उत्तराखंड: आंधी-तूफान के साथ बारिश का कहर, अब तक तीन लोगो की मौत, कुछ घायल । माल के नुकासन।
बता दे कि उत्तराखंड के कही जिलों मै देर शाम को मौसम ने करवट बदली। ओर अचानक गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में आंधी-तूफान और बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। हालात ये थे कि उधमसिंह नगर जिले के काशीपुर में तेज बारिश के बाद केपीसी स्कूल की दीवार गिर गई। ओर इस हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक घायल हो गया है।


जबरदस्तभीषण गर्मी के बीच बारिश से लोगों को राहत तो मिली। पर इस आधी तूफान से बारिश से कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बंद हो गई है। वहीं खटीमा सहित भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि और बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है


गुरुवार देर शाम को कोटद्वार क्षेत्र में दोपहर बाद धुमाकोट और नैनीडांडा क्षेत्र में आंधी तूफान के साथ बारिश हुई। इस बीच तेज हवाओं से जडाऊखांद में एक पेड़ टूटकर दुकान के ऊपर जा गिरा, गनीमत यह रही कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बारिश से क्षेत्र का मौसम सुुहाना हो गया। आंधी के चलते क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति बाधित हो गई है।


बता दे कि राज्य के पहाड़ी इलाकों में अगले 12 घंटों के दौरान तेज ओलावृष्टि और बिजली गिरने की आशंका है। वहीं, मैदानी इलाकों में तेज रफ्तार आंधी चल सकती है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में 13 जून तक हल्की बारिश हो सकती है। वही मौसम केंद्र की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार प्रदेश के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ के कुछ हिस्सों में अगले 12 घंटों के दौरान ओले गिर सकते हैैं। इसके अलावा कुछ इलाकों में बिजली गिरने की आशंका भी है। वहीं, मैदानी क्षेत्रों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।
वही सुबह से ही तीर्थनगरी में कभी बादल तो कभी धूप की आंख मिचौली चलती रही। दोपहर करीब ढाई बजे के बाद अचानक मौसम ने रंग बदल दिया। झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस दौरान कहीं-कहीं पर ओले भी गिरे। ओर देश विदेश से पहुंचे पर्यटक भी बारिश को देख सड़कों पर निकल आए। बारिश करीब एक घंटे तक चली। इसके बाद हल्की धूप खिली। लेकिन, शाम होते होते मौसम ने फिर करवट बदल ली। ठंडी हवाएं चलने लगी थीं। कुल मिलाकर उत्तरखंड मैं इस बदलते मौसम से राहत जरूर जबको मिली ग
है।
पर अब तेज बारिश होने, आधी तूफान, ओर बादल फटने जैसी दुःखद घटनाओं के बीच 3 लोगो की मौत हो कि चुकी है कही घायल है। तो जान माल का नुकसान भी बढ़त ही जा रहा है जो दुःखद है।





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