उत्तराखंड काँग्रेस मै कही कांग्रेस फिर वो चाहे पुराने हो या नए उनके निशाने पर या कहलो एक गुट पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के फेसलो से लगातार 2015 से सहमत नही दिखाई दिया आरोप प्रत्यारोप भी खूब चलते रहे।
लेकिन उन नेताओं का हरीश रावत पर शब्दो से प्रहार करना या हरीश रावत का उन पर इसके कही मायने निकाले जाते रहे है।
ओर मायने है भी।
पर जो आज उत्तराखंड की युवा कांग्रेस मैं जो कुछ भी चला रहा है वो किसके लिए घातक होगा ये तो समय ही बताएगा पर अब कुछ लोगो के निशाने पर सीधे पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत है । या कह लो उनको भी किसी ने कठपुतली तो नही बनाया अपना?
आज कल फेसबुक पर ये सभी चल रहा है।
ये सब लिखा जा रहा है।

महोदय
हरीश रावत जी
आप युवा कांग्रेस को खत्म करने का कार्य कर रहे हैं जहाँ संगठन को अभी मजबूत करने का विचार करना था वहाँ आपने संगठन में कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाकर ग्रुप बाजी को बढ़ावा दिया है••
आपकी इस तरह की मानसिकता का अंदाजा नही था ••
अगस्त में छात्रसंघ चुनाव होने हैं आपने अभी से ही इस तरह का माहौल बनाकर युवा पीढ़ी को एक गलत संदेश दिया है ••
2017 में हम बुरी तरह विधानसभा चुनाव हार गये 2019 में लोकसभा की एक सीट भी नसीब नही हुयी अब छात्र संघ चुनाव का समय आया आपने इतनी बड़ी साजिश रचा दी••
किस तरह किस सोच के साथ आप मजबूत कर रहें हैं कांग्रेस को ????
आपसे हम युवाओं को इतनी छोटी सोच की उम्मीद नही थी •••
आपने अपनी वॉल से बधाई शुभकामनाएं तो दी कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनने पर हो सके तो हमारे भी जबाब दे दीजियेगा●●

अंकिता की कलम से

यही नही बात इससे आगे बढ़कर भी लिखी जा चुकी है।
वो भी आपको बताते है कि कया लिखा जा रहा है और क्या चल रहा है आज कल फेसबुक पर।
उत्तराखंड में यूथ कांग्रेस की फूट का फायदा किसको ?

