वही आज सोमवार से उत्तराखंड विधानसभा का बजट सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। हरिद्वार जिले में हुए जहरीली शराब कांड को लेकर विपक्ष ने हंगामा कर दिया। सत्र शुरू होते ही राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने अभिभाषण पढ़ा, लेकिन इस दौरान सदन में विपक्ष ने शराब कांड को लेकर हंगामा कर दिया।

विपक्ष के विधायकों ने हाथों में नारे लिखी तख्तियां उठाई। वहीं नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने सवाल उठाया कि 11 बजे पहले राज्यपाल का अभिभाषण कैसे शुरू हुआ। राज्यपाल का अभिभाषण करीब 10.55 पर शुरू हुआ था।

उन्होंने सदन की परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया। वहीं जहरीली शराब कांड पर विपक्ष ने आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की। हंगामा करते हुए सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर डाली। जिसके बाद राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार कर विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया और कांग्रेसी विधायक धरने पर बैठ गए। हंगामे के बीच ही राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया। इसके बाद अध्यक्ष ने तीन बजे तक सदन को स्थगित कर दिया। 
सोमवार को बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य राज्यपाल बनने के बाद पहली बार सदन में अभिभाषण किया। पहली बार अभिभाषण के लिए विधानसभा पहुंची राज्यपाल बेबी रानी मोर्या को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

त्रिवेंद्र सरकार का बजट 14 की जगह अब 15 फरवरी को सदन के पटल पर रखा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रुद्रपुर में प्रस्तावित रैली को देखते हुए 14 फरवरी को सदन नहीं चलेगा।

 

वही पीएम मोदी के लोक लुभावने चुनावी बजट के बाद अब त्रिवेंद्र सरकार के बजट पर सबकी नजर रहेगी। सत्ता पक्ष के लिए बड़ी चुनौती यह है कि हर वर्ग को साधने वाला बजट पेश हो। वित्त मंत्री प्रकाश पंत इसकी तैयारी कर चुके हैं। उनके पिटारे से निकलने वाली बजट घोषणाओं पर चुनावी रंग दिखना तय है। बजट सत्र में सत्ता पक्ष का दूसरा इम्तिहान विपक्ष लेगा। विपक्ष न केवल बजट को कटघरे में लाएगा बल्कि अवैध शराब से हुई मौतें को लेकर विपक्ष ने हंगामा करना आरंभ कर दिया है वही इस बजट सत्र के दौरान विपक्ष , लोकायुक्त, जीरो टालरेंस जैसे मुद्दों पर सरकार पर हल्ला बोलने की तैयारी में है।
वही लोकसभा चुनाव नजदीक होने के कारण त्रिवेंद्र सरकार के लिए ये बजट सत्र बेहद अहम माना जा रहा है। केंद्र सरकार ने जिस तरह से बजट में मध्य वर्ग को इनकम टैक्स, किसानों को सम्मान निधि, मजदूरों को पेंशन, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण जैसे हर वर्ग को प्रभावित करने वाली घोषणाएं की हैं, उसी तर्ज पर त्रिवेंद्र सरकार को भी बजट घोषणाएं करने का दबाव रहेगा। राज्य की कमजोर वित्तीय स्थिति में नई योजनाओं को शामिल करना आसान नहीं है, लेकिन चुनावी वर्ष में सरकार खजाने की परवाह किए बिना बड़े फैसले ले सकती है।
वही चुनावी रणनीति के लिहाज से ऐसा करना सरकार की सियासी मजबूरी भी दिख रही है। कई ऐसे विषय हैं जिनको बजट में संबोधित किया जा सकता है। बजट में यह भी देखा जाना अहम रहेगा कि पलायन जैसे विषय को स्वरोजगार, पर्यटन और उद्योग से किस तरह सरकार जोड़ती है। दूसरा बड़ा सेक्टर किसानी एवं बागवानी का रहने वाला है, इसमें सरकार कुछ नई योजनाएं लाने की तैयारी में है। इन सबके अलावा यह भी अहम रहेगा कि राजस्व बढ़ाने के लिए सरकार किस तरह की नई योजनाएं लाती है।

 





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