“राजधानी एक, वो होगी गैरसैंण

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि

राजधानी एक, वो होगी गैरसैंण”

गैरसैंण को लेकर हमारी स्थिति हमेशा बिल्कुल साफ रही है। हमने वहां राजधानी के रूप में #गैरसैंण का ढांचागत विकास करवाया। गैरसैंण में जहां 10 लोगों के रहने का स्थान उपलब्ध नहीं होता था, आज 2000 लोग वहां निवास कर सकते हैं, उसकी व्यवस्था की गई है। विधानसभा भवन सबसे भव्यतम भवन बनाया गया, 47 करोड़ रुपये सचिवालय के लिये स्वीकृत कर उसका काम वेबकॉस भारत सरकार की एक कंपनी को सौंपा गया और उनको एडवांस भी दे दिया गया है, पौने तीन साल में उसमें काम आगे नहीं बढ़ा है।

आज BJP Uttarakhand के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि वहां आवासीय भवनों का निर्माण होना आवश्यक है, हमने 500 भवनों के निर्माण की स्वीकृति देकर उसपर भी काम प्रारंभ किया। MLAs और मंत्रियों के रहने की पहले से ही व्यवस्था की गई है केवल मुख्यमंत्री आवास और राजभवन के निर्माण की दिशा में हमने कदम नहीं उठाये थे, मुख्यमंत्री आवास और राजभवन के लिये हम स्थान का चयन कर रहे थे। #भराड़ीसैंण टाउनशिप विकसित करने के लिये उस क्षेत्र को नोटिफाईड किया गया और यू हुड्डा को उसका काम सौंपा गया, एक स्पेशलाइज्ड एजेंसी इसके लिये यू हुड्डा के रूप में स्थापित की गई। गैरसैंण को राज्य के दूसरे भागों से जोड़ने के लिये 6 सड़कें स्वीकृत की गई और उसमें टनल निर्माण का कार्य भी सम्मिलित था तो उसके लिये एक कॉरपोरेशन बनाया गया और उस कॉरपोरेशन को पूंजी उपलब्ध कराई गई। गैरसैंण विकास परिषद को स्थानीय अवस्थापना विकास के लिये ताकि #चौखुटिया और गैरसैंण में कुछ काम हो सकें, पैसा उपलब्ध करवाया गया और 2 साल से वो संस्था लगातार हमारे कार्यकाल में वहां काम करती रही। पेयजल की उपलब्धता को बढ़ाया गया, विद्युतीकरण किया गया और विद्युत क्षमता को बढ़ाने के लिये सबस्टेशन आदि वहां निर्मित किये गये।

हमने उन प्रारंभिक कार्यों को जो राजधानी के लिये आवश्यक थे, उनको या तो पूरा करवाया या उनकी बुनियाद रखने का काम किया। पौने तीन साल से उस दिशा में भाजपा की सरकार ने कोई कदम आगे नहीं बढ़ाया है, एक ईंट भी गैरसैंण में नहीं लगाई है इसलिये एक बात सबके दिमाग में स्पष्ट होनी चाहिए कि

“राजधानी एक, वो होगी गैरसैंण”

ये शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन का भ्रम नहीं पाला जाना चाहिए, ये भ्रम राज्य के एक बड़े हिस्से के लिये बहुत घातक होगा, #पौड़ी किसका उदाहरण है। पौड़ी में कमिश्नरी है मगर कमिश्नर का कैंप कार्यालय #देहरादून में खोलने की अनुमति देकर स्थिति ये कर दी गई कि आज जिस पौड़ी के अंदर उत्तर प्रदेश में अफसर बैठता था, आज #उत्तराखंड के अंदर कमिश्नर देहरादून में बैठता है।
मैं समझता हूं कि इस विवाद का समाधान बहुत पहले हो चुका है कि गैरसैंण राजधानी होगी, हां शीतकालीन सत्र विधानसभा का कहीं और भी आहूत हो सकता है। देहरादून में जो सुविधायें हमारे पास उपलब्ध हैं, उसका उपयोग किया जा सकता है मगर राजधानी गैरसैंण ही होनी चाहिए

पूर्व  मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ये एलान कर साफ कर दिया है कि उनके इस बयान के बाद   उत्तराखंड मैं सता मैं बैठी भाजपा के लिए अब बेचैनी होना स्वाभविक है तो   विपक्ष  मै बैठी  कांग्रेस के लिए 11 से फिर आगे बढ़ने का रास्ता।

अब देखो आगे आगे क्या होता है।क्योंकि बात पहाड़ की है।

एक रावत जी ने तो कह दिया अब मुख्यमंत्री  त्रिवेंद्र रावत जी क्या कहते है ये देखना  दिलचस्प होगा बल





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