थराली से विनोद की रिपोर्ट।

थराली।


इस बरसात में फिर से 9 गांवों के ग्रामीण ओर स्कूली बच्चे अपने जान जोखिम में डाल कर ढाढरबगड़ गधेरे को पार करने को मजबूर ।

साल 2013 में आई बाढ़ एवं आपदा में सोलघाटी के 9 गांवों को जोड़ने वाला एकमात्र ढाढरबगड़ पुल बह गया था लेकिन 6 साल बाद भी यहां पर पुल निर्माण ना होने से एक बार फिर लोगों को गधेरे के उफान से लड़कर पार पाना है।

तो स्कूली के बच्चे भी डर के साए में है कि अब जल्द ही आगे होने वाली बरसात में वे कैसे स्कूल जाएंगे क्योंकि ढाढरबगड़ गधेरे को पार कर ही इस गांवों के बच्चे गेरूड़ इंटर कॉलेज मै जाते हैं।

वहीं ग्रामीण हर साल यहां पर लकड़ी का अस्थाई पुल बनाते हैं लेकिन गधेरे का उफान अधिक होने से वह ज्यादा दिन नहीं टिक पाता है।

साल 2013 जून के महीने में प्राणमति नदी में बाढ़ आने से रणकोट ,घुघुटी, गेराड़ी,चौनी, लेटाल, कलचुना,पार्था,और कुराड सहित गांवों को जोड़ने वाला पुल बह गया था जिससे यहां के लोगों का संपर्क कई दिनों तक देश दुनिया से कटा रहा और स्कूली बच्चे भी स्कूल नहीं गये।
उसके बाद जाड़ों में यहां पर लोगों ने फिर अस्थाई पुल बनाया था। लेकिन फिर से वो भी गधेरे के उफान मैं बह गया इसी तरह हर साल यहां के ग्रामीण इस स्थान पर लकड़ी का अस्थाई पुल बनाते हैं लेकिन कुछ समय बाद ही यह बह जाता है कई बार तो ग्रामीण एवं बच्चे रशियों एवं तारों की सहायता से गधेरा पार करते हैं।
जिससे हर समय हादसे का डर बना रहता है 6 साल से ग्रामीण यहां पर स्थाई लोहे का पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन शासन-प्रशासन बरसात में तो पुल बनाने की सोचता है लेकिन बरसात खत्म होते ही विभाग भी सो जाता है।


ग्रामीण भवान सिंह ,खिलाफ सिंह, सुजान सिंह, दिलमणि ,खीम सिंह, दयाल सिंह ,चंद्र सिंह ,आदि का कहना हैlकि उन्होंने इस संबंध में कई बार लोक निर्माण विभाग जिला पंचाय के अध्यक्ष ,उपजिलाधिकारी एवं जिलाधिकारी तक अपनी फरियाद पहुंचाई है। लेकिन कोई भी उनकी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है। बस अब हादसे का इंतजार बाकी है वही लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जगदीश रावत का कहना है। कि पहले यह पुल जिला पंचायत का था ।जो 2013 की आपदा में बह गया था ।लेकिन अब गधेरे में स्पान अधिक होने से ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग को पुल बनाने को लेकर आग्रह किया था पुल का स्टीमेट शासन को भेजा गया है। स्वीकृत होने पर पुल का कार्य शुरू किया जायेगा।
बहराल जीरो टाल रेश वाले मुख्यमंत्री जी आप तो पहाड़ का दर्द जानते है और ये भी जानते है कि ऐसे ही कही जगहों पर छोटे छोटे पुल की जरुरत होगी। बस दुःख तो इस बात है कि
उत्तराखंड के लायक जवाबदेही वाले अधिकारी, क्षेत्र के विधायक , प्रभारी मंत्री जी ।आदि आदि कब तक सोते रहोगे। क्या प्रदेश के अंदर होने वाली जनता की हर समस्या सिर्फ मुख्यमंत्री के पास ही जाएगी सिर्फ। वो ही करेगे उद्धार।
अब जाग जाओ प्रभारी मंत्रियों।
क्षेत्र के विधायकों , प्रचंड बहुमत के नशे से। नही तो जनता कहती है आधा समय काट लिया , आधा है कटना इनका बाकी, 22 मै फिर ना कहना कि हमको ही चुनना। हमको ही विधायक बनाना।





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