अब पुल बने या ना बने स्कूल तो जाना है ही !

बीते दिनों चमोली जिले के थरली मे बादल फटने के बाद 16 गाँव का रास्ता मुख्यधारा से अलग हो गया है जिस पर अभी प्रशासन ने कोई फुर्ती नही दिखाई आपको बता दे कि घाट क्षेत्र में भारी बारिश के चलते एक पुल का नामोनिशान ही मिट गया था         ओर जब पुल ही नही तो कैसे जाए स्कूल और गाँव के लोग बाज़र तक इस लिए लोगो ने अपने लिए रास्ता निकाला तो स्कूल के बच्चों ने भी उनके रास्ते कोर अपना लिया ओर रस्सी के सहारे चढ़कर कभी हार ना मानने वाले ज़ज़्बे की मिसाल पेश कर दी है| एक बाद एक सब बच्चें रस्सी के सहारे चढ़ाई करके अपने स्कूल पहुंचे हैं| जब हौंसले बुलंद होते हैं तो भाग्य भी साथ देता है| उस बरसाती नदी चुफलागाड़ में पानी भी नहीं आया और बच्चों को पार करने में आसानी रही| ये तो उनकी बहादुरी की तरफ वाली बात है पर अगर दूसरी तरफ हम ये कहे कि जान खोखिम मे डाल कर स्कूल जा रहे है ।।       छात्र ओर छात्रा तो शायद सरकार के अधिकारी जल्द फौरी रास्ता निकाले क्योकि अगर हम गाँव वाले के जज्बे को ही सलाम करते रहे तो ये पुल नही बनेगा जल्दी   क्योकि कोन नही जानता लाचार सिस्टम को      इसलिए कड़वा सच यही है कि मजबूरी मे बंदा क्या ना करता सरकार गुजारिश है आप से जल्द से जल्द फौरी राहत मतलब अस्थाई पुल प्रशासन से बानने की बात हो ताकि भगवान ना करे कोई हादसा कभी भी किसी के साथ ना हो

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