पहले एक नज़र डालते है ऐन मैरी स्कूल के इतिहास पर
इस स्कूल की स्थापना साल 1985 में हुई आपको बता दे कि डॉ दीपक अरोड़ा और उनकी जर्मन पत्नी श्रीमती सिल्विया अन्ना मारिया वेज्ज़ोर्क ने इस स्कूल की सुरुवात की ओर नाम रखा “ANN MARY” जो श्रीमती अरोड़ा के पहले नाम का एक हिस्सा है। मतलब अन्ना और मारिया (ऐन और मैरी) आपको बता दे कि श्रीमती अरोड़ा की दो दादी के नाम थे। इस स्कूल को शुरू होने से ठीक पहले, उसे इन दो अच्छी आत्माओं से मामूली रकम मिली और इन पैसों का इस्तेमाल स्कूल बनाने के लिए भी किया गया था उनकी दया और बच्चों के लिए एन मैरी (ए फॉर अन्ना) के आसान उच्चारण को देखते हुए स्कूल को एन मैरी नाम से बुलाने का फैसला किया। गया था


वही आपको ये भी बता दे कि डॉ। दीपक अरोड़ा का जन्म हरिद्वार, में हुआ था। ओर वे देहरादून में पले-बढ़े और साल 1966 में सेंट जोसेफ्स अकादमी में उन्होंने अपनी सीनियर कैम्ब्रिज की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और आगे की पढ़ाई के लिए हेडेलबर्ग, जर्मनी चले गए। उन्होंने जर्मनी के प्रसिद्ध और सबसे पुराने विश्वविद्यालय से शिक्षा और अंग्रेजी में परास्नातक किया। फिर साल 1983 में भारत लौटने से पहले जर्मनी के नेकरस्टाइन में हीडलबर्ग में टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज और फ्राइहर्र वोम स्टीन स्कुल को इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) के रिसर्च फेलो के रूप में पढ़ाया। उसके बाद वह 1984 में जर्मन शिक्षक के रूप में दून स्कूल में शामिल हुए, यहा एक नौकरी वह आज तक एन मैरी स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के अलावा करते हैं।


श्रीमती सिल्विया अन्ना मारिया विक्ज़ोरक का जन्म दक्षिण जर्मनी के ग्रुएनस्टेड शहर में हुआ था। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा औद्योगिक शहर लुडविगशाफेन / रीन में गेश्विस्टर शोल जिमनैजियम से पूरी की और जर्मनी के हीडलबर्ग विश्वविद्यालय से शिक्षा में मास्टर्स किया। उन्होंने भारतीय साहसिक कार्य के लिए पाल स्थापित करने के लिए इस्तीफा देने से पहले कई वर्षों तक हीडलबर्ग में एक बालवाड़ी और विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज में एक शिक्षिका के रूप में काम किया। वह एन मैरी स्कूल में शिक्षा निदेशक के पद पर हैं ।तो ये तो था वो इतिहास जिसे जानकर बताते है और सोशल मीडिया भी 

पर बड़ा दुख होता है आज जब जिस उद्देश्य के साथ इस स्कूल को आरम्भ किया गया था उस उद्देश्यों की पूर्ति करने में ये स्कूल जैसे जैसे साल आगे बढ़ते जा रहे है वैसे वैसे उन महत्वपूर्ण बातों और आर्दशों को खोता जा रहा है ।अब यहाँ जिन माता पिता के लाडले पढते है वो कहते डर डर कर अपना नाम आगे ना लेने और उनका नाम ना छाप जाए इस वजह से वे चुप रहते है ! सूत्र बोलते है कि यहा अब अभिवाको के साथ स्कूल के कर्ता धर्ता ठीक से व्यवहार नही करते। बात बात मे ओर बिन बात के अभिवाको को टार्चर किया जा रहा है।


यही नही कुछ लोगो का कहना है कि पढ़ाई तो अच्छी है इस वजह से हम लोगो कों स्कूल के कर्ता धर्ताओं की बात दबाव मै माननी पड़ती है ।तो कुछ का कहना है कि यहा बचों के एडिमशन के लिए अच्छी खासी मोटी रकम ली जा रही है! बहुत से अभिवाको का ये भी कहना है कि अब जब से ये बल्लीवाला फ्लाई ओवर बना है आये दिन यहा मौत को खुली आँखों से देखा जाता है ।अब तक इस फ्लाई ओवर से नीचे गिर कर या फिर फ्लाई ओवर मै ही लोगो की जान जाते देख डर लगता है।क्योंकि ठीक फ्लाई ओवर के नीचे ही स्कूल के सभी गेट है जहाँ से स्कूल के बच्चे रोज आते जाते है।

