पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि
जहां-कहीं मेरा कोई सार्वजनिक कार्यक्रम होता है, भा.ज.पा. के नेतागण एक सवाल तत्काल उछालते हैं कि, उस कार्यक्रम में कांग्रेस का अमुख-अमुख नेता क्यों नहीं आया? क्या यह सम्भव है कि, किसी पार्टी के सारे नेतागण एक ही सार्वजनिक समारोह में या पार्टी द्वारा आयोजित प्रत्येक सार्वजनिक समारोह में एक साथ दिखाई दें? क्या यह भौतिक रूप से फिजिकली सम्भव है और कोई भा.ज.पा. का व्यक्ति, त्रिवेन्द्र सिंह रावत जी से क्यों नहीं पूछता कि, उनके सार्वजनिक समारोहों में उनके पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष क्यों नहीं दिखाई देते? उनके मंत्रिमंडल के कुछ ही साथी, एक मेयर और एक-दो राज्यमंत्री ही क्यों उनके साथ दिखाई देते हैं? बाकी मंत्रीगण क्यों उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों में, राजकीय कार्यक्रमों में नहीं दिखाई देते हैं? कोई भा.ज.पा. के लोगों से यह सवाल क्यों नहीं पूछता कि, उनके मुख्यमंत्री या प्रदेश अध्यक्ष के सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनकी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष, मनोहर कान्त ध्यानी जी, पूरन चन्द्र शर्मा जी, बची सिंह रावत जी, श्री बिशन सिंह चुफाल जी आदि क्यों नहीं दिखाई देते हैं? यदि वो लोग मुख्यमंत्री जी के कार्यक्रमों में नहीं आ रहे हैं या प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के कार्यक्रमों नहीं आ रहे हैं, तो इसे मान लिया जाय कि, भा.ज.पा. के अन्दर धड़े बन्दी है, तो भा.ज.पा. हमारी पार्टी में जुएं खोजने बन्द करें और अपनी भैंसों को देखें, अपने खोट को, अपनी कमियों को देखें, हम अपनी कमियों का खुद निदान कर लेंगे।

 


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