पौड़ी लोकसभा सीट से ये माना जा रहा था कि भाजपा   सेना पृष्ठ होने के नाते कर्नल कोठियाल को टिकट दे सकती है
लेकिन अब इस रेस से कर्नल बाहर हो गए है क्योंकि भाजपा यहा से तीरथ सिंह रावत को मैदान मे उतारने का मन बना चुकी है।


इस लिहाज से अब पौड़ी लोकसभा से कांग्रेस से मनीष खडूडी पूर्व मुख्यमंत्री जर्नल खडूडी के बेटे, भाजपा से तीरथ सिंह रावत ओर रिटायर कर्नल अजय कोठियाल निर्दलीय ही चुनावी मैदान मे होंगे।
कर्नल हर हाल मे चुनाव लड़ने का मन बना चुके है इसलिए पीछे नही हटेगे। सूत्र बोल रहे है इस लिहाज से सेना पृष्ठ भूमि के नाते कर्नल इस सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही टकर देते नजर आएंगे ।
ख़बर तो ये भी थी कि कर्नल को भाजपा से टिकट ना मिलने के कारण कांग्रेस अगर टिहरी लोकसभा सीट से टिकट देती तो पौड़ी लोकसभा सीट पर कर्नल की पेठ ओर पकड़ का पूरा फायदा मनीष खडूडी को पलस मै मिलता । ओर टिहरी लोकसभा से कांग्रेस को भी एक मजबूत चेहरा उस समय मिलता जब प्रीतम सिंह खुद टिहरी का चुनाव लड़ना नही चाहते।
खेर ये तो सियासत है राजनीति है यह कब किस समय क्या हो जाये ओर क्या हुवा हुवाया समीकरण बिगड़ जाए ये राजनीति के चाणक्य भी नही जानते।

कर्नल अजय कोठियाल आज देश-दुनिया में किसी पहचान के मोहताज नहीं है साल .2013 की भीषण आपदा में तबाह केदारनाथ की चुनौती को स्वीकार
प्रदेश में आई 2013 की भीषण आपदा को कोई भुला नहीं सकता. उस ‌समय उत्तराखण्ड देश-दुनिया की ओर मदद के लिए टकटकी लगाए बैठा था तब केदारनाथ धाम तबाही के मंजर का गवाही दे रहा था और सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी थी, लेकिन उस दौरान एनआईएम के प्रिसिंपल रहे कर्नल अजय कोठियाल ने बखूबी इस चुनौती को स्वीकार किया.चाहे बात देश की सीमाओं की हिफाजत की हो या फिर सामने खड़ी कुदरत की पहाड़ सी चुनौती, कशमीर से लेकर केदारनाथ जैसे दुर्गम और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में कर्नल अजय कोठियाल ने अपनी हिम्मत का लोह मनवाया.केदारनाथ की प्रलयकारी सुनामी ने सब कुछ तबाह कर दिया था. ऐसे में जब राज्य सरकार के सामने केदारनाथ धाम को फिर से जीवत करने से साथ ही यात्रा को सुचारु करने की बड़ी चुनौती थी तो सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर लिए थे
उस दौरान एनआईएम ने बाबा केदारनाथ को फिर उसके मूल स्वरुप लौटाने का जिम्मा अपने कंधों पर लिया.हाड़ कंपाने वाली ठंड़ और तन जमा देने वाली सफेद मुसीबत के बावजूद एनआईएम ने बड़ी ही दिलेरी से वहां काम शुरु किया. कर्नल अजय कोठियाल ने भी केदारनाथ धाम में डेरा डाल और वहां काम करने वालों का हौसला बढ़ाते हुए फिर से बाबा केदार की यात्रा को सुचारु करवाया.प्राकृति चुनौतियों से निपटने के आधुनिक मशीनें केदारनाथ में उतारी गईं और देश के इतिहास में पहली बार मिग-26 जैसा विमान केदारपुरी में उतरा. आज राज्यवासी भी उनके इस हौसले को मानते हैं. क्योकि कर्नल कोठियाल ने सरहद से लेकर देश के अंदर हर मोर्चे पर अपना लोहा मनवाया

लगभग 47 साल की उर्म के मजबूत इरादों वाले कर्नल अजय कोठियाल 1992 में चौथी गढ़वाल राइफल में बतौर सैन्य अधिकारी शामिल हुए. सीमाओं की हिफाजत में कर्नल अजय कोठियाल ने 7 आंतकियों को भी मार गिराया था और खुद भी 2 गोलियां सीने में झेलीं. वही उनको वीरता और साहस के लिए कीर्ती चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मेडल से भी नवाजा जा चुका है.
अब तक वह भारत और नेपाल की 18 चोटियों पर पर्वतारोहण कर चुके हैं और 2001 में भारतीय सेना के पहले दल के सफल एवरेस्ट सबमिट करने का खिताब भी उनके ही नाम है. इतना ही नहीं 2012 में 7 महिला सैन्य अधिकारियों के साथ एवरेस्ट सबमिट करने में भी कर्नल अजय कोठियाल की भूमिका सहारनीय रही है. केदानारथ पुनर्निमाण कार्य में लगना उनके लिए एक बड़े ऑपरेशन से कम नहीं है.
यही नही वो बेरोजगार युवाओं के लिए अपनी तनख्वाह से भी चला रहे है भर्ती कैंप।
उत्तराखंड के मूल रूप से टिहरी गढ़वाल के रहने वाले कर्नल अजय कोठियाल ने आज तक शादी नहीं की है. वह अपनी पूरी तनख्वाह से राज्य के बेरोजगार युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने के उद्देश्य से कैंप चलाते हैं. मौजूदा समय में राज्य के लगभग 5 हज़ार से अधिक युवा उनके दर्जन भर स्थानों पर चलाए जा रहे कैंपों में प्रिशिक्षण हासिल कर रहे हैं.।

कुछ समय पहले कर्नल कोठियाल ने वीआरस लेकर सामज सेवा करने की ठानी।
ओर यही वजह है कि कर्नल अब राजनीति के मैदान मे उतरने जा रहे है।





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