जीरो टॉलरेंस मतलब सीएम त्रिवेंद्र रावत ओर उसी नीति पर आगे बढ़ते हुए सीएम त्रिवेंद्र रावत ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए सिडकुल में हुए निर्माण कार्य और नियुक्तियों में हुए घोटाले पर अब एसआईटी जांच के आदेश दिए हैं आपको बता दे कि इस एसआईटी में आईजी स्तर के अधिकारियों को जांच सौपी गई है. साथ ही एसआईटी को एक महीने में जांच रिपोर्ट सौंपने के भी निर्देश दिए गए हैं.
आपको बता दे कि उत्तराखंड सिडकुल निर्माण में नियुक्ति व खरीद फ़रोख़्त घोटाले में आईजी गढ़वाल के नेतृत्व में 7 सदस्य SIT जांच टीम का पुलिस मुख्यालय द्वारा गठन किया गया है. SIT के अध्यक्ष उधम सिंह नगर के एसएसपी होंगे, हरिद्वार एसपी, विकासनगर सीओ, नैनीताल एसपी सहित देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर सिडकुल क्षेत्र के तीन इंस्पेक्टर इस SIT जांच टीम में शामिल किये गए हैं. इस SIT गठन टीम की पुष्टि पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने किया है. गोरतलब है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान बीजेपी ने सिडकुल में हुए निर्माण कार्यों को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए थे. सरकार की ओर से कराए गए स्पेशल ऑडिट में भी सिडकुल में हुए निर्माण कार्यों के प्रोक्योरमेंट नियमों की धज्जियां उड़ाने और बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरतने की पुष्टि हुई थी. इसके तहत रुद्रपुर, काशीपुर और पंतनगर समेत अन्य स्थानों में हुए निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताएं सामने आई थी. इतना ही नहीं बीजेपी सरकार ने सिडकुल कर्मचारियों के वेतन निर्धारण और नियुक्तियों पर भी सवाल खड़े किए थे. सूत्रों की मानें तो सिडकुल में कई मंत्रियों के रिश्तेदारों की नियुक्ति के भी आरोप हैं. वहीं, अब त्रिवेंद्र सरकार ने एसआईटी गठित कांग्रेस सरकार के दौरान हुए घोटालों की जांच करेगी.


ख़बर है कि शासन ने सिडकुल में अनियमितताओं को लेकर अभिसूचना से गोपनीय जांच पड़ताल कराई थी. मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने मामले में कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही उच्च स्तरीय जांच करने के निर्देश दिए हैं. बीते कुछ महीने पहले शासन ने मामले पर सिडकुल के डीजीएम टेक्नीकल को भी निलंबित कर दिया था.।
बहराल पहले पहले एनएच 74 मुआवजा घोटाले की जांच से हड़कंप और अब सिडकुल में हुए घोटालों की जांच को लेकर एसआईटी का गठन त्रिवेंद्र रावत सरकार का जीरो टॉलरेंस के नाम पर बड़ा फैसला इसे भाजपा बता रही है ।
तो वही राजनीति के चाणक्य, ओर उत्तराखंड की सियासत को भांपने वाले कहते है कि सीएम त्रिवेन्द्र के खिलाफ कही दलाल , कमीशन खोर , भूमाफिया, शराब माफिया, खनन माफिया, ओर उनके राजनीतिक विरोधीयो ने ठान रखी है कि कुछ भी करके सीएम त्रिवेंद्र को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया जाए। ये बात इस लिए भी पुख्ता होती है कि जब से सीएम त्रिवेंद्र मुख्यमंत्री बने है तब से लेकर आज तक उनकी छवि को खराब करने, ओर उनके खिलाफ आये दिन कामयाब ना होने वाले षड्यंत्र ठीक उसी प्रकार लगातार हो रहे है जैसे लोग कपड़े बदलते है। उत्तराखंड का दुर्भाग्य रहा है कि कभी भी किसी भी एक मुख्यमंत्री को पूरे 5 साल ठीक से काम नही करने दिया गया। जिसकी एक महत्वपूर्ण वजह इससे पहले जहा सम्पूर्ण बहुतमत ना होना था वही राजनेताओं की अधिक महत्वकांक्षी होने के चलते भी राज्य का विकास अधर मैं लटका रहा इतिहास सब जानते है पिछले 17 सालों का इसलिए उस पर बात ना करते हुए सिर्फ इतना कहेगे की जनता ने तभी राज्य में पूर्ण बहुत की सरकार बनाई। वो भी प्रचंड बहुमत वाली ताकि आज की सरकार के आगे फिर कोई बात या बहाना ना रहे।जनता ने तो अपना काम कर दिया अब बारी त्रिवेंद्र सरकार की है। और अब तक 2 साल के त्रिवेंद्र सरकार के काम काज का रिपोर्ट कार्ड भी 18 मार्च को सबके सामने होगा फिर जनता ही तय करे कि दो साल में त्रिवेंद्र सरकार उनके अरमानो ओर उम्मीदों पर कितना खरा उतरी या नही।
बस हम तो, यही कहते है कि पिछले दो सालों मे कोई लूट, खसौट, किसी मंत्री, अधिकारी, कमीशन खोरी, भाजपा विद्यायको से लेकर भाजपा के सगठन तक कोई भृस्टाचार के आरोप नही लगे जो सुखद है। ओर यही त्रिवेंद्र की जीत भी है तो उनकी सीएम की कुर्सी के लिए खतरा भी। क्योकि अब इसी जीरो टालरेश के कारण राज्य मैं ख़बर है कि कही दलाल, भूमाफिया, शराब माफिया, खनन माफिया, वन संपदा को नुकसान पहुचाने वाले से लेकर लिसा चोर से सरकारी जमीनों पर कब्जा करने वाले ,या चालाकी से लेंड यूज बदलवाने वाले तक कुछ सीएम त्रिवेंद्र के राजनीतिक विरोधियों के साथ मिकलर महागठबंधन कर चुके है ताकि सीएम त्रिवेंद्र को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया जा सके। अब ये सीएम त्रिवेंद्र की परीक्षा है कि वो कैसे जीरो टालरेंस को आगे भी जरी रख सके ।इसके साथ ही अपनी उस सीएम कुर्सी को भी बचाये रखना होगा जिसके लिए चंडाल चौकड़ियों की पूरी टीम एक हो चुकी है उनको इस कुर्सी से हटाने के लिए। लोकसभा चुनाव नजदीक है लिहाजा इस बार सीएम त्रिवेंद्र के नेत्रेत्व मे क्योंकि सरकार उनकी है लोकसभा का चुनाव लड़ा जाना है जानकार ये भी कहते है कि एक बड़ा षड्यंत्र ये भी होगा कि इस राज्य में लोकसभा चुनाव मै अगर भाजपा का पर्दशन अगर अच्छा नही रहा तो सीएम त्रिवेंद्र को दबाव में रखा जाएगा ताकि मुख्यमंत्री बदलने की माग की रखी जा सके।
बहराल सीएम त्रिवेंद्र को सुभकामनाये । बोलता उतराखण्ड को उम्मीद है कि आप अपने खिलाफ बन रहे इस माफियाओं के गठबंधन को भेद कर आगे बढेगे।



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