आपको बता दे कि सामान्य वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए 124वां संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा से भी पास हो गया। लगभग आठ घंटे चली बहस के दौरान लगभग सभी विपक्षी दलों ने सरकार नीयत पर सवाल उठाते हुए तीखे सवाल भी पूछे। पर रात दस बजे हुई वोटिंग में इसके पक्ष में 165 वोट पड़े और सात लोगों ने ही विरोध किया। बिल को प्रवर समिति को भेजने के सहित विपक्ष द्वारा लाए गए सभी संशोधन प्रस्ताव खारिज हो गए। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
आपको बता दे कि इसके साथ ही राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस फैसले को ‘स्लॉग ओवर का सिक्स’ बताते हुए आज के दिन को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार चुनाव से पहले जनहित के कई और बड़े फैसले लेगी।
वही चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक से एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को मिल रहे आरक्षण पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने कहा इस ऐतिहासिक कदम से सामान्य वर्ग के गरीब लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा।
तो उधर विपक्षी दलों इसे चुनावी फायदे के लिए लाया गया विधेयक बताते हुए कहा जब नौकरियां ही नहीं तो आरक्षण का क्या फायदा। कांग्रेस सदस्य कपिल सिब्बल ने तंज कसा कि आर्थिक आधार पर पाटीदारों के लिए आरक्षण मांग रहे हार्दिक पटेल को सरकार जेल भेज देती है और खुद वही कर रही है। वहीं, भाजपा के प्रभात झा ने कहा कि कई राजनीतिक दलों ने घोषणा पत्र में कहा था कि सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देंगे। लेकिन, इसे मोदी सरकार ने पूरा किया।
वही चर्चा में भाग लेते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह आरक्षण केंद्र ही नहीं, राज्य की नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में भी लागू होगा। आरक्षण के लिए आठ लाख रुपये की आय सीमा को लेकर उठाए सवाल पर उन्होंने कहा, इस विधेयक का प्रावधान कहता है कि राज्य अपनी जरूरतों के मुताबिक मानदंड तय कर सकते हैं। उन्होंने कहा, अगर किसी राज्य को लगता है कि आरक्षण लेने वालों के लिए आय सीमा 5 लाख करनी चाहिए, तो कर सकेगा। आरक्षण के लिए आधार तय करना राज्यों का अधिकार है। वहीं, विधेयक लाने के समय पर प्रसाद ने कहा, देर आए-दुरुस्त आए। आपको बता दे कि
एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे गहलोत ने विधेयक पेश किया। आरक्षण विधेयक पर चर्चा के लिए पहले तीन घंटे का समय तय था जिसे बाद में आठ घंटे कर दिया गया। करीब 30 सदस्य चर्चा में शामिल हुए। बिल पेश होने के दौरान डीएमके सांसद कनीमोझी ने विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति को भेेजने प्रस्ताव पेश दिया, जिसका कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, राजद और आप ने भी समर्थन किया। मंगलवार को ही तीन के मुकाबले 323 वोट से पास कर दिया था। सरकार ने साफ किया है कि इसे राज्यों की मंजूरी के लिए भेजने की जरूरत नहीं है। कुछ विपक्षी दलों ने विधेयक को न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जताई। हालांकि सरकार ने दावा किया कि संविधान संशोधन होने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा।
अब विधेयक मंजूरी के लिए राष्ट्रपति को भेजा जाएगा और अनुमोदन मिलते ही संविधान संशोधन हो जाएगा। संशोधन मूल अधिकारों से जुड़े अनुच्छेद 15 और 16 में है, इसलिए अनुच्छेद 368 (2) के तहत इसे विधानसभाओं को अनुमोदन के लिए भेजने की जरूरत नहीं।
क्या तुरंत मिलेगा आरक्षण
संविधान संशोधन केवल आरक्षण की सुविधा देने का प्रावधान है। आरक्षण देने के लिए सरकार के पास दो रास्ते हैं। पहला कानून बनाकर जिसमें कि काफी समय लगेगा। दूसरा रास्ता शासकीय आदेश जारी करना है जिसके जरिये यह तुरंत हो सकता है।
