बंद करो ये षडयंत्र! मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत तीन साल ओर !

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राज्य के मुख्यमंन्त्री त्रिवेन्द्र रावत का मुख्यमंत्री बनना उन पर इतना भारी नही पड़ा जितना भारी उन पर जीरो टालरेश पढ़ गया। उन्होने किसी को कुछ खाने नही दिया बात जीरो टालरेश की है जनाब जो ईमानदार छवि के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कुर्सी पर टिकने नही दे रही है और आये दिन इसी जीरो टालरेश के चलते त्रिवेन्द्र के खिलाफ खूब षडयंत्र भी हो रहे है । भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और धर्म युद्ध का ऐलान ज़िस दिन से ही सीएम त्रिवेंद्र ने किया उस दिन से ही राज्य कुछ वो नोकरशाह जो आज करोड़ो के मालिक है उनके बहीखाते की किताब बंद हो गई, राज्य के वो ठेकेदार जिन्होंनो खूब माल कमाया आज उनका काम तमाम हो गया , खनन वाले हो भूमाफिया या फिर शराब माफिया सब आज ठंडे बस्ते में चले गए। कहने का मतलब है जीरो टॉलरेंस का असर दिखने लगा है भाई ये त्रिवेन्द्र के लिए हो रहे षडयंत्र बोल रहे है कि हमरा दुश्मन जीरो टालरेश है और इसको चलाने वाला त्रिवेन्द्र इसलिए इसकी छबि को खराब करने के लिए जो भी हो करेगे ओर शायद कर भी रहे होंगे ।
कभी उत्तरा प्रकरण के बहाने तो कभी सोशल मीडिया में उनके किसी हमशक्ल की फोटो को वायरल कर तो कभी विधायकों की चाय पार्टी के बहाने तो कभी उनके बढे नोकरशाह ओम प्रकाश के बहाने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत पर हमला बोला गया ओर अब तो हद ही हो गई एक बार फिर किसी ने एक गीत निकालकर CM की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। इस गीत के बाद एक बार फिर राज्य की सियासत गरमा गई है। बिना मामले की पड़ताल किए कुछ कथाकथित मीडिया घरानों ने सीएम त्रिवेंद्र को टारगेट करना भी शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के ख़िलाफ़ यूट्यूब में चलाये जा रहे गीत पर भाजपा ने गहरी आपत्ति व्यक्त करते हुए इसे गहरे षड्यन्त्र का हिस्सा बताया है । उन्होंने कहा कि मामला गम्भीर है और इस पर क़ानूनी कार्यवाही होना भी आवश्यक है।
इससे पहले शराब की बोतलों का मामला भी सामने आया था। था कोई ओर ओर नाम उछाल दिया था मुख्यमंत्री का। 

त्रिवेंद्र रावत पहले ही बोल चुके है कि कुछ लोग हैं जो सरकार के आने के बाद से ही षड्यंत्र कर रहे हैं। वे ही इस प्रकार की चर्चाएं और दुष्प्रचार कर रहे हैं। विपक्ष के तो हैं ही, कुछ और लोग भी इसमें शामिल हैं।
इस गीत के वारयल होने से बीजेपी के वो नेता कार्यकर्ता चिंता मे है जो त्रिवेन्द्र को पसंद करते है और कुछ वो लोग है जो चर्चा कर रहे है कि
उत्तराखंड राज्य की 17 साल की राजनीति में बीच बीच मे लोक गीत अपनी धमक दिखाते रहे हैं। लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के दो लोक गीतों ने इस पर्वतीय राज्य की राजनीति की दिशा बदलकर रख दी थी। ‘‘नौछमी नारैण’’ और ‘‘अब कदके खाल्यो’’ गीतों ने दो नेताओं की राजनीति को पलीता लगा दिया था। ओर अब ऐसे मे। एक और गीत वर्तमान मुख्यमंत्री पर आया है। आपको मालूम ही है कि पिछले दोनों गीत राजनीतिक भ्रष्टाचार पर प्रहार कर रहे थे, लेकिन यह गीत मुख्यमंत्री पर निजी टिप्पणी कर रहा है, साथ ही विकास की राजनीति और दिल्ली की उत्तराखंड पर पकड़ और उत्तराखंड के नेताओं की चमचागिरी की बात भी करता है। खास बात यह है की यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और घर-घर पहुंच रहा है। 
नौछमी नरैण ने नारायण दत्त तिवारी की राजनीति की चूलें हिला दी थी। तब वह उत्तराखंड की राजनीति में धूमकेतु की तरह छाए हुए थे। सीधे प्रहार करने वाले शब्दों का प्रयोग कर नेगीदा के गीत के बोलों ने तिवारी जनित राजनीति की चिंदियां हवा में इस कदर उड़ा दी कि हर कोई असलियत को समझने लगा था। तिवारी के पांच साल के कार्यकाल के बाद कांग्रेस पार्टी को मिली हार में दूसरे कारण चाहे जितने प्रभावी रहें हों, नौछमी नारैण की भी भूमिका रही, इसे कोई नकार नहीं सकता है। उसके बाद अब कदके खाल्यो गीत रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल पर था। स्टर्डिया घोटाला, 56 परियोजना घोटाला समेत कई घोटालों की पोल खोलते इस गीत की भूमिका निशंक को कार्यकाल के बीच में ही हटाए जाने में जरूर रही, यह बात अलग है कि यह कितना कम, कितना ज्यादा थी।

