मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निजी आयुर्वेदिक कालेजों के आन्दोलनरत छात्रों के आन्दोलन को समाप्त करने के लिये प्रभावी कार्यवाही के निर्देश दिये हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिये भी सभी सम्बन्धित को निर्देश दिये जाय। उन्होंने कहा कि छात्रों का लम्बे समय तक आन्दोलनरत रहने से उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अतः इस सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय के स्तर से समय समय पर जारी निर्देशों का गहनता से अनुश्रवण किया जाये।
गुरूवार को सचिवालय में आयुष विभाग से सम्बन्धित बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि आयुर्वेद छात्रों की फीस निर्धारण हेतु स्थायी फीस निर्धारण समिति के शीघ्र गठन की भी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। समिति के अध्यक्ष हेतु किसी मा0 न्यायाधीश को नामित करने के लिए पुनः मा0 उच्च न्यायालय से अनुरोध किया जाय। इस प्रकरण पर फीस निर्धारण समिति के निर्णयानुसार अग्रिम कार्यवाही सुनिश्चित की जाय।
इस अवसर पर आयुष मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, सचिव आयुष दिलीप जावलकर, सचिव न्याय प्रेम सिंह खिमाल, प्रभारी सचिव विनोद रतूड़ी, अपर सचिव आनन्द स्वरूप, संयुक्त सचिव एम0एम0सेमवाल, रजिस्ट्रार उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय डॉ. माधवी गोस्वामी आदि उपस्थित थे
बहराल इससे हटकर बात करे तो
बीते दिनों हुई आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के अनुसार
2004 में फीस कमेटी ने ₹80,000 फीस तय की थी सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि हर 3 साल में फीस कमेटी हर कॉलेज के ढांचे के हिसाब से वहां की सुविधाओं के हिसाब से फीस निर्धारित करेगी मगर 2004 के बाद आज तक फीस निर्धारित नहीं हुई ।
जबकि 2007, 2010, 2013 , ओर 2016 में होनी चाहिए थी
ओर इस बीच जितनी भी सरकारें रही या जो भी आयुष मंत्री उत्तराखंड के रहे कहीं ना कहीं उनकी लापरवाही का उसका खामियाजा आज हमारी सरकार को भुगतना पड़ रहा है , छात्रों को भुगतना पढ़ रहा है
मंत्री हरक सिंह बोले थे कि यह कोई आज की बीमारी नहीं है यह साल 2004 की बीमारी है।
आप सोचिए जब 2004 में 80, 000 फीस तय की गई तो 2019 में कोई कॉलेज बच्चों को कैसे महज 80 हज़ार मे पढ़ा सकता है। इस तरह के ज्ञापन मुझे निजी कॉलेज के संचालको ने दिए है
उन्होंने कहा था कि कॉलेज वाले बोल रहे है कि अगर हम 80,000 में बच्चों को पढ़ाते हैं तो टीचरों की फीस कहां से निकालेंगे ।
ये बात भी सच है कि सरकार निजी कॉलेजों को कोई भी अनुदान नहीं देती वे अपने संसाधनों के आधार पर फ़ीस के आधार पर ही कॉलेज को चलाते हैं । मंत्री हरक सिंह बोले थे कि ये सभी कॉलेज वाले मुझे ज्ञापन देकर बोल रहे है कि इस हालत मैं तो हम कॉलेज बन्द कर देंगे। और आप बताओ
यदि 16 कॉलेज बंद होते हैं तो लगभग फिर प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से
100000 लोग बेरोजगार हो जाएंगे की नही ।
लेकिन इसके बावजूद भी मैं छात्रों के हित को देखते हुए आयुष सचिव दलीप जवालकर को कह चुका हूं की निजी कॉलेजों के संचालकों को सख्ती के साथ निर्देश दिया जाए कि माननीय न्यायालय के आदेश का पालन कॉलेज संचालक करे।

बहराल आज की बैठक भी खत्म हो गई ओर आयुष छात्र को जब तक कुछ भी लिखित मैं नही मिलता वे धरना पर्दशन समाप्त करने को तैयार नही।
ओर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी कह चुके हैं कि माननीय न्यायालय के आदेश का कॉलेज संचालकों को सख्ती से पालन कराया जाएगा इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उसके बाद जिसको भी अपनी बात रखनी है माननीय न्यायालय जाए सुप्रीम कोर्ट जाए उनका अपना विवेक है


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