उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भले ही विधायकों तथा मंत्रियों की परफॉर्मेन्स को खुद की मेहनत या फिर डबल इंजन से खींच रहे हो किन्तु सच्चाई वही है जिस नब्ज पर उत्तराखण्ड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंसीधर भगत ने उंगली रख दी है!

 

सूत्र बोलते है कि भगत ने सरकार के खिलाफ बन चुके ऐंटी इनकंबेंसी के माहौल से बचने के लिए बेहतर रास्ता खोज लिया है। भगत जानते हैं कि यदि उत्तराखंड में सरकार फिर से प्रचंड बहुमत से वापस लानी है तो पापड़ खूब बेलने पड़ेंगे ।


ख़बर है कि लगभग तीन चौथाई विधायकों का रिपोर्ट कार्ड बहुत दयनीय स्थिति में है, कुछ बड़े नाम वाले मंत्री भी ज़ीरो परफॉर्मेन्स की सूची में हैं।


सूत्रों के हवाले से खबर है कि भाजपा की यमुनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ, थराली , कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, घनसाली, देवप्रयाग, सहसपुर, राजपुर रोड,धर्मपुर , ऋषिकेश, ज्वालापुर, झबरेड़ा, रुड़की, खानपुर, लक्सर, यमकेश्वर, श्रीनगर, लैंसडौन, कोटद्वार, गंगोलीहाट, द्वाराहाट, सोमेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल , पिथौरागढ़ सितारगंज की सीटें खतरे के निसान से कई ज्यादा ऊपर चल रही हैं!


फिलहाल उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत की नसीहत का असर अब भाजपा के विधायको पर साफ दिखाई देने लग गया है ओर विधायकों की परफॉर्मेंस पर ही भाजपा सगठन तय करने वाला है कि
इस बार टिकट किसे दिया जाए और किसे नही!
भाजपा सगठन भी जानता है कि हर बार मोदी के नाम से चुनाव नही जीता जा सकता , खुद का काम भी बोलता हुवा दिखाई दे तो बात बने भगत के बयान के बाद
अब हर विधायक अपने आप को सक्रिय दिखाने में जुट गया है और हाईकमान की नजर में नंबर बढ़ाने पर भी जोर मारने लग गया है।
बारी बारी से उन सभी के नमो का खुलासा करेगे पर
आज की बात
कर्णप्रयाग के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी की ( इनका इस बार चुनाव जितना मुश्किल है अगर टिकट मिलता है तो ! ओर चुनाव लड़ते है
तो, क्योकि इन्होंने खुद विकास के नाम क्या किया वो इनके क्षेत्र की जनता जानती है जो इनसे नाराज चल रही है )
ओर अब ऐसे में कर्णप्रयाग के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी
ने हाल ही मै एक दांव खेल दिया है
ओर उन्होंने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को उनकी सीट पर लड़ने का आमंत्रण दिया है!


हम सभी जानते है कि गैरसैंण कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के अंदर ही आता है,
गैरसैण सत्र में स्थानीय विधायक होने के नाते नेगी खासे सक्रिय रहते हैं।
( पर काम कुछ करते नही)
नेगी के बयान के अनेक मायने निकाले जा रहे हैं क्या वे चुनाव लड़ने के अनिच्छुक हैं या वे ऐसा बयान देकर मुख्यमंत्री की नजरों में अगले टिकट की मजबूत पैरोंकारी चाहते हैं।
बता दे कि वर्तमान में सुरेंद्र सिंह नेगी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के गुट के माने जाते हैं।
पहले नेगी मूलतः धन सिंह रावत के निकट हुआ करते थे
ओर पूर्व मुख्यमंत्री जनरल खंडूरी की कृपा से उन्हें टिकट मिला था। ओर खंडूरी की राज्य की राजनीति में दखल कम होने पर नेगी ने फिर धन सिंह रावत को पकड़ लिया था।
ओर काफी समय से उनका रुझान , अब त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर बढ़ा है, ताकि आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें फिर अपना बड़ा पैरोकार मिल सके। या फिर दोबारा टिकट ।
आपको बता दे कि
इस सीट पर ही पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक के खासमखास माने जाने वाले पूर्व विधायक अनिल नौटियाल भी
पिछले 10 महीनो से सक्रिय हो चुके हैं।


ओर उनको लग रहा है कि राष्ट्रीय राजनीति में निशंक का दबदबा नौटियाल को मुख्यधारा में लौटायेगा ओर उनको टिकट मिल ही जायेगा !


बता दे कि 2012 में पार्टी से बगावत करके चुनाव लड़े नौटियाल अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और आगामी प्रत्याशी की रणनीति के तौर पर उनके कार्यक्रम विधानसभा भर में लग भी रहे हैं।
बहराल अब देखना है कि अगले चुनाव में इस कर्णप्रयाग सीट से भाजपा की तरफ से ‘ नारा किसका गूंजेगा ये तो आने वाला समय बतायेगा ।
लेकिन एक बात साफ है
जिस तरह से नेगी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को कर्णप्रयाग से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रण दिया हो
इसके पीछे के दांव पेच तो वही जाने!
पर हम ये जानते है कि जिस तरह खंडूड़ी को कोटद्वार चुनाव लड़वाकर चुनाव में ठिकाने लगाया गया ! ठीक उसी प्रकार
क्या त्रिवेंद्र को भी आगामी चुनाव में ठिकाने लगाने के लिए उनके राजनीतिक विरोधी उनके आज के खासमखास लोगों से ही अभी से फील्डिंग सजाने में लग गए है ! क्योकि जो आज आपका है वो कल किसी ओर का था और आने वाले कल में किसी ओर का होने में समय कहा लगता है!! साहब इस राजनीति में।

अभी आप देखना की कुछ चापलूस टाइप नेता मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र को चौबटा खाल से लेकर देहरादून की केंट विधानसभा ,ओर त्रिवेंद्र को उलझाने के लिए कोई रायपुर से लेकर धर्मपुर तक की बात भी करेगा!! बहराल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत किसी के बहकावे में आने वाले नेता नही है वे सभी बातों को , लोगो के इरादों को भली भांति जानते है ,समझते है ।
लेकिन कड़वा सच ये भी है
भाजपा के लिए की यदि सरकार फिर से बनानी है तो कही सिटिंग विद्यायक के टिकट काटकर साफ छवि के नए नेता को आगे लाना होगा ओर
जिन मंत्रियों से उनके क्षेत्र की जनता नाराज चल रही है उनकी सीट भी बदलनी होगी!
ओर शायद इसी मिशन पर भगत लग भी चुके हो!!!


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