अब त्रिवेन्द्र के लिए नया गीत आया है। जिसमें वर्तमान मुख्यमंत्री पर सीधे प्रहार किया गया है। उनके लिए झांपू जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। मुख्यमंत्री पर निजी तौर पर कई अभद्र सी लगने वाली टिप्पणियां भी की गई हैं। इस गीत के वीडियो में रौशन रतूड़ी, उनकी टीम तथा गढ़वाल की खास पट्टी का भी उल्लेख किया गया है। इसके कई राजनीतिक निहितार्थ निकलते हैं, तो क्षेत्रीय राजनीति का घालमेल भी इसमें दिखाई देता है। सोशल मीडिया पर यह गीत जबरदस्त वायरल हो रहा है। इस पर वाद विवाद भी खूब चल रहा है। कुछ लोग इस गीत को गाने वालों के साथ रोशन रतूड़ी के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे हैं तो कुछ लोग उनके साथ भी खड़े दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया में रोशन रतूड़ी के कई वीडियो भी चल रहे हैं। जिनमें शुरूआती वीडियो में वह कठोरता से यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि नेताओं से क्यों डरते हो, मैं तो नहीं डरता। एक अन्य वीडियो में उनके बोल थोड़ा बदले हैं, वह लोगों से ऐसे गीतों में उनके नाम का उपयोग न करने को कह रहे हैं।
राजनीति में सबकुछ जायज होता है। इसीलिए तो यह सब नहीं हो रहा है

: बहराल बोलता उत्तराखंड तो सिर्फ ये कहता है कि बात जो भी हो पर सच ये है कि एक नेता एक चुनाव लड़ने के लिए 4 से 5 करोड़ रुपया खर्च करते है जो सुना जाता है फिर उनकी जीत हो या हार ये उनकी किस्मत पर इस बार फिर जब चुनाव होंगे तो किसी के पास इतना खुद का पैसा नही होगा वो फिर बीजेपी से हो या कांग्रेस से ओर ना कोई उनके चाहने वाला दे पाएगा क्योंकि कमाई बंद है तो फिर माल कहा से कोई दे और कमाए? भाई जीरी टालरेश है तभी तो त्रिवेन्द्र के पीछे पड़े है। कुछ बीजेपी के कुनबे के नेता हो या दल बदलने वाले बीजेपी के लोकप्रिय आज के नेता सीएम बनने की चाहत किस को नही होती और होनी भी चईये । पर जब किसी को हाईकामान ने मौका दे दिया है तो भाई टिके रहने दो त्रिवेन्द्र रावत को तीन साल ओर करने दो विकास आप सब दो उनका साथ आपका नंबर भी आ जाएगा तब तक जरा पता तो लगाओ कोन कर रहा त्रिवेन्द्र दा के खिलाफ ये षडयंत्र

ओर सबसे बडी ओर महत्वपूर्ण बात ये है कि बीजेपी का हाईकमान जानता है कि त्रिवेन्द्र के खिलाफ षडयंत्र क्यो हो रहा है इसलिए जब तक त्रिवेन्द्र के सर उनका हाथ है वो भी पूरे अगले तीन साल तक इसलिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जमकर करो बेटिंग राज्य के विकास पर सरकार का सीधा फोकस बाकी ये षड्यंत्र वाले तो लगे ही रहेगे इन पर  ध्यान देकर समय खराब करने जैसा है जो आप करते नही

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