दबंग ओर बेबाक़ मंत्री कड़वा मगर सच बया करने वाला मंत्री जब जब बोलते है तो सियासत का तापमान इतना गर्म हो जाता है कि सरकार भी इस बर्फ़बारी के बीच गर्मी महसूस करने लगते है ।सुनो क्या बोले मंत्री हरक सिंह रावत जी
वे बोले कि
मैंने अफसरों को कह रखा है कि छोटे कर्मचारियों के हितों में तुम्हारी कलम कांपने लगे तो पत्रावली मुझको भेज दो, मैं निर्णय लूंगा। जेल जाना होगा तो मैं जाऊंगा। मैं 28 साल मंत्री रहा। मैंने ‘आउट ऑफ द वे’ जाकर फैसले लिए। ये कहना था मंत्री हरक सिंह रावत का वे बोले मेरी नीयत साफ थी, इसलिए जेल नहीं गया। यदि हमारी नीयत में खोट है तो निश्चित रूप से हम निर्णय नहीं ले पाएंगे।’ आपको बता दे कि सोमवार को उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के द्विवार्षिक प्रांतीय अधिवेशन था जहाँ मंत्री हरक सिंह रावत संबोधित कर रहे थे। इस अधिवेशन में जुटे मिनिस्टीरियल कर्मियों के हितों की पैरवी करते हुए डॉ. रावत ने पिछले 18 साल से अब तक कि सरकार और सिस्टम पर जोरदार तंज किये।
यही नही दबंग मंत्री ये भी बोले कि कई बार सच कहना मुझे मुसीबत में डाल देता है और अखबारों को मौका मिल जाता है।’ लेकिन ये सब जानते हुए भी रावत पूरी बेबाकी के साथ बोले। उन्होंने कहा, मैं साफ कह रहा हूं, प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सरकारों के बलबूते पर परिवर्तन नहीं होगा। परिवर्तन यदि होगा तो प्रदेश के छोटे कर्मचारियों के दम पर होगा। जिम्मेदार पदों पर जो लोग हैं, उन्हें बड़ा दिल दिखाना होगा। हरक सिंह रावत के इसी अंदाज ओर बेबाक़ बयान का उतराखण्ड के वो लोग कायल है जो हरक को पसंद करते है वे जब भी बोलते है तब ही उनके शब्द मीडिया के लिए ख़बर बन जाती है।

आपको बता दे की मंत्री हरक सिंह रावत ने नौकरशाही की बढ़ती फौज पर जमकर कटाक्ष किया उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ 13 जिलाधिकारी थे। ओर दो कमिश्नर थे। वही कुछ विभागों में एक दो आईएएस अफसर हुवा करते थे। पर अब उतराखण्ड मै इनकी संख्या 100 से अधिक है पर दुःख होता है कि
आईपीएस और पीसीएस अफसरों को फौज तो बढ़ गई पर जिस फौज को जमीन पर काम करना है, वो संकुचित होती चली गई। ये प्रदेश का दुर्भाग्य है कि जिसको कलम चलानी है, उन्हें कम किया जा रहा है। हरक के कहने का मतलब था कि काम करने वाले लोगो की संख्या कम है। वही राज्य कर्मचारियों की मांगों पर सरकारी सिस्टम पर मंत्री चुटकी ले कर बोले कि जब हमें अपने हित के लिए कुछ करना हो तो सारे नियम टूट जाते हैं। तब जेल जाने की चिंता नहीं होती और छोटे कर्मचारियों को कुछ देना हो, या उनके हित में काम करना हो तो हमारी कलम डगमगाने लगती है। जेल जाने का डर सताने लगता है। कुल मिलाकर मंत्री ने कहा कि नीयत साफ होनी चाहिए। मुझे मंत्री के रूप में 28 साल हो गए, मैं आज तक जेल नहीं गया।


ओर मैं ‘आउट ऑफ द वे’ जाकर निर्णय लेता है। मैं तो अधिकारियों से कह देता हूं कि जहां तुम्हारी कलम कांपने लगे, पत्रावली मुझको भेज दो, मैं निर्णय लूंगा। जेल जाना होगा तो मैं जाऊंगा। इसलिए कि हमारी नीयत साफ है। यदि हमारी नीयत में खोट है तो निश्चित रूप से हम निर्णय नहीं ले पाएंगे। व्यक्ति न पैसे बड़ा हो सकता है न पद से बड़ा हो सकता। इंसानियत से बड़ा होता है।’ बहराल दबंग मंत्री हरक सिंह रावत जानते है कि 31जनवरी से राज्य के सरकारी कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है लिहाज़ उन्हें कैसे शांत करना है या कुछ और वो सब हरक जानते है क्योंकि ये हरक है इन्हें नही पड़ता फर्क कोई कुछ भी कहे या बोले ये तो सच बया कर ही देते है।





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