तो उत्तराखंड  से ‘आप’ की नाव में सवार हों सकते है भाजपा-कांग्रेस के वो नेता जिनको नही मिलने वाला टिकट !

 

उत्तराखंड की सियासत में आप के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के ऐलान के बाद ( 70 सीटो पर चुनाव लड़ने का एलान )
उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी तीसरा कोण बनाने की कोशिश कर रही है।
ओर इस कोशिश के केंद्र में चर्चा है कि भाजपा और कांग्रेस के असंतुष्ट नेता आ सकते हैं।
ख़बर है कि दोनों दलों के 10 से 15 नेता आप के संपर्क में बताए गए हैं( अरविंद केजीरिवाल )
बता दे कि
इनमें से कई नेता 2021 में आप में शामिल हो सकते हैं!
मीडिया में (आप) ने दोनों पार्टियों के असंतुष्ट नेताओं से शुरुआती बातचीत की पुष्टि की है। जबकि , भाजपा और कांग्रेस इससे इनकार कर रहे हैं। वही आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में बुनियादी संगठन का जाल बन दिया है।
ओर अब संगठन को सियासी ऑक्सीजन देने लिए आप को स्थानीय चुनाव जिताऊ नेताओं की जरूरत है
जिसके लिए उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं ने आप पार्टी से संपर्क साधना भी शुरू कर दिया है।
क्योकि कड़वा सच यही है कि
आप को उत्तराखंड में सियासी पैठ जमाने के लिए इनकी जरूरत है और असंतुष्ट नेताओं को एक राजनीतिक मंच की।

ख़बर है कि दोनों दलों में घुट रहे कुछ पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री, पूर् और निर्दलीय तौर पर विधायक रहे लोग आप के संपर्क में हैं।
आप का कहना है कि वे किसी भी दागी को शामिल नहीं करेंगे।
दिनेश मोहनिया जो प्रभारी, आम आदमी पार्टी के है उनका कहना है कि भाजपा-कांग्रेस के नेता काफी समय से संपर्क में हैं। भाजपा के तीन वरिष्ठ नेता संपर्क में हैं। साफ छवि के साथ आप की कसौटी पर जो खरा उतरेगा, उसे ही शामिल किया जा सकेगा। ऐसा नहीं कि जो कांग्रेस में भ्रष्ट था, वह भाजपा में आकर ठीक हो गया है। ऐसे नेताओं की एंट्री आप में किसी भी सूरत में नहीं होगी। आप से संपर्क करने वाले नेताओं को यह साफ-साफ बता दिया गया है।
तो वही मनवीर चौहान जो प्रांतीय सह मीडिया प्रभारी भाजपा के है उनका कहना है कि
आम आदमी पार्टी सुबह, दोपहर स्याम , सपने देखने लगी है
वैसे आप नेता कुछ भी दावे करने के लिए स्वतंत्र हैं। पर कोविड के दौरान केजरीवाल सरकार के षड्यंत्र को पूरे देश ने देखा है। ऐसी पार्टी में शामिल होने के लिए भाजपा का कोई नेता विचार तक नहीं कर सकता।

तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि
कि दिल्ली और उत्तराखंड में जमीन-आसमान का अंतर है। आप दिल्ली के सपने उत्तराखंड में बेचने की कोशिश कर रही है। यहां की जनता वर्तमान भाजपा सरकार से बेहद दुखी है और आप क्षणिक कौतुहल से ज्यादा कुछ नहीं। हकीकत यह है कि साल 2022 में उत्तराखंड में कांग्रेस ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली है ओर हमारा कोई नेता उनके सम्पर्क में नहीं है …
बहराल आगे आगे देखना होगा कि ऊँट किस करवट बैठता है!!





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