अब तथाकथित मीडिया मालिको के खिलाफ छोटे मीडिया कर्मी खोल रहे है मोर्चा

बोलता हैं उत्तराखंड की राज्य मैं हर किसी की आवाज़ बनने वाला छोटा मीडिया कर्मी सबकी आवाज उठाता है पर इनकी आवाज उठाने वाला कोई नही ये खुद अपनी लड़ाई उन सस्थानो के मालिकों से लड़ते है जो इन्हें ना समय पर पगार देते है और ना ही कोई इनके काम करने का समय तय होता है ये तो लगे रहते है बस अपना फ़र्ज़ आपके प्रति पूरा करने मे इनके अपने घर मैं कोई भी दिकत या परेशानी हो तब भी ये उनको छोड़कर आपके लिए समाचार तलाश रहे होते घर परिवार मे रोजना झगड़े कारण अपने परिवार को समय ना दें पाना ओर समय पर 30 दिन की मज़दूरी जब ना मिले तो घर वालो का ओर चिल्लाना क्या करे ये छोटा मीडिया कर्मी जाए तो कहा जाए मालिको के लिए दिन रात सस्थान मे काम करने वाले इस छोटे पत्रकार का ना तो कोई सस्थान जहा ये काम करता है ना इसका बीमा करवाती है और ना ही इसका कोई d.a , ta ओर p.f होता है सर ये तो बड़ी बात है इनको तो समय पर इनका मेहनताना भी नही मिलता ओर यदि मालिक ने इनकी सेवाएं समाप्त कर दी या ये खुद इन्होंने बता कर सस्थान से अपनी नियम अनुसार सेवाएं समाप्त करते है तो वहां भी इनको अपना रुका हुआ पिछला वेतन पाने के लिए उस मालिक से बार बार पार्थना करनी पड़ती है। कभी किसी का भाग्य सही हो तो काम बन जाता है और नही तो ये लाला अपनी ही मस्ती मैं रहता है उनको कहा उनके परिवार की चिंता ओर अगर उत्तराखंड राज्य के अंदर पहाड़ी जिलो मैं उन पत्रकार साथी की बात की जाए जिनको स्ट्रगर कहा जाता है कुछ स्थानों को अगर। छोड़ दे तो आधे से ज्यादा सस्थान उनको वेतन के नाम पर कुछ नही ओर जितनी ख़बर उसने कार्यलय मे दी उसको उतनी ख़बर के हिसाब से भी रुपए उसको नही मिल पाते ये हाल राज्य के अंदर है लेकिन अब छोटे मीडिया कर्मी ओर ज्यादा बर्दास्त नही करेगे ओर अब अपने हक़ के लिए खुद आवाज उठायेगे क्योकि न्याय तो मिलेगा ही फिर चाहे देर क्यो ना हो जाये ये बात चलता फिरता डाट कॉम कहता है कि छोटे शहर के वे मीडिया मुगल सावधान जो अपनी सल्तनत के मुलाजिमों को समय पर न तो छुट्टी देते हैं और न तय तारीख पर तय पगार। तन्ख्वाह देने में टालू रवैया अपनाने वाले मीडिया मालिकों की अब खैर नहीं है। मालिकान की इस नजायज हरकत से परेशान देहरादून के ऐसे पीड़ित मीडियाकर्मियों ने पीएमओ से इसकी शिकायत कर दी है। वो कहता है कि छोटे शहरों में मीडिया की दुनिया और उसके मुलाजिम। खासकर उत्तराखंड की बात की जाए तो इलैक्ट्रॉनिक और वेबमीडिया में तो हालात बहुत बदत्तर हैं।
कुछ नामी बड़े इक्का दुक्का संस्था को छोड़ कर
अवाम की आवाज को बुलंद करने की कोशिश करते हुए यहा छोटे कर्मचारियों की आवाज़ अब घुटने लगी है
कभी दूसरे पेशा करने वाले जब मौजूदा वक्त की पत्रकारिता पर तंज कसते हुए उन बेचारों को भी छोटे शहरों के चुनिंदा मीडिया मुगलों के साथ या लाइजनिंग से रुतबा हासिल कर चुके नामी रिपोर्ट्स के साथ तौलते हैं तो उन मीडियाकर्मियों के मुख से बरबस ही निकल पड़ता है, “ जनाब क्रब का हाल मुर्दा ही जानता है।”
न समय पर पगार, न जरूरत के वक्त छुट्टी। फटेहाल जिंदगी हर वक्त फाकाकशी का दौर। मजलूम आवाम की घुटी आवाज को अपने अंदाज में तराशकर बुलंद आवाज़ बनाने की कवायद में जुटे छोटे शहरों के मीडिया संस्थान के कर्मी बंधुआ मजदूर से ज्यादा कुछ नहीं लगते।
हालांकि दुनिया को दिखाने के लिए वो रोज साफ कपड़े पहनकर संस्थान में दाखिल होते हैं। लेकिन मजाल क्या कि महीना खत्म होने के बाद सात तारीख से पहले पगार के लिए मालिक से तकाजा कर सकें। हालांकि मालिक के रहमो-करम पर जीते इन शोषित मीडियाकर्मियों ने अब अपने हक की आवाज बुलंद करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
देहरादून के मीडिया गलियारे से खबर है कि लाइजनिंग और दूसरी तिकड़म भिडा कर शहर में अपनी साख बना चुके परजीवी मीडिया मालिकान के खिलाफ शोषित मीडियाकर्मियों ने अपनी आवाज बुलंद की है और पीएमओ से संपर्क साधा है।
बताया जा रहा है कि पीएमओ से उन्हें आश्वासन भी मिला है, ऐसे में माना जा रहा है कि चुनावी घडी में ऐसे मीडिया मालिकान के खिलाफ कोई सर्जिकल स्ट्राइक हो सकती है। यानि अब दूसरे की मेहनत का मेहनताना न देने वाले मीडिया मालिकानों की खैर नहीं है।
सूत्रों की माने तो किसी मीडिया कर्मी की पहल पर पीएमओ ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और तथाकथित मीडिया हाउसों की अपने स्तर से पड़ताल शुरू कर दी है, ताकि मेहनतकश मीडिया कर्मी खूनपसीना चूषक मीडिया संस्थानों के मालिकों के शोषण से भविष्य में बच सकें।