क्या कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी
हां, क्योंकि इसे नवीं अनुसूची में नहीं रखा है (जैसा तमिलनाडु में है)। जानकारों के मुताबिक संविधान में आरक्षण का आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन हो सकता है आर्थिक नहीं। इंदिरा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता।
आपको ये भी बता दे कि
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाती है तो कोर्ट इस बात का परीक्षण करेगा कि यह संशोधन संविधान के मूल ढांचे से इतर तो नहीं। अगर सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि मूल ढाचेे से छेड़छाड़ है तो इसे निरस्त कर सकता है। अब तक आर्थिक आधार पर आरक्षण के जो मामले कोर्ट पहुंचे उसे इसी आधार पर निरस्त किया गया कि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं था। अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर आर्थिक हालात को आरक्षण का आधार बनाने से सुप्रीम कोर्ट के परीक्षण का आधार बदल जाएगा। आपको ये भी बता दे कि संसद के दोनों ही सदनों से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 फीसदी आरक्षण संबंधी 124वां संविधान संशोधन पास हो गया है। उच्च सदन में बिल को पेश करने वाले केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि इस बिल को लागू करने के लिए अगले कुछ दिनों में सरकार सभी औपचारिकता पूरी कर लेगी।
ये बिल पास होते ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कैबिनेट को बधाई देने के साथ ही उन्होंने राज्यसभा के सभी सांसदों को बिल का समर्थन करने के लिए धन्यवाद दिया।
इससे पहले केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि आज यह सदन एक ऐतिहासिक निर्णय लेने जा रहा है। इससे लाखों गरीब परिवारों को शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी सेवाओं में आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा। उन्होंने कहा कि जिसने जिस ढंग से सोचा उस प्रकार से विचार रखे। नरेंद्र मोदी सरकार ने अच्छे मन से सच्चे मन से सामान्य तबके के गरीबों के लिए इस बिल को सामने रखा है।
वही गहलोत ने कहा, मैं आनंद शर्मा और कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि उनके घोषणा पत्र में भी सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण की बात थी तो वह कौन सा रास्ता था जो आप अपनाते? उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस बिल को लेकर कोई सुप्रीम कोर्ट जाता है तो विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट भी इसके सांविधानिक पहलू को देखेगा।
वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति रानी ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है और हम सब देश के इस सांविधानिक इतिहास का हिस्सा बने हैं। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि गरीबों को सांविधानिक सुरक्षा देने को विपक्ष ऐसा बिल क्यों नहीं लाया

वहीं आपको बता दे कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए एनडीए सरकार द्वारा पेश किए गए विधेयक के समय पर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने राज्यसभा में सवाल उठाए हैं। उन्होंने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि वह वोट की ‘राजनीति’ कर रही है। भारी हंगामे के बीच उच्च सदन में पेश इस विधेयक को विपक्ष ने प्रवर समिति के पास भेजने की मांग की राज्यसभा में कांग्रेस का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि पार्टी बिल के समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने आर्थिक तौर से गरीबों को आरक्षण देने के लिए 2011 में आयोग बनाया। 2014 के हमारे घोषणापत्र में भी ये बात शामिल है।
