उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अब मोदी सरकार 2 के बनने के बाद ताबड़तोड़ बेटिंग करते उत्तराखंड मैं दिखाई दे रहे है कही फैसले उन्होंने बीते दिनों मैं ले डाले है जिससे भूमाफियाओं अधिक परेशान है और अब उत्तराखंड मैं खलबली मची हुई है उनमें जो जवाबदेही नही है, जिनका अपने काम के प्रति रवैया ठीक नही , जो जनहित के कामो को लटकाने वाला है , फिर वो सरकारी अफसर हो या कर्मचारी , या फिर दाईत्व धारी ,या कोई अन्य ही क्यो ना हो उनके लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत नए अवतार मे दिखाई दे रहे है जिससे वो लोग सदमे में है मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र साफ तौर पर कह चुके है कि विकास की फाइलों को बेवजह लटकाए रखना या अपने दायित्व के प्रति अंजान बने रहना भी अनैतिक आचरण है ओर सभी को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति न्याय करना होगा और यही नैतिक हैं।
इससे पहले त्रिवेंद्र रावत कह चुके है कि मनमौजी अफसर, कर्मचारी, अधिकारी या सरकार मैं महत्वपूर्ण पदों मैं रहने वाला कोई भी हो वो सुधर जाए नही तो हमारे पास आगे का रास्ता बिल्कुल साफ है
बता दे कि मंगलवार को सचिवालय में ‘लोकसेवा में नैतिकता’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में सचिवालय के लोकसेवकों को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत संबोधित कर रहे थे।
बता दे कि पहली बार पिछले 18 सालों में आयोजित इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में लोकसेवकों ने शिरकत की। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि लोकसेवक उत्तराखंड के आवरण हैं। हम सभी से राज्य की पहचान होती है। ओर कार्मिकों से उनके विभाग की पहचान भी स्थापित होती है। मुख्यमंत्री बोले कि शासन व सरकार में शामिल लोगों के आचरण से सरकार की छवि बनती है। यदि अच्छी छवि है तो जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाता है। बुरी छवि होने से नकारात्मक संदेश जाता है। हम सभी चाहें सामान्य आदमी हों, कर्मचारी हों या बड़े अधिकारी हों, नियम कायदे सभी के लिए एक समान हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय बहुत महत्वपूर्ण संस्था है। यहां लिए जाने वाले निर्णय 7 लाखों लोगो के जीवन पर प्रभाव डालते हैं । मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि निर्णय लेने या फाइलों के निस्तारण में देरी की प्रवृत्ति से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य का भला होगा तो हमारा स्वत: ही भला होगा। वही मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने कार्यों को लेकर प्रदेश के दूरदराज से आम लोग सचिवालय आते हैं। कुछ लोग फोन पर पूछताछ करते हैं। उनकी हमसे बहुत अपेक्षाएं हैं। उनकी सुनवाई होनी चाहिए। वे सचिवालय से अच्छे अनुभव लेकर लौटें। इससे सचिवालय और सरकार की छवि बनती है।
वही इस कार्यशाला में यह बात भी सामने आई कि विभागों के स्तर पर शासनादेश होते हैं। इन्हें एनआईसी की वेबसाइट पर तत्काल अपलोड होना चाहिए। खासतौर पर वित्त और कार्मिक व अन्य अहम विभागों के शासनादेशों को अपलोड करने में हीलाहवाली नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इनकी आवश्यकता अन्य विभागों को भी होती है।
वही उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कहा कि
हमें कोई भी निर्णय लेते समय सही और गलत का ज्ञान होना जरूरी है। यदि निर्णय लेने में दुविधा है तो सबसे गरीब व्यक्ति का विचार करें, क्या हम अपने फैसले से उसके लिए कुछ अच्छा कर पा रहे हैं। राज्य ने हमें बहुत कुछ दिया है, हमें राज्य को इससे अधिक लौटाना है।
तो वही पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी जी ने कहा कि हम अधिकारियों को अच्छा वेतन अन्य सुविधाएं मिलती हैं, जबकि एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिसे अपनी सामान्य जरूरतों का पूरा करने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है। इस मायने में हम भाग्यशाली हैं कि हमें यह अवसर मिला है कि आमजन के जीवन को सुधारने में सहयोग दें।
बहराल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर राज्य के बड़े अफसरों ने आज खुल कर अपने दिल की बात कही तो इस बातों ही बातों मैं संदेस भी दे डाला है कि अब किसी की भी जरा से भी लापरवाही बर्दास्त नही होगी इसलिए सावधान ओर अपने काम के प्रति जवाबदेही रहने की सीख तक दे डाली। अब देखना ये है कि आज की कार्यशाला से कितने विभागों के सरकारी अफसर, कर्मचारी ओर राज्य के दाईत्व धारी या सरकार से वेतन लेना वाला हर व्यक्ति खुद मैं कितना सुधार लाता है क्योकि अगर ये सुधार हो गया अंन्तिम गांव के व्यक्ति के दर्द को नोकरशाही ने समझ लिया , विधायिका ने समझ लिया , दाईत्व धारियों ने समझ लिया भाई वेतन तो ये भी लेते है ना ? तो समझ लो पहाड़ की आधी समस्या खुद ब खुद दुर हो जाएगी।
ओर वैसे भी पूरे उत्तराखंड की जनता यही कहती है कि यदि इस बार त्रिवेंद्र सरकार मैं सिस्टम मैं बेठे लोग नही सुधरे तो , फिर कोंन इन लोगो को सुधार पायेगा।



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