भारतीय जनता पार्टी के लिए ये 12 महीने इस वजह से दुःखद रहे है

क्योंकि


सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी जी

फिर मनोहर पर्रिकर जी


इसके बाद सुषमा स्वराज जी


और अब अरुण जेटली जी
यानी अगस्त 2018 से अगस्त 2019 के बीच का समय भारतीय जनता पार्टी के लिए नुकसान भरा या दुखदाई समय भी कहा जा सकता है
बता दे कि इसी 12 महीने के

समय चक्र मैं पार्टी ने अपने दिग्गज नेताओं को खो दिया।
जिनमे उत्तराखण्ड से प्रकाश पन्त जी को भी हमने खोया है


उत्तराखंड के वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता प्रकाश पंत का निधन भी जून के महीने हो गया था उन्होंने अमरीका के हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली थी प्रकाश पंत कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे। वहीं, उनकी मौत से पार्टी और उत्तराखंड सरकार में शोक की लहर थी ओर राज्य मैं तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया था ।

जैसे कि हम सभी जानते है कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी लंबे समय से बीमार थे और 16 अगस्त 2018 को उनका देहांत हो गया था।
वही कैंसर से पीड़ित पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर भी इस साल 17 मार्च दुनिया से अलविदा कह गए, तो 6 अगस्त 2019 को पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी हमारे बीच नहीं रहीं। और अब पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दुनिया से अलविदा कह दिया
साल 2014 से 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में सुषमा स्वराज के पास विदेश मंत्रालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। स्वास्थ्य ठीक न रहने की वजह से स्वराज ने 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। सुषमा ने विदेश मंत्री रहते हुए ऐसे ऐतिहासिक निर्णय लिए, जिनका असर आज भी देखा जा सकता है। उन्होंने अपने मंत्रालय को आम लोगों के करीब पहुंचाया। इसका जरिया बना ट्विटर। पासपोर्ट कार्यालयों को लग्जरी की श्रेणी से हटाया और देशवासियों के लिए इसे बनवाना आसान किया। उन्होंने बतौर विदेश मंत्री नई परिपाटी शुरू की, जिसका लाभ आम जनता को तो मिला ही, साथ ही पार्टी को भी मिला। वही इससे पहले मार्च में हमने पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर जो कैंसर से जिंदगी की जंग हार गए थे। बता दे कि उन्होंने बीमारी की हालत में ही गोवा का बजट पेश किया था। गौरतलब है कि उन्हीं के कार्यकाल में भारतीय सेना ने उरी हमले का बदला लेने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। हम सभी जानते है कि इन सभी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस साल भाजपा के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना का भी निधन हुआ था। वही मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल गौर का देहावसान भी अगस्त 2019 में ही हुआ।


इन सभी के एक साल के भीतर कि दुनिया से अलविदा कहने पर भाजपा को काफी नुकसान हुवा तो उससे अधिक दुःख भी क्योकि हर किसी नेता का अपने क्षेत्र मैं , राज्य मे देश मे ओर पार्टी मैं महत्वपूर्ण योगदान था जिसे भुलाया नही जा सकता।

 

वही ये भी आपको बता दे कि भाजपा के अलावा इस साल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का भी स्वर्गवास हुआ।



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