भारत माता की रक्षा के लिए देवभूमि का लाल शहीद हो गया हम भाव भीनी श्रदांजलि देते है शहीद वीर जवान को पर उस माँ पर क्या गुजर रही होगी जो अपने बेटे के फोन का इंतज़ार कर रही थी के बेटा नए साल की बधाई देगा उस बूढ़ी मां को पता ही नहीं था कि उनका लाल उनकी आंखों का तारा उनका बेटा देश के लिए शहीद हो गया। वो माँ तो नए साल पर अपने बेटे के फोन का इंतजार करती रहीं।

की मेरा लाल पूरे परिवार को साल 2019 के आगज की सुभकामानये देगा आपको बता दे कि शुक्रवार को जब बेटे का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो एक मां की आंखों से आंसू नहीं रुके उन्हें यकीन ही नही हुवा की उनकी आंखों का तारा देश के लिए शहीद हो गया आपको बता दू की नागालैंड में शहीद हुए 24 आसाम राइफल के जवान गोपाल सिंह माहरा का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उनके पैतृक गांव जजौली लाया गया। जहा रामेश्वर घाट में सैन्य सम्मान के साथ शहीद जवान का अंतिम संस्कार किया गया।

तो वही उनकी वृद्ध मां कौशल्या देवी को उनके बेटे के शहीद होने की जानकारी नहीं दी गई थी। क्योंकि माँ तो माँ होती है ना जितना दर्द एक माँ सहती है उतना कोई भी नही। एक माँ को जैसे ही यह बुरी ओर दुखद सूचना मिली वह सुध-बुध खो बैंठीं। इसके बाद वो माँ रोती रही, रोती रही,ओर उनके रोने की दहाड़ सुनकर सबकी आंखे नम हो गई । आपको बता दू की शहीद के दो छोटे भाईयों की पत्नियां बीना माहरा, सीमा मेहरा और चाची मधुली देवी भी बेहोश हो गई।


जानकारी दे रहा हूँ कि शहीद गोपाल सिंह की दो बेटियां और एक बेटा है। उनकी छोटी बेटी हिमानी को नये साल पर अपने पिता को विश नहीं कर पाने का मलाल है ओर अपने पिता को खोने का जो दर्द है वो अल्फाज़ो मैं बया नही हो सकता बेटी हिमानी ने बताया कि 31 दिसंबर को उसकी अपने पापा से बात हुई थी। दादी और उन्होंने नये साल पर पहली जनवरी को फोन कर शुभकामनाएं देने का वादा किया था, जो पूरा ना हो सका
ओर फिर उसके अगले ही दिन उसे पता चला कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं रहे। हिमानी के अनुसार वह अपने पापा को विश नहीं कर पाई, इसका उसे हमेशा मलाल रहेगा। ओर पापा से वो कभी नही मिल पायेगी इसका ज़िंदगी भर दर्द , आपको बता दे कि शहीद गोपाल सिंह चार भाइयों में दूसरे नंबर के थे। उनसे बड़े भाई निर्मल सिंह 33 असम राइफल में नगालैंड में तैनात हैं। तो वही तीसरे नंबर के ठाकुर सिंह पुंछ में तैनात हैं।

उनके शनिवार तक गांव पहुंचने की संभावना है। सबसे छोटे भाई रिपुसूदन सिंह माहरा गांव में ही अपना व्यवसाय चलाते हैं। शहीद के पिता स्व. त्रिलोक सिंह भी सेना में तैनात थे। सैकड़ों क्षेत्रवासियों ने शहीद गोपाल सिंह को श्रद्धांजलि दी ओर सबने इस परिवार की सहराना करते हुए कहा कि ये पूरा परिवार देश के लिए समपित है इस परिवार के हर सदस्य को सलाम ओर हम उनके हर दुख में सदैव खड़े रहेंगे।



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