सरकार के एक मा. मंत्री व उनके परिवार के कोरोना से संक्रमित होने के विषय पर कॉंग्रेस जिस प्रकार के घटिया बयानबाजी कर रही है, वह नितांत अमानवीय है और असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा को दर्शाता है ।कोविड-19 के दौर में कांग्रेस के रोज़मर्रा की बयानबाजी प्रवासियों,ग्राम प्रधानों कोरोना वॉरियर्स एवं जन मानस का मनोबल तोड़ने वाली है

और अफ़रातफ़री का माहौल पैदा करने वाली है । क्या कभी कांग्रेस ने यह समझने की कोशिश की है कि उनके बयान बाज़ी का दुष्प्रभाव क्या हो रहा है ? सभी जानते हैं कि सभी सरकारें संसाधनों की कमी से जूझ रही है कांग्रेस का यह कहना कि सभी प्रवासियों के खातो में 10-10 हज़ार एक मुश्त जमा कराओ मतलब लगभग 200 करोड़ रुपया ! सभी प्रवासियों को प्रत्येक माह साढ़े सात हज़ार प्रतिमाह दो और छह माह तक दो मतलब 900 करोड़ । यह तो कांग्रेस की उसी प्रकार के जुमलेबाजी है जिस प्रकार राहुल गांधी जी ने लोकसभा चुनाव से पहले कहा था कि हम हर बेरोज़गार के खाते में 72000 रुपया देंगे !
ऐसी स्थिति में मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूँ कि कांग्रेस का क्या सहयोग करोना के विरुद्ध लड़ाई में रहा ? क्या कांग्रेस के किसी भी मा. विधायक ने एक कोड़ी का योगदान भी अपने वेतन भत्तों से किया है ? उल्टा उसमें घटिया तर्क दे रहे हैं कि सरकार ने उनसे सहमति नहीं ली है । मतलब साफ़ है कि योगदान के नाम पर एक फूटी कौड़ी देने को तैयार नहीं है और उपदेश परोपकार के दे रहे हैं । ख़ुशी की बात है कि मुख्यमंत्री जी के आह्वान पर सभी प्रधानगण बढ़ चढ़कर व्यवस्था में योगदान कर रहे हैं और सभी कोरोना वॉरियर्स सर्वोच्च सेवा भाव का प्रदर्शन कर रहे हैं जहाँ तक मा.मंत्री जी और उनके परिवार का संक्रमित होने का प्रश्न है तो कोविड-19 के संबंध में पूरी दुनिया के विशेषज्ञों की राय है कि किसी भी तरह से शत प्रतिशत बचाव संभव नहीं है अधिकतम 95% ही बचाव हो सकता है 5% संक्रमण की संभावना है हर दशा में बनी रहती है और यह इसी श्रेणी में आता है सरकार बीमारी से लड़ रही है और कांग्रेस बीमारों से लड़ रही है ।अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है!


मुन्ना सिंह चौहान
मुख्य प्रदेश प्रवक्ता
भारतीय जनता पार्टी
उत्तराखंड


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