भैरोगढ़ी बाबा के मंदिर जो आया उसकी मनोकामना बाबा ने की है पूरी आप भी जरूर जाना बाबा के द्वार

पौड़ी गढ़वाल के केतुखाल से भगवान सिंह  की रिपोर्ट                                                                               जय भैरवगढ़ी की भैरो बाबा सबकी मनोकामना पूरी  करे    प्रसिद्ध भैरवगढ़ी मंदिर में शनिवार को मेला आयोजित हुवा जिसमे हजारों श्रद्धालुओं ने की पूजा अर्चना ओर बाबा से लिया आशीष आपको बता दे कि
उत्तराखंड के लैंसडौन से बीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है प्रसिद्ध भैरवगढ़ी मंदिर जहा जाने के लिए केतुखाल में आकर गाड़ी से उतारना पड़ता है उसके बाद यही से बाबा के मंदिर के लिए पैदल रास्ता है इस रास्ते पर चलकर लगभग 45 मिनट की पैदल यात्रा करने के बाद आप पहुच जाते है बाबा के मंदिर शनिवार को यहा एक दिवसीय पूजन और यज्ञ का आयोजन किया गया।जिसमें दूरदराज से आये हज़ारो श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगी।                                          यहा सुबह से ही मौसम उतार चढ़ाव ले रहा था तो बाबा के भक्त मॉर्निंग से ही बाबा के जयकारे लगाते भेरो बाबा के दर्शन के लिए आ रहे थे आपको बता दे कि.मंदिर समिति  के    सद्स्य  सुरेंद्र सिंह            विक्रम सिंह कुशाल सिंह जगदीश डोबरियाल
मुकेश कुमार किरती मनोज रावत डबल मियां मनीष    जी ने बताया कि
लँगूर पट्टी के बकरोड़ी गांव में हर साल होने वाले इस यज्ञ में हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इससे बाद इसका आयोजन मेले के रूप में किया जाता है। आपको बता दे कि स्थानीय लोग ओर आस पास के गाँव वालों के लिए आज का दिन बहुत बड़ा होता है जो लोग गाँव से दूर रहकर अन्य शहरों मे नोकरी करते है वो भी इस मौके पर यहा पहुच कर बाबा के दर्शन करने के बाद अपने परिवार के साथ मेले मैं शिरकत करते है शनिवार को भी यही नज़ारा देखने को मिला भेरो बाबा के भक्तों ने यहां पूजा अर्चना करने के बाद मेले में लगने वाली दुकानों से जरूरी सामान भी खरीदा ओर अपने परिवार को खूब खिलाया            उन सबके लिए ये दिन किसी बड़े उत्सव से कम नही यहां पर कई तरह की दुकाने सजी रहती हैं।जिनसे लोग खूब खरीददारी करते हैं। आपको बता दे कि इस मंदिर की मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा अर्चना करता है ।उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इसी कारण पूरे क्षेत्र के लोगों के साथ ही प्रवासी भी इस वार्षिक पूजन का एक साल तक इन्तजार करते हैं               और जून महीने में यहां आकर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
कहा ये भी जाता है कि यह इष्ट देव के रूप में पूजे जाने वाले भैरव बाबा का एक मूल स्थान है. इसी कारण भैरवगढ़ी को अपना कुलदेवता व इष्ट देवता मानने वाले श्रद्धालु इस पूजन में अवश्य पहुंचते हैं। आपको बोलता उत्तराखंड बात रहा है कि एक समय तक बाबा खुद आस पास वाले गाँव वालों को खुद विपदा आने से पहले आवाज़ लगाकर स्वाधान करते थे तो लोगो के सपनो मैं आकर भेरो बाबा उनको मुश्किल घड़ी आने से पहले आगह करते थे तब आस पास के गाँव वाले सचेत हो जाते थे और बाबा के दर्शन कर उनको धन्यवाद कहते थे आज भी कुछ भाग्यशाली लोगो को भैरो बाबा सपने मे दर्शन देते है और कुछ पुराने बुजुर्ग लोगो को आज भी भेरो बाबा की आवाज सुनाई देती है सालो साल पहले यहां पर बकरों की बलि देने की प्रथा भी थी, लेकिन जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ी यह प्रथा भी समाप्त हो गई अब पिछले कई सालों से यहां पर सात्विक पूजा ही की जाती है। ओर पूरे पौड़ी गढ़वाल हो या भैरो बाबा के भक्त वो यहा जरूर आते है।  अपने छोटे  छोटे बच्चों को लेकर                                                                                यहा आस पास के गाँव वाले जब भी बाबा के दर्शन करते है तो गाँव गाँव मे पानी आजाए  ये दुवा  भी मागते है क्योंकि आपको बता दू साल 2006 से यहा बाबा के नाम से ही भेरोगढ़ी पम्पिंग योजना आरंभ हई थी पर आज 12 साल बाद भी यहा पानी गाँव गाँव तो छोड़िए जो टैंक बाबा के मंदिर के पीछे बना है वही तक भी पानी नही आज तक पहुचा जबकि खाली टैंक मैं अब दरार पढ़ चुकी है गाँव वाले कहते है कि जब बाबा की इच्छा होगी तभी पानी आयेगा गाँव मे तो कुसी लोग राजनेताओ को कोसते है कि इन 12 सालो मे 5 मुख्यमंत्री बदल गए पर पानी टैंक तक नही आया।                              फिलहाल सब गाँव वाले लोग बाबा के आशीष से खुश है और यहा मंदिर तक आने वाले दूर दराज से बाबा के भक्तों की भी मदद करते है जितना उन गाँव वालों से हो सके उतनी हर तरह से भक्तों की मदद कर गाँव वाले खुश होते फिलहाल अब सबको इंतज़ार है अगले वर्ष का भक्त बाबा से बोलकर चले गए है कि बाबा परिवार मे संब ठीक रखना अगले वर्ष फिर आयेगे। जय भैरो बाबा की सबकी की मनोकामना पूरी करना भगवान

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