अगर हड़ताल हो गई तो सीएम होंगे परेशान !

राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के लिए मुश्किल कब होने का नाम नही ले रही है एक समाधान के बाद दूसरी दिकत उनके सामने आजाती है और अब ये दिकत स्वास्थ्य महकमे से आई है सीएम त्रिवेन्द्र रावत राज्य के स्वास्थ्य मंत्री भी है इसलिए ये दिकत उनके सामने आना जायज़ है
जी हा आपको बता दे कि अब गर्भवती महिलाओं और गरीबों के लिए ख़बर अछी नही है क्योकि 26 जुलाई से 108 एंबुलेंस और खुशियों की सवारी हड़ताल पर जाने की बात सामने आ रही है आपको बता दे कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों की जी हुजूरी में लगे कर्मचारियों ने अब तय कर लिया है कि अगर उनकी सात सूत्रीय मांगें न मानी तो गई तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे और इसका पूरा जिम्मा प्रशासन पर होगा। इसके चलते फील्ड कर्मचारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा दिया है।             

आपको बता दे कि कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश में चल रही 108 आपातकालीन सेवा व खुशियों की सवारी (केकेएस) में कार्यरत फील्ड कर्मचारी विगत कई वर्षों से विषम भौगोलिक परिस्थितिययों में और बेहद कम वेतनमान पर काम कर रहे हैं। आपातकालीन सेवाओं को बेहतर ढंग से चलाने के लिए अपना पूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन एंबुलेंस संचालन कर रही कंपनी जीवीकेईएमआरआई प्रबंधन लगातार कर्मचारी विरोधी नीति अपना कर कर्मचारियों का मानसिक, शारीरिक व आर्थिक रूप से शोषण कर रहा है। जबकि सरकार की मंशा थी कि 108 आपातकालीन सेवा शुरू कर एक ओर स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा और दूसरी ओर युवाओं को रोजगार दिया जाएगा, लेकिन मौजूदा समय में जीवीकेएमआरआई कंपनी दोनों स्थितियों में नाकाम साबित हो रही है। कंपनी प्रबंधन समस्या निराकरण के लिए तैयार नहीं हैं और ऐसे में कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर आशंकित है। जिसके तहत 26 जुलाई से हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया है। इस दौरान यूएसएन के अध्यक्ष कुलदीप, हरवंश सिंह, सुल्तान खान, सूरज, शंकर, हरवंश, करन, खीम सिंह, पूनम, आशा, शाहिद, गुरजीत सिंह, विनोद आदि लोग मौजूद थे।

आपको बता दे कि ये फील्ड कर्मचारियों अपनी सात मांगो को लेकर आंदोलन करने की बात कह रहे है इनकी मांग है कि
हरियाणा की तर्ज पर 108 आपातकालीन सेवा का संचालन एनएचएम के तह किया जाए और ठेकेदारी प्रथा बंद हो।
कार्य अवधि 12 घंटे से हटाकर 8 घंटे की जाए और अतिरिक्त कार्य पर दो गुना भुगतान दिया जाए।

एंबुलेंस कर्मचारियों के कार्य को देखते हुए सम्मानजनक वेतन का भुगतान किया जाए।

फील्ड कर्मचारियों की एक निश्चित सेवा नियमावली बनाई जाए।

फील्ड कर्मचारियों के पीएफ कटौती जांच को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

पुराने एंबुलेंस वाहनों को हटाकर नए एंबुलेंस वाहनों का संचालन उचित उपकरणों के साथ किया जाए। आपको बता दे कि 108 ओर खुशियों की सवारी से पहाड़ की जनता को काफी राहत मिलती है लेकिन आज की बात करे तो 108 गाड़ियों की फिटनेस पर भी लगातार सवाल खड़े होते रहते है फिलहाल फील्ड कर्मचारियों ने अपनी बात रख कर सरकार को ओर मुख्यमंत्री को चेता दिया है उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोई रास्ता सरकार निकला देगी और अगर कोई रास्ता ना निकला तो गरीब और पहाड़ की आम जनता को तकलीफ होना तय है

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