आर्थिक रूप से गरीबों के साथ न्याय तभी होगा जब सरकार रोजगार के मौके उपलब्ध कराएगी। इस पर राजनीतिक मजबूरी के साथ नहीं प्रतिबद्धता के साथ काम करने की जरूरत है। आप इस बिल को इसलिए जल्दबाजी में लाए क्योंकि जल्द ही चुनाव आचार संहिता लागू होने वाली है। शर्मा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ऐसी ही जल्दी महिला आरक्षण बिल को लेकर दिखाती। मेरी मांग है राज्यसभा का सत्र एक दिन बढ़ाया जाए और महिला आरक्षण बिल पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि तीन तलाक बिल की परवाह है लेकिन सभी महिलाओं से जुड़े बिल सरकार चुप्पी साधे है।
वही आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार आरक्षण देने को तैयार है लेकिन हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा तो दूर 2018 में 1.10 करोड़ रोजगार खत्म हो गए हैं। सरकार ने जिस रफ्तार से रोजगार मुहैया कराया है उस लिहाज से आरक्षण की जद में आने वालों को रोजगार मुहैया कराने में 800 सौ साल लग जाएंगे।
इसलिए संविधान संशोधन से सामान्य वर्ग के गरीबों का पेट नहीं भरेगा उन्हें रोजगार मुहैया कराएं। सरकार चार साल सात महीने तक क्या करती रही। इसे आखिरी सत्र में लाए हैं। सच्चाई ये है मप्र, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के बाद यह बिल लाया गया है। सरकार की विदाई का समय आ गया है। देश की जनता मूर्ख नहीं है, जनता आपसे हिसाब मांग रही है, यह हिसाब देने का समय है।
आपको बता दे कि किसने क्या कहा
केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने बुधवार को चर्चा के बीच खड़े होकर कहा कि एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। अगर कोर्ट ने इसके खिलाफ फैसला दिया तो सरकार उसके लिए अध्यादेश लाने से जरा भी नहीं हिचकेगी। जिस तरह सरकार ने एससी-एसटी एक्ट को कमजोर किए जाने पर किया था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार प्रमोशन पॉलिसी को लेकर भी चिंतित है और जल्द फैसला लेगी। पासवान ने ये बात चर्चा में शामिल कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा के एससी-एसटी को प्रमोशन में आरक्षण के सवाल के जवाब पर कही। शैलजा ने पासवान की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि दस फीसदी आरक्षण के लागू हो जाने के बाद एससी-एसटी प्रमोशन में और दिक्कत खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में पहले ही खाली पदों को सामान्य वर्ग से भर दिया गया है। सरकार दस फीसदी आरक्षण तो देना चाहती है लेकिन नौकरियां ही नहीं हैं। उन्होंने निजी क्षेत्र में भी आरक्षण लागू किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी छात्रवृति में भी कटौती कर दी गई है।
सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा, मैं इस विधेयक का समर्थन करते हुए यह मांग करूंगा कि जब आपने 50 प्रतिशत का बैरियर पार कर दिया है तो ओबीसी को 27 प्रतिशत से ज्यादा 54 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए उसकी आबादी के हिसाब से। उन्होंने कहा, नौकरियों में आरक्षण अब बड़ी बात नहीं रह गई क्योंकि नौकरियां हैं ही नहीं। नोटबंदी के चलते लोगों की नौकरियां चली गईं। सरकार को निजी क्षेत्र में आरक्षण देना चाहिए, क्योंकि सरकारी क्षेत्र में ठेके पर काम हो रहा है, नौकरियां घट रही हैं। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनका लक्ष्य आर्थिक रूप से गरीब नहीं बल्कि 2019 का चुनाव है। यादव ने कहा, लगभग 97-98 प्रतिशत लोग इस विधेयक के तहत आरक्षण के दायरे में आ जाएंगे। इसका मतलब 98 फीसदी गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण और 2 प्रतिशत अमीरों को 40 प्रतिशत आरक्षण। यह कैसी समता है? उन्होंने कहा, यह बिल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है और कोर्ट इसे रोक भी सकता है।
दूसरों के घोषणापत्र का भी सम्मान किया: झा
