सुनो उत्तराखंड वालो टिकट का ऐलान भी समझो हो ही गया जब राजनीति के चाणक्य टिकट फाइनल से पहले ही बयान बाज़ी करने लगे तो मान लो जिसके लिए उन्होंने बयान बाजी आरम्भ की है उसको ही पार्टी टिकट देने जा रही है।
खुद का दर्द जो भी हो वो तो वो ही ठीक से वही जाने पर जब जिस पार्टी में हो उसके लिए तो बेस्ट बोलना ही है और अपने राजनीतिक विरोधियों को भी कुछ तो कहेंगे ही 11 अप्रेल को होने वाले उत्तखण्ड मै लोकसभा सुनाव को को लेकर सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. ओर एक-दूसरे के खिलाफ अब तीखी जुबानी जंग भी शुरू हो गई है जो होली के बाद ओर आग पकड़ेगी।


उत्तराखंड मे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खडूडी के बेटे मनीष खंडूड़ी को कांग्रेस में शामिल कराकर भाजपा को बेचने कर दिया भले ही भाजपा मुँह से कुछ ना बोले पर चेहरा सब बया कर देता है।
ओर अब तो पौड़ी लोकसभा से मनीष खंडूड़ी है जरूरी के नारे सुनाई देगे


वही सबसे बड़ी बात ये है कि कम बोलने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूड़ी के भाई पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मनीष खडूडी को सलहा दे डाली।
आपको बता दे कि पूर्व सीएम विजय बहुगुणा ने कहा की रिश्ते में मनीष खंडूड़ी मेरा भतीजा है और भुवन चंद्र खंडूड़ी मेरे संगे बुआ के लड़के हैं। राजनीति में जाना पार्टी ज्वाइन करना उनका निजी फैसला है, लेकिन मनीष को मैं बस यह सलाह देना चाहता हूं कि अगर वह चुनाव हार भी जाए तो भी राजनीति से भागे नहीं और न ही उत्तराखंड छोड़े, यही नही विजय बहुगुणा आगे बोले कि मै भी दो बार चुनाव हारा हूँ। अगर मनीष चुनाव हार जाए तो फिर उत्तराखंड से भागे ना।


मनीष को समझना होगा कि ये राजनीति है कोई पिकनिक नही।
बहराल विजय बहुगुणा के इस बयान के मायने ये निकलते है कि उनको भाजपा की जीत पर विस्वास है और मनीष पर यकीन कम की वो यदि चुनाव हार जाते है तो उत्तखण्ड से भाग जायेगे।
वैसे हमारे सूत्र बोलते है कि मनीष खंडूड़ी ने भी ये साफ कर दिया है कि उन्होंने कांग्रेस में आने का फैशला बहुत सोच समझकर लिया है। और वे सिर्फ सांसद बनने या राज्य सभा तक जाने तक ही सीमित नही रहेंगे।
उनके पास विरासत में अपने पिता ईमानदार जर्नल खडूडी की ईमानदारी ओर उनकी सच्चाई है जिस पर मनीष खंडूड़ी चलेंगे।


वे जानते है कि अलग अलग पार्टी मे रहने के कारण उनकी बहन और पिता का कांग्रेस पार्टी और उन पर शब्दो से हमला भी होगा जो जायज भी है क्योंकि विचार धारा से जुड़ी बात है।
पर मनीष खंडूड़ी तो अपनी दादी के नक्से कदम पर चलने का निर्णय ले चुके है । मनीष कहते है कि वो कोई एक दो दिन महीने भर के लिए नही आये है लिहाजा विजय बहुगुणा जी चिंता ना करे आपने राजनीति को पिकनिक समझा है मैंने नही ।
आप ओर भाई साकेत बहुगुणा उत्तराखंड में तभी होते है जब चुनाव होते है और उसके बाद आप लोग गायब ।



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