मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने अब तक कि 1641 घोषणाएं जाने कितनी हुई पूरी , सीएम घोषणाओं के अनुपालन में देरी किए जाने पर सीएम सख्त नाराज , अब लापरवाही पर अधिकारियों की जवाबदेही तय

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सुनो उत्तराखंड मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत बोले लापरवाही पर तय की जाएगी अधिकारियों की जवाबदेही।
ओर समयबद्धता से सीएम घोषणाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए
जी हां आज ।मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सचिवालय में सीएम घोषणाओं की समीक्षा की।सभी विभागों को रूफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था करने के निर्देश दिये गए।
गौरीकुंड जलाशय व सुरकंडा देवी रोपवे का काम इसी वर्ष पूरा हो जाएगा।कतिपय विभागों द्वारा सीएम घोषणाओं के अनुपालन में देरी किए जाने पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि लापरवाही किए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सचिवालय स्थित विश्वकर्मा भवन के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में सीएम घोषणाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री घोषणाएं समयबद्धता के साथ शत प्रतिशत पूरी होनी चाहिए। यह बताए जाने पर कि 1641 में से 910 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी हैं जबकि बाकी गतिमान हैं, मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि कार्यवाही गतिमान वाली घोषणाओं को पूर्ण किए जाने की अवधि स्पष्ट रूप से बताई जाए। घोषणाओं को पूरा करने के लिए विभागीय बजट का सदुपयोग किया जाए। अतिरिक्त फंड की आवश्यकता होने पर वित्त विभाग को अवगत कराया जाए। सभी सचिव अपने-अपने विभागों से संबंधित घोषणाओं के क्रियान्वयन की लगातार माॅनिटरिंग करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी भवनों में रूफ टाॅप रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य तौर पर किया जाना है। सभी विभाग एक माह में जलसंस्थान को अवगत कराना सुनिश्चित करें। हरेला पर्व पर प्रदेश में व्यापक वृक्षारोपण किया जाना है। सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों को भी इसमें शामिल होना है। कोशिश की जाए कि हर जिले में बनाए जाने वाले पार्कों को कलर कल्चर दिया जाए। साहसिक गतिविधियों के निदेशालय का ढांचा तैयार किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में जनसहभागिता से एक-एक नदी/जलस्त्रोत का संरक्षण, संवर्धन व पुनर्जीविकरण किया जाना है। इस योजना में निर्माण की बजाय वाटर रिचार्ज पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। चारधाम परियोजना की तर्ज पर लोक निर्माण विभाग की सडकों पर भी स्थान-स्थान पर सुविधा केंद्र विकसित किए जाएं। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर उच्च स्तरीय शौचालय सुविधाएं विकसित करते हुए इनके रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। होम स्टे योजना की नियमों व प्रक्रियाओं को सरल किया जाए। होम स्टे संचालकों की शंकाओं को दूर करते हुए इन्हें पंजीकृत किया जाए। धनोल्टी इको पार्क की तरह ही प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी इको पार्क विकसित किए जाएं। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष के अंत तक गौरीकुंड जलाशय को पहले जैसी स्थिति में लाया जाएगा। सुरकंडा रोपवे पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। जल्द ही इसे पर्यटकों व श्रद्धालुओं के लिए प्रारम्भ कर दिया जाएगा। प्रदेश में पिरूल कलेक्शन होने लगा है। इसके लिए परियोजनाओं के आवंटन पत्र दिए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ों में सिंचाई की लिफ्ट योजनाओं का उपयोग पेयजल में भी करने की सम्भावनाओं पर विचार किया जाए। जिन योजनाओं को नाबार्ड में लिया जा सकता है, उनके प्रस्ताव बना लिए जाएं। मुख्य शहरों में जलभराव की समस्या के निदान के लिए पुख्ता व्यवस्था की जाए। गंगोत्री में उच्च गुणवत्ता के घाट निर्माण का कार्य जल्द किया जाए। ल्वाली में झील का निर्माण एक वर्ष में सुनिश्चित किया जाए। छोटे कस्बों में कूड़ा निस्तारण के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित किल वेस्ट मशीन के प्रयोग की सम्भावना देख ली जाए। अनेक नगर निकायों द्वारा प्लास्टिक से आय सृजित की जा रही है। प्लास्टिक के रिसाईकिल कर उपयोग के लिए शहरी विकास विभाग व लोक निर्माण विभाग आपस में समन्वय करें।
बैठक में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव श्रीमती मनीषा पंवार, सचिव अमित नेगी, नितेश झा, एल.फैनई, श्रीमती राधिका झा, दिलीप जावलकर, शैलेश बगोली, श्रीमती सौजन्या, हरबंस सिंह चुघ, सुशील कुमार, पीसीसीएफ जयराज सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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