आपको बता दे कि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पिछले दिनों से भ्रष्टाचार पर त्रिवेंद्र सरकार ओर पूरे भाजपा सगठन को लगतार चुनौती दे रहे है । हरदा बोल रहे है कि मुझ पर आए दिन भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाली भाजपा मै या उनके अध्यक्ष अजय भट्ट जी और खुद मुख्यमंत्री में हिम्मत है तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज से मेरी जांच बिठवा दें।

यह मेरी चुनौती है। जिसे भाजपा भी ओर मुख्यमन्त्री भी स्वीकार करा लें । वे कहते है कि न केवल मेरी बल्कि मुख्यमंत्री रहते मेरे निर्णयों, मेरे परिवार और रिश्तेदारों की संपत्ति की भी जांच कर ली जाए। यदि मेरे मुख्यमंत्री रहते किसी से गलत फायदा उठाया है तो उसे भी सार्वजनिक किया जाए।

हरीश रावत लगातार ये बात मीडिया के सवाल के जवाब मैं बोल रहे है । उन्होंने कहा कि भाजपा अक्सर ही मुझ पर और मेरी मतलब जब मैं मुख्यमंत्री था तब की सरकार पर भ्रष्टाचार के झूठे आरोप लगाती रहती है। मैं तो चाहता हूं इसकी जांच की जाए। ओर भाजपा भी अपने सभी पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट की संपत्ति की मेरे साथ अदला-बदली कर लें। रावत ने तंज कसते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार में मेरा कमाया हुआ अरबों रुपया, इनके नाम पर हो जाएगा और ये जो बहुत गरीब हैं, इनकी संपत्ति मेरे नाम पर हो जाएगी।


हर दा कहते है कि ये भाजपा के हमारे जो दोस्त है जो विभिन्न चैनलों पर अपनी पार्टी की वकालत करने जाते हैं, अधिकांश समय मेरा श्राद्ध करने में व्यतीत करते हैं। मैं भाजपा के लोगों से कहना चाहता हूं कि यदि आपको मेरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार दिखाई देता है, उसकी जांच कराएं। किसने रोका है?
बहराल ये हरीश रावत है इनको कोई तब तक शब्दो से विस्वास से नही हरा सकता जब तक ये खुद हार ना मान ले ।अब भले ही खुद इनके ओर इनके समथर्क कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता , इनके खिलाफ षड्यंत्र कितना भी करे पर ये बन्दा जो भी हो सबको जवाब उस प्यार और धैर्य के साथ देता है कि इनके जवाब को सुनकर इनके।विरोधी अपना सर पटक पटक कर यही कहते होंगे कि अब इनके साथ क्या किया जाये! और क्या बोला जाए ये हालत कांग्रेस के उन नेताओं की है जो हर दा को अपना आज शत्रु समझते है तो फिर अगर बात भाजपा के नेताओ की करे तो उनका तो काम है ही कहना अगर वो कहेगे नही , आरोप नही लगाएंगे तो फिर हर दा की राजनीति जिंदा कैसे रहेगी ,उनके लगाए गए आरोपो से ही राजनीति के चाणक्य हरीश रावत को बल मिलता है और उनके खुद के कांग्रेसी नेताओं के विरोध से हर दा को सांस लेना वाला ऑक्सीजन । अब तय कोंन करे या क्या करे कोंन बनाये वो रणनीति जो हरीश रावत को चुप्प करा सके ।ये तो भविष्य के गर्भ में है पर देखो खेल अभी बाकी है वो भी पूरा। ईधर हर दा है उधर भगत दा ओर ये दोनों दा।सब पर भारी!



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