आपको बता दे कि साल 2013 की आपदा में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए केंद्र ने जो पुनर्निर्माण पैकेज मंजूर किया था, राज्य की सरकार उसका भी ठीक से पूरा इस्तेमाल नहीं कर पाई। लगभग पांच साल में सरकार 2,551 करोड़ रुपये खर्च करने में पूरी तरह से फेल रही। क्योकि केंद्र की विशेष आयोजनगत सहायता-पुनर्निर्माण योजना के तहत स्वीकृत 319.75 करोड़ रुपये की प्राप्ति के बाद भी राज्य सरकार ने इस धनराशि को जारी नहीं किया और परिणाम ये निकला कि गौरीकुंड व केदारनाथ के बीच अब तक रोपवे का निर्माण नहीं कर पाई।  आपको बता दे कि रिपोर्ट के मुताबिक पैसा जारी नहीं होने से न आश्रय सह गोदामों के निर्माणकार्य हो सके और न ही केदारनाथ टाउनशिप के दूसरे चरण के कार्य व अन्य धामों के विकास कार्यों में भी तेजी नही आ सकी। यही नहीं इस पैकेज के तहत सरकार प्रभावित इलाकों के युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 10 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान बनाने के लिए भी धनराशि स्वीकृत नहीं करा सकी।
जो बात निकलकर आई उसके अनुसार पुनर्निर्माण पैकेज के तहत बनीं 61 फीसदी सड़कों की गुणवत्ता को प्रदेश सरकार के ही लोक निर्माण विभाग ने कमजोर माना है। ये खुलासा भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में हुआ है। शुक्रवार को विधानसभा में संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने यह रिपोर्ट सदन पटल पर पेश की।
आपको बता दे कि इस रिपोर्ट के अनुसार, मध्यम और दीर्घकालिक पुनर्निर्माण पैकेज के तहत प्रदेश सरकार ने 3,708 करोड़ के जो कार्य किए, उनमें भी कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। राज्य सरकार द्वारा धन स्वीकृति में देरी करने और कार्यदायी संस्थाओं द्वारा ढिलाई बरतने से पुनर्निर्माण कार्यों पर काम समय पर शुरू नहीं हो सका था।
आपको बता दे कि जो कमिया कैग ने पाई उनमे केंद्र से पैसा मिला, फिर सरकार प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति नहीं दे पाई, काम लटक गए , पुनर्निर्माण कार्यों के पैकेज में ऐसे काम भी शामिल कर दिए, जो आपदा में नहीं हुए क्षतिग्रस्त, निर्धारित मानकों के विपरीत बजट खर्च कर डाला, निर्माण कार्यों में अत्यधिक छूट दे दी गई, सिंचाई, वन, लोक निर्माण विभाग अपनी परिसंपत्तियों का सही आंकलन करने में रहे नाकाम, पुनर्निर्माण कार्यों के नियोजन, निधि प्रबंधन में भारी कमी, वक्त पर पूरे नहीं हुए स्वीकृत कार्य,निगरानी रखने और गुणवत्ता परखने को कोई केंद्रीकृत तंत्र बनाने की जहमत तक नहीं उठाई, 10 सड़कें और पुल, दो पर्यटन अवस्थापना से जुड़े कार्य पांच साल बाद भी पूरे नहीं हो पाए,
वही मार्च 2018 तक तीन लघु जल विद्युत परियोजनाएं और 17 सार्वजनिक भवन भी नहीं बने ,वन क्षेत्र में पांच निर्माण कार्य पांच वर्ष से अधिक समय होने के बावजूद शुरू नहीं हो पाए,246 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के सही प्रस्ताव न बनने से पैकेज का लाभ नहीं मिला,पुनर्निर्माण में बनीं 61 प्रतिशत सड़कों की गुणवत्ता को लोक निर्माण विभाग ने माना कमजोर

वही खर्च में पूरी तरह से फिसड्डी रही सरकार

आपको बता दे कि उस समय 9,296.89 करोड़ का पुनर्निर्माण पैकेज मांगा था प्रदेश सरकार ने केंद्र से
जबकि 7,346 करोड़ के पैकेज को केंद्र सरकार ने जनवरी 2014 में दी थी मंजूरी
वही 6,259.84 करोड़ का परिव्यय मध्यम व दीर्घकालिक पुनर्निर्माण के लिए मंजूर हुए थे
जबकी 4,617.27 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार ने उपलब्ध कराई, वही
3,708 करोड़ रुपये ही प्रदेश सरकार पुनर्निर्माण कार्यों पर खर्च कर सकी है, जबकि
319.75 करोड़ रुपये विशेष आयोजन सहायता के लिए नहीं करा सके स्वीकृत
बहराल अब बोलता है उत्तराखंड की आप ही तय करे कि जो मदद केंद्र ने राज्य को दी थी उसका पूरा इस्तेमाल तो पिछ्ली सरकार कर सकती थी। जो नही किया गया। ऐसे मे जवाब तो देना होगा विजय बहुगुणा से लेकर हरीश रावत को ।





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