ये संजय है जो हमारे पहाड़ जिले चंपावत के निवासी है। ओर नोकरी देहरादून मैं किसी फैक्ट्री मैं करते है ।संजय को जब मालूम चला कि वो जल्द पिता बनने वाले है तो उन्होंने अपनी धर्म पत्नी जी को दूंन महिला मेडिकल (अस्पताल) में भर्ती कराया , संजय सहित उनकी पत्नी का देखा गया संतान सुख का सपना साकार होने जा रहा था।


लेकिन इस बीच डॉक्टर की टीम ने संजय को बताया कि उनका बच्चा पेट में ही खत्म हो चुका है।
संजय टूट गए , मन उदास हो गया, ओर उनकी पत्नी की आंखे भी सब कुछ बया कर रही थी।
जैसे तैसे संजय ने खुद को ओर पत्नी को सभाला ।ओर अब सवाल ये था कि पत्नी के पेट मे खत्म हो चुका नवजात को बाहर कैसे निकाला जाए डाक्टर की टीम तो अपना काम कर रही थी।
पर संजय को अब डर सताने लगा कि बच्चा तो अस्पताल पहुचने से पहले ही खत्म हो चुका है कही पत्नी को कुछ हो ना जाये कोई शरीर मैं जहर ना फेल जाए क्योकि मृत नवजात संजय के अनुसार पेट मैं दो दिन से अधिक समय तक रह गया था।


फिर संजय परेशान होने लगे और घबरा गए कि कही डॉक्टर लापरवाही तो नही कर रहे है , उनके मन मैं बहम पैदा होने लगा , फिर संजय ने जैसे तैसे अपनी आवाज मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तक पहुँचा डाली, ओर जब इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री को मिली तो उनके केम्प कार्यलय ने दूंन महिला अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों से संजय की पत्नी के पूरे केस को सुना ,समझा और अस्पताल को निर्दश दिये कि उचित इलाज समय पर हो


बस फिर क्या था सरकार तक पूरी जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन मुस्तेद हो गया और परिणाम ये रहा कि संजय की पत्नी ने मृत बच्चे को जन्म दिया जिसके बाद अब संजय की पत्नी स्वास्थ्य है ठीक है। ओर उनका अच्छे से इलाज हो रहा है संजय अब खुश है कि उनकी पत्नी की जान बच गई जिसके लिए वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का धन्यवाद देते नही थक रहे है।
संजय का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री जी की तरफ से अस्पताल वालो से या डॉक्टर से बात नही की होती तो कुछ भी हो सकता था, अब मेरी पत्नी ठीक है मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र जी का फिर दिल से धन्यवाद ।वही जब संजय से पूछा गया कि आपको यू क्यो लगा कि यहा डॉक्टर ठीक से इलाज नही कर रहे है तो संजय बोले कि मै घबरा रखा था ओर कोई भी डॉक्टर या नर्स ठीक से बात तक नही कर रहा था ना ही हमको समझा रहा था कि मरीज कैसा है तुम्हरा ओर कब मृत बच्चे को निकाला जाएगा मा के पेट से । वही जानकारी अनुसार डॉक्टर अपने मरीज की हर हालत से परिचित थे और मरीज को खतरा पैदा ना हो उस सही समय का इंतजार कर रहे थे जब संजय की पत्नी के पेट से मृत नवजात की डिलवरी कराई जाये जिसके लिए सही समय पर दवाई जारी थी।
खेर संजय तो बार बार यही बोल रहे है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का धन्यवाद उन्होंने मदद की मेरी ओर अब अस्पताल के स्टाफ ओर डॉक्टर से भी बहुत खुश नजर आए।
बहराल जो बात बोलता उत्तराखंड समझ पाया इस केस को देखकर वो ये है कि कभी कभी डॉक्टर मरीज़ के साथ रहने वाले व्यक्ति से या उनके परिजनों से ठीक से बात नही कर पाता , या उन्हें समझा नही पाता जिसे हम डॉक्टर ओर मरीज़ के परिजनों के बीच काउसिलिंग कहते है।
अगर ये ठीक से हो जाये तो स्याद अस्पताल की आधी समस्या खुद ही खत्म हो जाये।
क्योकि ये सिर्फ एक संजय की बात नही है कही संजय या उनके जैसे लोग अस्पताल मैं आये दिन मरीज के साथ आये परिजन ओर डॉक्टर के साथ ठीक से बात ना होने कि वजह से परेशान हो जाते है ओर बस फिर क्या सोशल मीडिया तो है ही ना, ओर सबके पास अब तो वट्सअप ओर अच्छे वीडियो बनाने वाले मोबाइल ।उस समय हर कोई गुस्से मैं होता है और जिसको जो बोलना वो बोलने लगता है , तो उसे देख आस पास के चार भाई और जुड़ जाते है बस फिर क्या सब वायरल हो जाता है फेसबुक मे , वट्सअप मै
ओर फिर अस्पताल बदनाम, सरकार बदनाम , जबकि अधिक बार ये देखा गया कि आपसी सामंजस्य मरीज ओर अस्पताल प्रशासन या डॉक्टर के बीच ना होने से सरकार पर सवाल खड़े हो जाते है।लिहाजा अस्पताल प्रशांसन को ये समझना होगा कि अब ये सब नही चलेगा।
आप बेहतर इलाज़ करे ,ठीक से मरीज के परिजनों के साथ बात करे ,उन्हें समझाये उनके सवालों को अपने जवाब से सन्तुष्ट करे तो आधी दिक्कत यही खत्म हो जाती है। ध्यान रखे स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी इस विभाग के खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत मंत्री भी है इसलिए उन तक हर ख़बर ओर सही जानकारी पहुँच ही जाती है इसलिए गलत पाए जाने पर कोई भी नप सकता है फिर चाहे वो किस भी पद पर क्यो ना हो।





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