आपको बता दे कि देहरादून नारी निकेतन में संवासिनियों से दुष्कर्म और गर्भपात कराने के मामले में नौ आरोपियों को अदालत ने दोषी करार दे दिया है
ख़बर है कि शासकीय अधिवक्ता संजीव सिसौदिया ने मीडिया को बताया कि आज देहरादून में अपर जिला जज षष्ठम की अदालत में सभी नौ आरोपियों का दोष सिद्ध हुआ है
अब ख़बर है कि दोषियों की सजा पर सोमवार को बहस होगी आपको याद दिला दे कि साल 2015 में उत्तराखंड के अमर उजला अखबार ने देहरादून नारी निकतन में संवासिनियों से दुष्कर्म और गर्भपात कराने के बाद भ्रूण छुपाने का मामला प्रमुखता से उठाया था। नारी निकेतन के अंदर खाने हुए इस अपराध का खुलासा एक गुप्त पत्र द्वारा हुआ था जो उत्तराखण्ड अमर उजाला को भेजा गया था।इस पत्र में आरोप लगाया गया था कि एक संवासिनी के गर्भवती होने के बाद नारी निकेतन के स्टाफ ने उसका गर्भपात करा दिया। यह पत्र समाज कल्याण निदेशक के नाम भेजा गया था। पत्र की कॉपी मीडिया को दी गई थी। इस संबंध में तत्कालीन समाज कल्याण के निदेशक वीएस धनिक का कहना था कि वह जांच के बाद ही कुछ कह पाएंगे। बता दें कि पत्र में आरोप लगाया गया था कि एक संवासिनी का पहले शारीरिक शोषण किया गया। जब वह तीन माह की गर्भवती थी तो उसका बिना अधिकारियों की अनुमति के गर्भपात करा दिया गया।उस पत्र में लिखा गया था कि संवासिनी को 15 नवंबर 2015 की रात 9.30 बजे ऑटो बुक करा कर ले जाया गया। एक निजी अस्पताल में गर्भपात कराने के बाद 16 नवंबर की सुबह सात बजे उसे नारी निकेतन लाया गया।
बता दे कि पत्र में यह भी सलाह दी गई थी कि संवासिनियों का मेडिकल चेकअप कराया जाए तो नारी-निकेतन के स्टाफ की असलियत सामने आ जाएगी। इस पूरे मामले में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करने की मांग भी की गई थी।बहराल अब देखना ये होगा कि जिन सभी के अपराध साबित हुए है उनको सज़ा क्या सुनाई जाती है।



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