भाजपा सांसद प्रभात झा ने कहा, 2014 में जब प्रधानमंत्री संसद में आए तो अपना माथा इसकी सीढ़ियों पर झुकाया था। सेंट्रल हॉल में दिए पहले भाषण में उन्होंने कहा था, सरकार गरीबों के लिए काम करेगी। सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का लंबे वक्त से इंतजार था। प्रधानमंत्री मोदी ने यह कर दिखाया। जब विधेयक आया तो सब अवाक रह गए। कई दलों के घोषणापत्र में इस बिल की बात थी। मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने ही नहीं, सभी के घोषणापत्र की कद्र करते हुए यह कदम उठाया। सदन का एक-एक व्यक्ति चाहता है बिल पास हो। लोकसभा में केवल तीन लोगों ने इसका विरोध किया। ऐसी ही प्रतिक्रिया इस सदन से भी दिखनी चाहिए।
कपिल सिब्बल ने कहा आप संविधान का ढांचा बदलने जा रहे हैं और आप यह भी नहीं चाहते कि विधेयक प्रवर समिति में चर्चा के लिए जाए। आप यह नहीं चाहते कि सबकी रायशुमारी के बाद यह पास हो। 5 साल थे आपके पास, पहले ले आते और ये विधेयक प्रवर समिति के पास जाता और सबकी सहमति से पारित हो जाता। सिब्बल ने जानना चाहा कि सरकार ने विधेयक को पास कराने से पहले आर्थिक रूप से कमजोर तबके क्या कोई जानसांख्यिकीय आंकड़ा इकट्ठा किया है। कहां ओबीसी ज्यादा हैं, कहां दलित ज्यादा हैं। उन राज्यों में क्या होगा जहां दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग बहुुसंख्यक हैं। सिब्बल ने इस विधेयक को नोटबंदी जैसा बतातेे हुए कहा कि कमाल का अमला एक और जुमला। इसके साथ ही इस विधेयक पर राय देने वाले कानूनविद का नाम भी उजागर करने की मांग की।
तृणमूल सदस्य डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि सरकार ने पिछले साढ़े चार साल में रोजगार के अवसर पैदा करने में विफल रही। यह आरक्षण विधेयक और कुछ नहीं इस बात की स्वीकारोक्ति है। सरकार जिस तरह से संसद का अपमान कर रही है उससे उनकी पार्टी आक्रोशित और नाराज है।

केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण केंद्र और राज्य सरकार की नौकरी में लागू होगा। उन्होंने कहा कि विधेयक राज्य सरकार को आर्थिक आधार पर लाभार्थी परिभाषित करने का अधिकार देगा। राज्य सरकारें अपने हिसाब से इसके मानक तय कर सकती हैं। एससी/एसटी और ओबीसी को दिए जा रहे आरक्षण को छेड़ा नहीं जाएगा। सवर्णों को दिए जाने वाला 10 फीसदी का आरक्षण इससे अलग होगा ।

पहाड़ पुत्र राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि ये मेरा सौभाग्य है कि मैं राज्यसभा सदस्य के नाते आज इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना। आज सवर्ण आरक्षण बिल के पक्ष में मतदान करने का मुझे सौभाग्य मिला। यह बिल निःसंदेह सवर्ण समाज के गरीब, वंचित और मुख्यधारा से बिछड़े लोगों को सशक्त करेगा।
आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार का यह दूरगामी निर्णय ‘सबका साथ सबका विकास’ के सूत्रवाक्य को और समरसता प्रदान करता है। आरक्षण के पूर्व के ढांचे को छेड़े बिना केंद्र सरकार द्वारा गरीब सवर्णो के हित मे लिया गया यह निर्णय सम्पूर्ण राष्ट्र को मजबूती देगा।
मुझे इस ऐतिहासिक अवसर का अंग बनने पर मेरे भीतर यह भाव और मजबूत हुआ है कि सरकार निःसंदेह समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवनस्तर को मुख्यधारा से जोड़ने और समानता लाने हेतु संकल्पित है। इस निर्णय से मेरे प्रान्त उत्तराखंड को भी बहुत लाभ होगा, मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक निर्णय ने बिना किसी के हक को प्रभावित किये निर्धन सवर्ण को बड़ा अवसर दिया है।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का आरक्षण बिल पास होने पर ट्वीट आया है
राज्यसभा में विधेयक के पास होने से प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी की ऐतिहासिक पहल को अब क़ानूनी स्वरूप मिलने से आर्थिक रूप से कमज़ोर सामान्य वर्ग को भी आरक्षण की सुविधा का मार्ग प्रशस्त हो गया है- प्रधानमंत्री जी की NDA सरकार को इस नए अध्याय की शुरुआत के लिए हृदय से धन्यवाद।।



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