असम के बाद उत्तराखंड़ मे सबसे अधिक मुस्लिम घुसपैठ ! पढ़े पूरी रिपोर्ट

 

बोलता उत्तराखंड़ पर ये पूरी रिपोर्ट उत्तराखंड़ राज्य के अनुभवी पत्रकार शंकर भाटिया जी की है।                 भारत सरकार का जनगणना विभाग- 2001 में 11.9 प्रतिशत मुस्लिम आबादी थी उत्तराखंड में, 2011 में हो गई 13.9 प्रतिशत।

पत्रकार भाटिया जी लिखते है कि आपको पता है, एनआरसी से चर्चाओं में आए असम राज्य में 2001-2011 के बीच 3.3 प्रतिशत मुस्लिम आबादी बढ़ी है, इसके बाद दूसरा स्थान उत्तराखंड का है, जहां इस दशक में दो प्रतिशत मुस्लिम आबादी बढ़ी है। ये भारत सरकार के जनगणना विभाग के आंकड़े हैं, यह धर्म आधारित जनगणना यूपीए सरकार के दौर में हुई थी। इस जनगणना के बाद 2012 में उत्तराखंड में बनी कांग्रेस सरकार को मुस्लिमों की सबसे अधिक हिमायती माना जाता है, इस दौर में उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी की आमद कई गुना बढ़ने का अनुमान है, जिसका क्रम भाजपा सरकार के दौर में भी निरंतर जारी है।
हालांकि पहले इस संबंध में कोई इनपुट न होने की बात कहने वाली भाजपा सरकार अब तीन मैदानी जिलों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों के आने की आशंका जता रही है और इस पर जांच के निर्देश भी दे चुकी है, लेकिन उससे भी अधिक संदेह पर्वतीय जिलों में इनकी अनपेक्षित आबादी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। वहां इनका टारगेट खाली हो चुके गांव और छोटे कस्बे हैं।                                                             ट्रेेेेे
भारत सरकार के जनगणना विभाग द्वारा जारी किए गए धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े कम से कम उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य के लिए चैंकाने वाले हैं। देश में सबसे तीव्र गति से असम में मुस्लिम आबादी बढ़ रही है। 2001-2011 के दशक में असम में 3.3 प्रतिशत मुस्लिम आबादी बढ़ी है। दूसरे स्थान पर उत्तराखंड है, जहां यह 2 प्रतिशत बढ़ी है।

2001 में उत्तराखंड की आबादी में मुस्लिम 11.9 प्रतिशत थे, 2011 में यह बढ़कर 13.9 प्रतिशत हो गए। मतलब यह कि एक दशक में उत्तराखंड राज्य की आबादी में अन्य धर्मावलंबियों के मुकाबले मुस्लिम आबादी का हिस्सा दो प्रतिशत बढ़ा है। असम में बांग्लादेशी घुसपैठ को वहां मुस्लिम आबादी बढ़ने की वजह माना जाता है, उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी की अप्रत्याशित बढ़ोतरी की वजह क्या हो सकती है?
सन् 2011 में हुई धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े सन् 2014 के प्रारंभ में ही आ गए थे। तत्कालीन यूपीए सरकार राजनीतिक कारणों से इन आंकड़ों को जारी करने से कतराती रही। एनडीए सरकार के सत्ता में आने के बाद इन आंकड़ों को जारी करने का निर्णय किया गया। ये आंकड़े कम से कम उत्तराखंड को चैंकाने वाले हैं।

इस धर्म आधारित जनगणना के आंकड़ों पर गौर करें। 2001 और 2011 के बीच के दशक में पूरे देश में मुस्लिम आबादी 24 प्रतिशत बढ़ी है। पिछले दशक में यह बढ़ौतरी 29 प्रतिशत थी। यदि देश की अन्य धार्मिक आबादी के मुकाबले मुस्लिम आबादी की बढ़ौतरी दर पर गौर करें तो यह बात साफ हो जाती है कि अन्य धार्मिक आबादी के मुकाबले इस एक दशक में मुस्लिम आबादी 0.8 प्रतिशत अधिक तेज गति से बढ़ी है। 2001 में देश की आबादी में मुस्लिम जनसंख्या का हिस्सा 13.4 प्रतिशत था, जबकि 2011 में यह बढ़कर 14.2 प्रतिशत हो गया।
असम में सबसे तेज गति से मुस्लिम आबादी बढ़ी है। 2001 में असम में 30.9 प्रतिशत मुस्लिम आबादी थी, 2011 में यह बढ़कर 34.2 प्रतिशत हो गई। बांग्लादेशी घुसपैठ को इसके लिए जिम्मेदार माना जाता है। पश्चिम बंगाल दूसरा ऐसा राज्य हैं जहां बांग्लादेशी घुसपैठ एक बड़ी समस्या है। पश्चिम बंगाल में 2001 में मुस्लिम आबादी 25.2 प्रतिशत थी, जो 2011 में बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई। एक दशक में राज्य में 1.8 प्रतिशत मुस्लिम आबादी बढ़ी है।