ऐसे में ये पहल उन मीडिया कर्मियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर होगी जिनका परिवार संस्थान मालिकों की समय पर पगार न देने की हरकत से भूखों रहने की कगार पर पहुंच जाता है। …. हालांकि होगा क्या ये तो वक्त ही बताएगा फिलहाल शोषित मीडिया कर्मियों ने अपनी आपबीती और मन की बात से पीएमओ को वाकिफ करा दिया है। बहरहाल काबिलेगौर बात ये है कि अगर आप भी मीडिया मालिक के सताए हुए मुलाजिम हो और आपकी भी किसी मीडिया संस्थान में पगार रूकी हुई है तो आप भी अपने नौकरी से जुड़े दस्तावेज तैयार रखिए, साथ ही अपनी आपबीती को Chaltaafirtaa@gmail.com पर शेयर कीजिए या मेल कीजिए । जी हां ये सभी बात बोलता उत्तराखंड ने चलता फिरता डाट कॉम से ली है अब देखना ये होगा कि उन सस्थानो के मालिकों के खिलाफ p.m o क्या एक्शन लेते है ख़बर ये भी है कि अब टीवी चैनलों का लाइसेंस किराए पर लेकर दूसरे नामो से चलाने वाले उन लोगो पर भी p.mo कार्यवाही कर सकता है फिलहाल अब आवाज उठी है तो दूर तक तो जाएगी ही

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