उत्तराखंड- लो जी आज से
7500 से ज्यादा ग्राम पंचायत हो जाएंगी प्रशासकों के हवाले।

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले को छोड़कर अन्य सभी 12 जिलों की ग्राम पंचायतों मे आज से पूरी तरह से प्रशासक का राज हो जाएगा। बता दे कि ऐसी ग्राम पंचायतों की संख्या साढ़े सात हजार तक बताई जा रही है। वही बता दे कि ग्राम पंचायतों के बाद बहुत जल्द क्षेत्र और जिला पंचायतों में भी यह स्थिति दिखाई देगी। क्योंकि क्षेत्र और जिला पंचायतों का कार्यकाल अगस्त माह में समाप्त हो रहा हैं। वहां भी प्रशासकों को तैनात करने की सरकार तैयारी कर चुकी है
बता दे कि प्रशासकों की तैनाती प्रदेश में पहले भी एक बार हो चुकी है। जब पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सके थे। राज्य गठन के बाद पंचायत चुनाव के लिए हर बार कई कई महीनों का इंतजार करना पड़ा है। इस बार भी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अभी स्थिति साफ  नहीं है। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग ने अपने स्तर पर ज्यादातर काम पूरे कर लिए हैं। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी हो गया है।
वही जहां तक सरकार का सवाल है तो उसके स्तर पर अभी पंचायतों का आरक्षण तय होना बाकी है। इन स्थितियों के बीच, आज से 12 जिलों की सभी ग्राम पंचायतों में बतौर प्रशासक जिलाधिकारी काम संभाल लेंगे। हालांकि कई ग्राम पंचायतों में प्रशासकों ने एक दिन पहले भी चार्ज ले लिया है। इसकी वजह ये है कि 2014 में कई ग्राम पंचायत बोर्ड की पहली बैठक 13 जुलाई को हुई थी। इस हिसाब से उनका कार्यकाल रविवार को खत्म हो गया। ज्यादातर ग्राम पंचायत बोर्ड की बैठक 15 जुलाई को हुई थी। इस वजह से उनका पांच साल का कार्यकाल सोमवार को पूरा हो रहा है।
वही बता दे कि
पंचायतीराज संशोधन बिल 2019 पर अभी असमंजस बरकरार है। इस बिल पर अभी राजभवन की मुहर नहीं लग पाई है। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच सबकी नजरें इस बात पर है कि इस बार के चुनाव दो बच्चों और शैक्षिक योग्यता की शर्तों के आधार पर होंगे या नहीं। दरअसल, इन दोनों ही संशोधनों से जुड़ी कमियों पर लगातार बात हो रही है। दो बच्चों से जुड़ी शर्त पर कट ऑफ डेट न होने के कारण सवाल उठ रहे हैं, जबकि ओबीसी की शैक्षिक योग्यता का बिल में अलग से जिक्र नहीं किया गया है। बहराल देखते है आगे आगे क्या होता है।



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