कहां गुम हो गया उच्च शिक्षा में सातवें वेतनमान का आदेश ?आपको बता दे कि ख़बर ये है कि उच्च शिक्षा विभाग में सातवां वेतनमान लागू करने का सरकारी आदेश लगता है मजाक बन गया है।! आपको बता दे कि आदेश ये था कि विश्वविद्यालयों और सरकारी डिग्री कालेजों के शिक्षकों को जनवरी से ही सातवां वेतनमान मिलेगा। पर हकीकत यह है चार महीने पूरे होने को हैं और शिक्षकों को छठे वेतनमान के अनुसार ही तनख्वाह मिल रही है। सरकारी और अशासकीय डिग्री कालेजों के लगभग 1500 से ज्यादा शिक्षक सरकारी मशीनरी की सुस्त चाल से काफी परेशान है । आपको बता दे कि इस साल पांच जनवरी को सरकार ने उच्च शिक्षा विभाग में सातवां वेतनमान लागू किया। ओर तत्कालीन एसीएस-उच्च शिक्षा डॉ. रणवीर सिंह की ओर से जारी इस जीओ में साफ लिखा गया था कि शिक्षकों को सातवें वेतनमान का लाभ जनवरी से ही मिलने लगेगा। तब सरकार के फैसले से खुश शिक्षकों ने जीओ जारी होने के अगले ही दिन मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा राज्यमंत्री का भव्य सम्मान भी किया। मगर तब से तीन महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन सरकार अपने ही आदेश पर अमल नहीं करवा पाई।वही ख़बर ये भी है कि  सातवां वेतनमान लागू होने हो रही देरी से शिक्षक भी काफी नाराज हैं। राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आरएस भाकुनी का कहना है कि सरकार के आदेश के बाद ही शिक्षकों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें भी अन्य विभागों के समान बढ़ा वेतन मिलेगा। पर, अब चार माह होने को है, लेकिन सातवें वेतनमान का इंतजार खत्म ही नहीं हो रहा। यह गलत है। गढ़वाल विवि महाविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. डीके त्यागी का कहना है कि एक ओर सरकार शिक्षकों से अपेक्षा करती है कि वो अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहें। जो कहा जाए उसका पालन हो। पर, जब शिक्षकों के बुनियादी हक और सुविधाओं की बात आती है तो सरकार मुंह फेर लेती है। सातवां वेतनमान पर सरकारी रुख इसे साबित भी कर रहा है।वही अब ख़बर ये आ रही है की सातवें वेतनमान के लागू होने में जो देरी हो रही है उसके लिए उच्च शिक्षा विभाग साफ्टवेयर की कमी को वजह बता रहा है क्योकि साफ्टवेयर अपडेट ही नही हो पाया।
बहराल बात जो भी हो पर तरह से तो उत्तराखंड सरकार की ही किरकरी होती है ।



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