जिससे माता पिता को आये दिन डर बना रहता है । तो कुछ का कहना है कि उनके पास मतलब स्कूल के पास जगह बहुत है क्यो नही स्कूल वाले स्कूल के गेट का रास्ता बदल देते इसको लेकर भी आये दिन बाते अब उठ रही है। कुल मिलाकर अभिवाको को लगता है कि अब उनके ब्च्चे यहा सुरक्षित नही है भले ही पढ़ाई ठीक हो पर बचों की जान से बढ़कर कुछ नही।


वही अगर सड़क पर चलने वाली जनता की बात करे तो जनता ये कहती है कि ठीक बलिवाला चोक पर स्कूल होने से स्कूल आने ओर जाने के समय बहुत जाम लगा रहता है क्योंको स्कूल के गेट ठीक फ्लाई ओवर के नीचे वाली सड़क के नीचे है यानी नीचे वाली सड़क से लेकर ऊपर फ्लाई ओवर तक की सड़कों से ख़तरा लगातार बना रहता है ।

वही बहुत से लोग ये भी कहते है कि धीरे धीरे अभिवाको का खून चूस कर , उनकी मेहतन की गाड़ी कामाई पर डाका डालकर स्कूल की बिल्डिंग लगातार बनती जा रही है ।बढ़ती जा रही है ! तो कुछ ज़ज़र हालत में है जिनको ठीक नही कराय जा रहा है तो जो नए भवन बन रहे है वो मानकों पर खरा नही उतर रहे है क्योंकि ख़बर है कि m.d. d.a विभाग के कुछ लोगो को धन देकर मानकों को ताक पर रखकर भवन का निर्माण धड़ले से किया जा रहा है ।अब सुने ओर बोले किसे हर तरफ तो भृस्टाचार परवान पर है। । बहराल अभिवाको को डर लगता है कि यदि वे स्कूल के कर्ता धर्ता की शिकायत करते है। तो उनके बचों को फेल भी किया जा सकता है बस इस डर ओर साल निकालने की वजह से चुप है पर कुछ अभिवाक अब इस स्कूल के ख़िलाफ़ मोर्चा खोंलने की बात भी कह चुके है ।


तो वही कुछ लोगो का ये कहना है कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत इस स्कूलों में अब अपवंचित वर्ग के बच्चों को भी प्रवेश नही मिलता आपको बता दे कि
। शिक्षा के अधिकार के प्रावधानों के तहत जिन बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाया जाता है उन्हें अपवंचित श्रेणी -टू (डी)और कमजोर श्रेणी-टू (ई) में बांटा जाता है।
अपवंचित वर्ग-टू (डी)
– अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति।
– राज्य सरकार द्वारा घोषित अन्य पिछड़ा वर्ग (क्रीमीलेयर को छोड़कर)।
– अनाथ बच्चे।
– शारीरिक रूप से विकलांग बच्चे जो नि:शक्त व्यक्ति के प्रावधानों के अंतर्गत अर्ह हों।
– ऐसे बच्चे जो विधवा अथवा तलाकशुदा माता पर आश्रित हों, जिनकी वार्षिक आय 80 हजार से कम हो।
– एचआईवी पीड़ित अथवा एचआईवी पीड़ित माता-पिता के बच्चे।
– निशक्त व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार, संरक्षण और पूर्ण भागीदारी अधिनियम, 1995 (अधिनियम सं. 1 वर्ष 1996 में यथा परिभाषित विकलांग माता-पिता के बच्चे) (कोढ़ से ग्रसित व्यक्तियों सहित) जिनकी वार्षिक आय 4.5 लाख रुपये से कम हो के, बच्चों को प्रवेशित किया जाता है।

कमजोर वर्ग -टू (ई)
– बीपीएल कार्ड धारक परिवारों के बच्चे।
– 55 हजार रुपये सालाना तक आय वाले परिवारों के बच्चे।.
बहराल राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय से उम्मीद है कि शिक्षा मंत्री पांडेय जी मिल रही शिकायत पर जाँच के आदेश देंगे ।क्योकि जहा एक तरफ मासूमो की ज़िंदगी का सवाल है तो दूसरी तरफ लाखो रुपये फीस देने वाले डरे सहमे अभिवाक।

शिक्षा  मंत्री  अविन्द पांडये जी   जिस तरह से आप शिक्षा विभाग में  सुधार कर रहे है। निजी  स्कूल की मनमानीं  को खत्म किया ।आज से पहले किसी भी राज्य के शिक्षा मंत्री ने  इतना बड़ा कदम नही उठाया जितना आप ने । राज्य की जनता आपके साथ खड़ी है बस अब आप एक बार इस ऐंन मैरी स्कूल की भी  सच्चाई के साथ पड़ताल करा दे  ।जो जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।  लोग कहते है कि यहा स्कूल के कर्ता धर्ता सिर्फ अपनी चलाते है यहा तक कि सरकार और शिक्षा मंत्री को भी कुछ नही समझते! इसलिए जांच जरूरी है कि नियम के अनुसार सब ठीक है भी या  नही अगर सब ठीक है तो वो सच भी जनता के आगे आना चाइये । फिर सच जो भी हो।



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