आपको बता दे कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के डिनर से सियासी हलचल जहा तेज है वही इस डिनर पर अब सवाल भी खड़े होने लग गए है
जानकारी अनुसार शनिवार रात एक निजी होटल पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा नगर निकाय के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को डिनर पार्टी दे रहे है ख़बर ये भी है कि इस डिनर पार्टी में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत जी भी शिरकत कर सकते है। और राज्य के मंत्री भी शामिल होंगे!,

आपको बता दे कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा टिहरी के पूर्व सांसद रहे है ।ओर दो बार टिहरी लोकसभा से ही अपने पुत्र साकेत बहुगुणा को चुनाव कांग्रेस से लड़ा चुके है। अब साकेत बहुगुणा ओर पूर्व सीएम विजय बहुगुणा भाजपा के सच्चे सिपाही है नेता है और टिहरी लोकसभा से इनकी दावेदारी भी है बहुगुणा के सियासी डिनर पार्टी मे टिहरी की लोकसभा सांसद को निमंत्रण नही दिया गया है ।पर एक सवाल जो सबके जहन में कूद रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव मे टिहरी से चुनावी मैदान में खुद विजय बहुगुणा उतरना चाह रहे है !

दूसरी तरफ बात ये उठ रही है कि आपको बता दे कि आज ही वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी जी को पूरे राजकीय सम्मान के साथ ऋषिकेश के श्मशान घाट में मुखाग्नि दी गयी है जहाँ
चंबा पुलिस लाइन शायरी सलामी गारद की टुकड़ी ने शस्त्र झुका कर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। आपको बता दें कि वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने शुक्रवार को अंतिम सांस ली थी। ओर साल 1986 में राजीव गांधी ने इन्हें वृक्ष मित्र की संज्ञा दी थी।


आपको ये भी जानकारी दे दे कि वृक्ष मानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने अपने पूरे जीवन काल में 50 लाख से अधिक पौधे लगाए थे। उनके बड़े बेटे विवेक सकलानी ने उन्हें मुखाग्नि दी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, पुलिस क्षेत्राधिकारी नरेंद्र नगर जेपी जुयाल, थानाध्यक्ष मुनि की रेती आरके सकलानी सहित उनके गांव से आए विभिन्न लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। आपको बता दे कि
टिहरी के सकलाना पट्टी के पुजार गांव में जन्मे वृक्ष ऋषि विशेश्वर दत्त सकलानी का जन्म दो जून 1922 को हुआ। बचपन से ही बाप-दादा की पर्यावरण संरक्षण की कहानियां सुनकर विशेश्वर दत्त को प्रकृति प्रेम की प्रेरणा मिली।
यही कारण है कि उन्होंने आठ साल की छोटी सी उम्र से पेड़ लगाने शुरू कर दिए। उन्होंने स्वतंत्रता की लड़ाई में भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया। देश की आजादी की खातिर उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।
उनकी इसी कड़ी मेहनत के बाद सकलाना घाटी की तस्वीर बदल गई। दरअसल, छह-सात दशक पूर्व तक यह पूरा इलाका वृक्ष विहीन था। धीरे-धीरे उन्होंने बांज, बुरांश, सेमल, भीमल और देवदार के पौधे लगाना शुरू किया।
आपको बता दे कि पुजार गांव में बांज, बुरांश का मिश्रित सघन खड़ा जंगल आज भी उनके परिश्रम की कहानी को बयां कर रहा है। विशेश्वर दत्त सकलानी को 19 नवंबर 1986 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्ष मित्र पुरस्कार से भी सम्मानित किया था।
अब जहा इन महापुरुष का शनिवार को अंतिम संस्कार किया गया ऐसे मै टिहरी के ही पूर्व सांसद और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की डिनर पार्टी को किस तरह से देखा जाए?, ये सवाल खड़ा हो रहा है ।ये डिनर पार्टी केंसिल कर आगे भी आयोजित हो सकती थी।पर ये हुवा नही।अब सवाल ये भी खड़े हो रहै है कि सीएम त्रिवेंद्र के राजनीतिक विरोधियों की कमी नही क्योकि उनके खिलाफ आये दिन षड्यंत्र करने वाले षड्यन्त्र करते रहते है अब इन हालत में यदि राज्य के व्रक्ष मानव की अंतिम यात्रा उनके अंतिम संस्कार के बाद यदि सीएम त्रिवेंद्र रावत विजय बहुगुणा की डिनर पार्टी में शामिल होते है तो सीएम के राजनीतिक विरोधियों से लेकर कांग्रेस इसको भी मुदा बना लेगी बहराल ये तो सबका अपना विवेके है कि कोई इस बात को किस तरह लेता है।



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