उत्तराखंड की यूथ ( युवक ) कांग्रेस के इतिहास में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ है,जब एक चुनाव जीतकर प्रदेश अध्यक्ष बने विक्रम रावत के समकक्ष तीसरे नंबर पर रहे सुमित भुल्लर को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया है । इसके चलते मेरे मन मस्तिष्क में कुछ सवाल आए हैं। जिन्हें में आपके सामने साक्षा कर रहा हूँ …
सवाल नंबर 1 …
यूथ कांग्रेस के जिस राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव यादव ने सुमित्र भुल्लर को नया कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया है, वह इसके पीछे तर्क ( नोटिस ) देते हैं कि ‘वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत गत लोकसभा चुनाव में सक्रिय नहीं रहे। यहां तक कि हल्द्वानी के एक कार्यक्रम में जब मैं ( केशव यादव ) खुद गया तो वहां प्रदेश अध्यक्ष नदारद मिले थे’। गवाह है उस दिन ( 31 मार्च ) की हल्द्वानी की मीडिया कवरेज । जिसमें मीडिया कर्मियों ने जब यही सवाल राष्ट्रीय अध्यक्ष से किया था तो उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत का बचाव करते हुए कहा था कि वह दूसरे जिले ( देहरादून ) में चुनावी कार्यक्रम में व्यस्त हैं इसलिए यहां नहीं आ सके । आखिर केशव यादव के तब और अब के बयानों में इतना विरोधाभास क्यों ?
सवाल नंबर 2 …
अगर लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी (हरीश रावत) को कम वोट मिलने और यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष की निष्क्रियता के आधार पर हटाया गया है,तो सबसे पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष केशव यादव को पद से हटाना चाहिए क्योंकि वह जिस उत्तर प्रदेश से आते हैं वहां खुद राहुल गांधी अपनी सीट नहीं बचा सके। यही नहीं बल्कि जिस देवरिया के यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव यादव है, वहां उनकी लोकसभा में उनकी पार्टी का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर रहा । जिसे महज 50000 वोट हासिल हुए। इसी के साथ यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव यादव यह भी बताएं कि उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों की हार के कारण कितने प्रदेश अध्यक्षों को निष्क्रिय मानते हुए कितने प्रदेशों के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए हैं ?
सवाल नंबर 3 …
जिस चुनाव में विक्रम रावत प्रदेश अध्यक्ष बना उसी चुनाव में देहरादून में यूथ कांग्रेस का जिला सचिव बनने वाला वैभव वालिया आखिर इतनी काबिलियत कहां से पा गया कि वह यूथ कांग्रेस का नेशनल सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर बना दिया गया ? यही नहीं बल्कि वैभव वालिया नामक इस नेता ने आखिर किसके इशारे पर प्रदेश भर में यूथ कांग्रेस के सोशल मीडिया के थोक में पद बांट दिए ? 50 से अधिक पद वह किस आधार पर दे सकता है अगर दे भी सकता है तो इसके लिए पहले प्रदेश अध्यक्ष की अप्रूवल जरूरी होती है । लेकिन वैभव वालिया को इतना बरदहस्त किस नेता का मिला कि उसने यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम रावत की पद बांटते समय सहमति तक लेना उचित नहीं समझा ? एक जिला सचिव को प्रदेश अध्यक्ष से ऊपर बनाकर प्रदेश में पदों की बंदरबाट किसके इशारे पर की गई ?
सवाल नंबर 4…
उत्तराखंड के पिछले 18 सालों के इतिहास में आज तक ऐसा नहीं हुआ की इलेक्ट्रिक ( चुनाव जीतकर बने ) यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के मुकाबिल एक ऐसा नेता बना दिया जाए जो यूथ कांग्रेस के चुनाव में तीसरे नंबर पर रहा ? इस प्रदेश में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ । अब अगर हुआ है तो क्यों हुआ है और किसके इशारे पर हुआ है ? यूथ कांग्रेस के नियमों के अनुसार ऐसा अगर हो भी सकता था तो यह होता की कार्यकारी अध्यक्ष तब बनाया जाता जब वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष कोई काम ना करता और निष्क्रिय रहता या किसी बीमारी या दुर्घटना की वजह से काम करने में सक्षम साबित हो जाता । लेकिन एक सक्रिय प्रदेश अध्यक्ष को राजनीतिक हाशिए पर डालने के लिए क्या तीसरे नंबर के कैंडिडेट को इस तरह कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सामने लाना जरुरी था ।
बहराल सबके निशाने पर घुमा फिराकर हरीश रावत है।
पर क्यो ये तो वही जाने।
या फिर हरीश रावत के निशाने पर रणजीत रावत के बेटे विक्रम रावत रहे या है ये हरीश रावत ही जाने। बस हम तो इतना ही जानते है कि
जो कुछ भी उत्तराखंड के अंदर कांग्रेस मैं हो रहा है ये काँग्रेस के लिए ठीक नही है।


बहराल उत्तराखंड मै हर पथर के नीचे कांग्रेस की गुटबाज़ी अब आम होकर सड़क पर है शोशल मीडिया पर है।
ये भी सुभ नही कांग्रेस के लिये।
बस ये समझ नही आ रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जी के क्या इतने बुरे दिन आ गए है कि अब बच्चा बच्चा भी बोल रहा है कि आप यूवा कांग्रेस को खत्म कर रहे है, आप गुट बाज़ी बढ़ा रहे है,
बहराल सच क्या है ये तो हरीश रावत पर आरोप लगाने वालो को मालूम होगा ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को ही।

 

 

 



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