            पर इससे नुकसान या फायदा जिसको भी होगा वो अलग बात पर ये आका वाली बात ने गुलाम वाली बात ने अब नई जग छेड़ दी है जो उनके ठीक नही जो सच को दबा रहे है और जो झूठ को आगे ला रहे है बोलता है उत्तराखंड़ अगर सुभाष शर्मा और रघुनाथ नेगी की बात मैं हर पत्रकार वार्ता के बाद दम है तो कोर्ट जाए p.i.l डाले सच जनता के आगे आएगा और दूसरी बात इनको आका का गुलाम कहने वाला पूरी बात सच्चाई के साथ पत्रकार वार्ता में लेकर आये।
क्योंकि इस संदेश को पढ़ने वाला हर वयक्ति यही सोचेगा की सीएम त्रिवेन्द्र रावत के पीछे ये लोग पढ़े है इसलिए अब सीएम के इशारे पर इन दोनों के ऊपर सोशल मीडिया मे हमला हो रहा है क्योकि ये दोनों सीएम के ही दुश्मन बनकर खड़े है जबकि सच्चाई ये है कि इन सब बातों और कारणों से सीएम अनजान है तो क्या ये मान लिया जाए कि फिर सीएम को उनके नाम को बदनाम करने के लिए गुलाम आका भाग एक को शोशल मीडिया और वट्सअप पर भेजा जा रहा है क्योकि जो भी इस संदेश को पड़ेगा वो पहले सीएम त्रिवेन्द्र पर ही शक करेगा बाकी उन दोनों पर तो नज़र बाद मे जायगी इस लिए बोलता उत्तरखण्ड कहता है कि सीएम के खिलाफ फिर बडी साज़िश तैयार है

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