भाई ये उत्तराखंड़ है बल यहा फिर पहाड़ मे बिकने लगी गाड़ियों मे शराब खुलकर बल !

उत्तराखंड़ मैं माना कि ये शराब ही सरकार की आय का सबसे बड़े साधनों मे से एक है ।
ओर इसलिए ही राज्य सरकार राज्य को तो क्या पहाड़ को भी शराब मुक्त नही कर पा रही है ।फिर बात चारधाम यात्रा मॉर्ग पर शराब की दुकानें हो या गाँव गाँव के बीच मे । तमाम महिला शक़्ति के विरोध के बाद भी खुलकर चल रही है क्योंकि सरकार चलवा रही है। बीच मे तो हमने घर घर और गाड़ियों मे शराब को बिकते देखा था और आजकल फिर जनपद पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर प्रखंड के राजा जी टाइगर रिजर्व में बीन नदी के समीप जो खुली शराब की दुकान है वो टाइगर क्षेत्र में जी हां फिर। चलने लगी है गाड़ियों में शराब की दुकान।          अब भले ही टाइगर रिजर्व के निदेशक ने दिए गाड़ी को सीज के आदेश दे दिये है पर हिमत किस की जो सीज करे । आपको बता दे कि
पौड़ी जनपद के यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के बीन नदी के समीप गाड़ी में शराब की दुकान खोल दी गई, ओर राजा जी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में खुलेआम बेची जा रही थी ये शराब, टाइगर रिजर्व में रहने वाले ग्रामीणों को जहा टाइगर रिजर्व होने के चलते सड़क, पानी, पुल जैसी मूल भूत सुविधाओं के लिए रिजर्व फॉरेस्ट की स्वीकृति की आवश्यकता होती है, वही रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में शराब विक्रेता के धड़ल्ले से बेची जा रही शराब को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार को शराब का सरकारी राजस्व देने वाले शराब विक्रेताओं पर टाइगर रिजर्व का कोई नियम लागू नहीं होता है।     जहा टाइगर रिजर्व के निदेशक सनातन सोनकर ने रिजर्व फारेस्ट में शराब बेच रही गाड़ी को सीज करने के आदेश अधीनस्थ अधिकारी को दिए थे। लेकिन शराब विक्रेता वन अधिकारी के सामने ही शराब की गाड़ी लेके चलता बना और वन विभाग के वार्डन अजय शर्मा शराब विक्रेता को जाते हुए देखते रह गए, वही निदेशक सनातन सोनकर ने कहा है कि किसी भी स्थिति में रिजर्व फॉरेस्ट में शराब बिकने नही दी जाएगी। 
गौरतलब है कि शराब का उक्त ठेका उर्मिला देवी के नाम पर स्वीकृत है जिसको किमसार क्षेत्र में खोलने की अनुमति है जबकि शराब विक्रेता ज्यादा मुनाफे के लिए अवैध तरीके से शराब की बिक्री राजा जी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कर रहा है। ओर जहा भी इस गाड़ी के चलते चलते ग्राहक मिल जाये ये वही पर देने लगते आधा पवा ओर बोतल। बहराल जब जब ख़बर मीडिया मे आती है उसके बाद ही कार्यवाही होती है।और फिर कुछ दिन बाद मामला शांत होने के बाद फिर वही नज़ारा दोबारा देखने को मिलता है जो अभी दिखाई देता है। आबकारी मंत्री प्रकाश पंत की छवि एक साफ नेता और मंत्री की लेकिन इस आबकारी विभाग की वजह से आये दिन वो भी अब सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों मे घिरे रहते है। क्योकि यहा तो सवाल आबकारी मंन्त्री से ही पुछेगे ना । कड़वा सच ये है कि राज्य सरकार राज्य तो छोड़ो पर जहा जहा शराब की दुकानों का खुल कर विरोध मात्रशक्ति करती है। वहा भी सरकार उन दुकानों को बंद करने का साहस ना जुटा पाई ।।                                          भगवान सिंह पौड़ी गढ़वाल

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