इन सब घटनाक्रमों पर गौर करें तो बिना ऐसे किसी अन्य कारण के उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी का तेज गति से बढ़ना चोकाने वाला तथ्य है। 2001 में उत्तराखंड की कुल आबादी का 11.9 प्रतिशत हिस्सा मुसिलम आबादी का था, 2011 मै यह बढ़कर 13.9 प्रतिशत हो गया। एक दशक में दो प्रतिशत की यह बढ़ौतरी चोकाती है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम आबादी की बढ़ौतरी 0.8 प्रतिशत है। समान परिस्थितियों वाले हिमाचल प्रदेश में मुस्लिम आबादी 0.2 प्रतशित बढ़ी है। वहां एक दशक की बढ़ौतरी 0.2 प्रतिशत रही। देश में सिर्फ मनीपुर ऐसा राज्य है जहां एक दशक में मुस्लिम आबादी 0.4 प्रतिशत घटी है।

उत्तराखंड में असम तथा पश्चिम बंगाल की तरह घुसपैठ जैसे किसी बड़े कारण के बिना यदि इस तीव्र गति से मुस्लिम आबादी बढ़ रही है तो इसके कारण क्या हो सकते हैं? निश्चित तौर पर यह कोई सामान्य घटनाक्रम नहीं हो सकता है। इस असामान्य घटनाक्रम के उत्तराखंड की राजनीति तथा समाज में बड़ा प्रभाव पड़े बिना नहीं रह सकता है। राजनीतिक दल इसे अपने-अपने नजरिये से देख सकते हैं।

धर्म आधारित जनगणना के आंकड़े-राज्यवार मुस्लिम आबादी की स्थिति

राज्य 2001 2011 ग्रोथ प्रतिशत में

लक्ष्यदीव 95.5 96.2 0.7

जम्मू कश्मीर 67.0 68.3 1.3

असम 30.9 34.2 3.3

पश्चिम बंगाल 25.2 27 1.8

केरल 24.7 26.6 1.9

उत्तर प्रदेश 18.5 19.3 0.8

बिहार 16.5 16.9 0.3

झारखंड 13.8 14.5 0.7

कर्नाटक 12.2 12.9 0.7

उत्तराखंड 11.9 13.9 2.0

दिल्ली 11.7 12.9 1.2

महाराष्ट 10.6 11.5 0.9

आंध्र प्रदेश 9.2 9.6 0.4

गुजरात 9.1 9.7 0.6

मनीपुर 8.8 8.4 – 0.4

अंडमान निकोबार 8.2 8.4 0.2

त्रिपुरा 8.0 8.6 0.6

दमन दिव 7.8 7.8 0.0

गोआ 6.8 8.4 1.6

मध्य प्रदेश 6.4 6.6 0.2

पांडिचेरी 6.1 6.1 0.0

हरियाणा 5.8 7.0 1.2

तमिलनाडु 5.6 5.9 0.3

मेघालय 4.3 4.4 0.1

चंडीगढ़ 3.9 4.8 0.9

दादरा नगर हवेली 3.0 3.8 0.8

उड़ीसा 2.1 2.2 0.1

हिमाचल प्रदेश 2.0 2.2 0.2

छत्तीसगढ़ 2.0 2.0 0.0

अरुणाचल प्रदेश 1.9 2.0 0.1

नागालैंड 1.8 2.5 0.7

पंजाब 1.6 1.9 0.3

सिक्किम 1.4 1.6 0.2

मिजोरम 1.1 1.4 0.3

उत्तराखंड में क्यों नहीं एनआरसी?

एनआरसी पर आए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के क्रम में असम में कार्यवाही चल रही है। सरकार ने पहली सूची में 40 लाख लोगों को अवैध घुसपैठिए घोषित किया है। इसके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश दिल्ली से तक उन राज्यों में एनआरसी लागू करने की मांग उठने लगी है। उत्तराखंड घुसपैठ के मामले में इन सबसे आगे है। केवल असम ही उत्तराखंड से आगे है। इसके बावजूद उत्तराखंड में इस मामले में अब तक कोई आवाज नहीं उठी।

सत्तारूढ़ पार्टी के विधायक कुंवर प्रणव सिंह द्वारा रोहिंग्या का मामला उठाने के बाद सरकार ने इसकी जांच की बात कबूली है। विपक्षियों को भाजपा विधायक तथा भाजपा सरकार के कदम पर राजनीति की बू आ सकती है। लेकिन उत्तराखंड में घुसपैठ का यह मामला बहुत गंभीर है। डर इस बात का है कि यह कहीं पक्ष-विपक्ष की राजनीति की भेंट न चढ़ जाए। इससे नुकसान उत्तराखंड का ही होगा। दल और नेता इसकी आंच में सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंक सकते हैं। 

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