अब क्या करु क्या ना करु कोई तो बताये !

सूबे की डबल इज़न की सरकार को आने वाले निकाय ओर निगम के चुनाव मे नुकसान होना तय माना जा रहा है जिसके कारण इन पहलुओ पर बहुत महत्वपूर्ण है सबसे पहले अगर बात करे तो बीजेपी के हर जिले की विधायको मे वो जोश ओर उनके चेहरे पर वो चमक नही देखी जा रही है जो सरकार बनने के समय थी । लगभग बीजेपी के 25 से 30 विधायक बस खामोश है उनके जोश को ठंडा किया है उनको ना मिलने वाले अभी तक सरकार मे महत्वपूर्ण पद ने ना वो दायित्व धारी अभी तक बन पाए है और ना उनके बीच से कोई दो नए मंत्री बन पाया है अब कहा जा रहा है कि निगम निकाय के चुनाव के बाद सरकार संबको एडजस्ट करेगी लेकिन सूत्र बोल रहे है कि लोकसभा चुनाव से पहले किसी को भी एडजेस्ट नही किया जा सकता क्योंकि अगर कोई छूट गया तो खामियाजा बीजेपी को भुगतना होगा क्योकि विरोध होना तय है और पद सीमित है । जानकार कहते है कि बीजेपी के 57 विधायक मे से कुछ विजय बहुगुणा को अपना नेता मानते है, कुछ रमेश पोखरियाल निशक को ,तो कुछ भगत दा को तो कुछ सतपाल ओर हरक को  , जो अपने काम निकालना जानता है वो समय को सलाम कर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के साथ खड़ा है पर बाकियों का कुछ आता पता नही की कब किसके खिलाफ कोन हल्हा बोल दे उदहारण हरिद्वार जिले की विधायक दे चुके है । अब बात बीजेपी के सगठन की ओर बाजेपी कार्यकर्ता की वो भी सर पर हाथ रखकर बोलते नज़र आते है कि जब सरकार नही थी तब ही ठीक था कम से कम अपनी भड़ास विपक्ष के नाते सरकार पर निकाल तो देते थे पर अब अपनी सरकार है क्या करे कुछ बोल नही सकते हमने जी तोड़ मेहनत की ओर अभी तक हमको महत्वपूर्ण पद नही दिए गए 2 साल निकले जा रहे है सरकार बने और हम खामोश है क्योकि कुछ बोल नही सकते ,
ओर अब बात आज की करते है राज्य की सरकार ने पहले तो माननीय उत्तराखण्ड हाईकोर्ट का साथ दिया आदेश माना और चल दिया पीला पंजा अतिक्रमण हटाने जिसकी कमान खुद मुख्यमंत्री ने अपने वफादार अधिकारी जिनका आज सचिवालय मे पूरा सिका चलता है ओंम प्रकाश को सोपी लेकिन जैसे जैसे अतिक्रमण का विरोध व्यापारियों करने लगे तो  बीजेपी विधायक सीएम को याद दिलाने चले गए कि सर रुकवा दो ये सब कुछ वरना चुनाव मे नुकसान होना तय है!  एक नही जब आधे से ज्यादा विधायक यही सोचे तो सीएम त्रिवेन्द्र रावत ने भी विस्वास दिला दिया कि अभी फिलहाल इसको रोक दिया जाए कारण लगातार बरसात ,आपदा,मौसम, को बनाया जाए फिर बाद मे जारी रखेगे ये अतिक्रम अभियान ओर हुवा भी यही सरकार की तरफ से उनके महाधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट मे याचिका डाली जो खारिज़ हो गई ये कहकर की इस पर फैसला उत्तराखंड़ हाईकोर्ट ले बस फिर क्या लग गया विधयकों ओर सरकार को झटका ओर प्रशासन फिर चल दिया बाजू ताने पिला पंजा लेकर अतिक्रमण हटाने अभी नज़ारा देखा गया  था कि बीजेपी के विधायक हो या कांग्रेस के दोनों ही अभी अतिक्रमण की कार्यवाही नही चाहते बीजेपी के विधायक इसलिए नही क्योकि एक तो वो फिर किस मुह से आने वाले निकाय चुनाव मे वोट मांगने जायगे ओर फिर उनका अपना वोट बैंक भी कम हो जाएगा दूसरी तरफ कांग्रेस के विधायक ओर नेता गलत तरिके से अतिक्रमण हटाने का नाम लेकर सडक पर है ताकि बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया जा सके और निकाय निगम मेयर के चुनाव मे जनता को उनका साथ मिले
अब आपको क्या लग रहा है कि क्या जो आज का माहौल b.j.p  मे बन रहा है पहला एक जिसमे कुछ बीजेपी विधायक अब तक मत्वहपूर्ण पद ना मिलने से निराश है ,दूसरा सगठन के कार्यकर्ता भी कुछ मायूस दिखते है और तीसरा राज्य मे चल रहा अतिक्रमण हटाओ अभियान जिसके विरोध मे इस समय बीजेपी के विधायक खुद खड़े है इन तीनो बातों को जोड़ कर देखा जाए तो जल्द होने वाले निकाय निगम चुनाव मे बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ सकता है यदि सब कुछ अभी सरकार ने समय रहते ठीक ठाक नही किया तो!जानकार तो ये भी कह रहे है कि जब से त्रिवेन्द्र सीएम बने है तब से कुछ लोग उनको सीएम की कुर्सी पर नही देखना चाहते है और वो तो चाहते है ही कि बीजेपी को निकाय निगम चुनाव मे नुकसान हो और तब फिर त्रिवेन्द्र रावत के खिलाफ माहौल बना कर कुर्सी के लिए जंग लड़ी जाए हालाकि ये इतना आसान नही जितना वो लोग सोच रहे है क्योकि त्रिवेन्द्र रावत इन सब बातों का हल निकाल ही लगे पर समय  पर  हल निकल गया तो साँप भी मर जाएगा और लाठी भी ना टूटेगी पर अगर देर हो गयी तो फिर पिक्चर बाकी रह जाएगी !!
आपको एक बार फिर बता दे कि
अतिक्रमण पर त्रिवेंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लग चुका है त्रिवेंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने झटका देते हुए उनकी अतिक्रमण हाटने की समयसीमा बढ़वाने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट का कहना है कि अतिक्रमण के आदेश नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा दिए गए हैं, वहीं अपील करें।
इससे पहले सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर अतिक्रमण के खिलाफ हाईकोर्ट के आदेश की समयसीमा बढ़वाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें प्रदेश में भारी बारिश के चलते हो रही समस्याओं से अवगत कराया गया था।
याचिका में कहा गया था कि इन दिनों अधिकारी और कर्मचारी आपदा प्रभावित कार्यों में व्यस्त हैं। वहीं, बारिश के चलते अतिक्रमण हटाओ अभियान में आम जनता को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए दी गई चार सप्ताह की समयसीमा बढ़ाई जानी चाहिए। लेकिन SC ने सरकार की इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही अब कही सगठन माननीय कोर्ट के आदेश का पालन करने को सरकार को कह रहे है वो कहते है कि अब सरकार वोट बैंक की राजनीति को छोड़कर जनहित मे सात खड़ी रहे अब राज्य मे वोट बैंक की राजनीति ना हो साथ ही अधिकारी ईमानदारी से बड़े हो या छोटे सभी पर नियम और मानकों के हिसाब से ही अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करें

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