उत्तराखंड :- अशासकीय स्कूलों में भर्ती में गोलमाल, इस अधिकारी पर गिरी गाज

शिक्षा मंत्री के तेवर तल्ख, भर्ती के नाम पर शिक्षा अफसर कर रहें हैं लूट खसोट

अल्मोड़ा के प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी को किया शिक्षा निदेशालय अटैच

देहरादून। शिक्षा विभाग में जीरो टांलरेस पर लगे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के तल्ख तेवर जारी हैं। मंत्री के तल्ख तेवरों को आप इस बात से समझ सकते हैं कि शिक्षा सचिव भूपिंदर कौर औलख को 26 जनवरी के अवकाश के बावजूद दफ्तर खुलवा कर अधिकारी को हटाने के आदेश जारी करने पड़े। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने सोनी को शनिवार को ही हर हालत में अल्मोड़ा से हटाने के निर्देश दिए थे। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक शुक्रवार को अल्मोड़ा दौरे पर आये शिक्षा मंत्री से स्थानीय कार्यर्ताओं और जनता ने शिकायत की कि अशासकीय स्कूलों में रिक्त पदों पर भर्ती के नाम पर शिक्षा अफसर लूट खसोट कर रहे हैं। एक स्वर में शिकायत सुनते ही मंत्री का पारा सातवें आसमान तक चढ़ गया। उन्होंने अपने ओएसडी नरेंद्र तिवारी को तत्काल शिक्षा सचिव से बात करने और मुख्य शिक्षा अधिकारी को हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिये। मंत्री के निर्देश जानकारी में आने पर शिक्षा सचिव ने गणतंत्र दिवस की छुट्टी के बावजूद दफ्तर खुलवाया। सोनी को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। उन्हें फौरन शिक्षा निदशालाय में ज्वाइन करने की हिदायत दी गई है। उनकी जगह अल्मोड़ा किसी दूसरे अफसर को भेजा जा रहा है। अल्मोड़ा के प्रभारी मुख्य शिक्षा अधिकारी जगमोहन सोनी को सरकार ने हटाते हुए शिक्षा निदेशालय से अटैच कर दिया। अशासकीय स्कूलों में भर्ती में गोलमाल की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। मामला इतना गंभीर था कि शिक्षा सचिव भूपिंदर कौर औलख को 26 जनवरी के अवकाश के बावजूद दफ्तर खुलवा कर आदेश जारी करने पड़े। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने सोनी को शनिवार को ही हर हालत में अल्मोड़ा से हटाने के निर्देश दिए थे।
गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री अशासकीय स्कूलों में नियुक्ति की प्रक्रिया को काफी सख्त कर चुके हैं। इंटरव्यू में नंबर भी 25 से घटाकर 5 कर दिए हैं। इससे अफसरों को नौकारियां बेचने का मौका नहीं मिल रहा। इसलिए अब अफसरों ने नया तरीका निकाल लिया है। स्कूलों की भर्ती की अनुमति देने के नाम पर लाखों रुपये मांगे जा रहे हैं। नियमानुसार अशासकीय स्कूल में रिक्त पद पर भर्ती के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसी का फायदा उठाते हुए दबाव बनाया जा रहा है। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि अफसर कहते है कि यह पैसा अपर निदेशक, निदेशक और मंत्री ऑफिस तक देना होता है। इसलिये पदों की संख्या के अनुसार लाखो रुपये की मांग की जाती है। पैसा न देने पर अनुमति नहीं दी जाती।




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