आपको बता दे कि आगमी दिनों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए भले ही अभी वक्त बाकी हो लेकिन 5 सीटों वाले उत्तराखंड में हर सीट पर सियासी महाभारत देखने को मिल रहा है । इन सब में सबसे ज्यादा नूरा कुश्ती नैनीताल लोकसभा सीट पर देखने को मिल रही है ।

नैनीताल सीट पर सत्ताधारी दल भाजपा हो या विपक्षी दल कांग्रेस हर रोज नए दावेदार सामने आ रहे हैं। नए दावेदारों के ताल ठोकने से सियासी माहौल रोचक बनने लगा है। कोई जातिगत समीकरण की दुहाई दे रहा है तो कोई मजबूत वोट बैंक की बात कर रहा है। किसी को आलाकमान तो भरोसा है तो किसी को प्रदेश के नेताओं की पैरवी पर भरोसा है। इनी उठापटक की स्थितियों के बीच त्रिवेंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने भी नैनीताल लोकसभा सीट से दावेदारी जता दी है मीडिया के सवालों पर आर्य ने कहा कि अगर आलाकमान मौका देगा तो वह नैनीताल से लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं

साथ ही उन्होंने यह भी कहा यह तभी संभव होगा जब भगत सिंह कोश्यारी चुनाव नहीं लड़ते। मीडिया के सवाल पर यशपाल आर्य ने कहा अल्मोड़ा से ज्यादा वह नैनीताल से चुनाव लड़ने के इच्छुक है। आर्य ने कहा यदि भगत सिंह कोशियारी नही लड़ते है चुनाव तो मैं लड़ूंगा नैनीताल से लोकसभा चुनाव। हर वर्ग का मिलेगा सहयोग। नैनीताल सीट की हर विधान सभा मे किया है काम। आर्य ने कहा वह भाजपा छोड़कर अब किसी भी पार्टी में नहीं जायेंगे।

अगर देखा जाए तो नैनीताल लोक सभा सीट आजादी के बाद से ही मुख्य सीट में शुमार रही है। कई बार यहां नए प्रत्याशियों ने भी जीत दर्ज की तो कई बार दिग्गजों को मुंह की खानी पड़ी। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की कर्मस्थली होने के कारण आजादी से लगभग तीन दशक तक सीट उनके परिवार को झोली में रही।ववर्ष 1947 में देश की आजादी के बाद 1951 एवं 1957 में लगातार दो बार पंत के दामाद सीडी पंत ने नैनीताल सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद से 1962 से 67 एवं 71 में श्री पंत के पुत्र केसी पंत ने इस सीट को हैट्रिक बनाते हुए कांग्रेस की झोली में डाला था। 1977 में भारतीय लोक दल के भारत भूषण ने जीत दर्ज कर पंत परिवार के विजय रथ को रोका था। इसके बाद से इस रथ पर सवार हुए पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी। उन्होंने 1980 में भालोद के भारत भूषण को पराजित किया था। 1984 में तिवारी के करीबी सत्येंद्र गुड़िया ने जीत दर्ज की। 1989 में जनता दल के डा.महेंद्र पाल ने नैनीताल सीट जीती। वर्ष 1991 में कांग्रेस में पीएम पद के दावेदार रहे पंडित तिवारी को इस सीट से हार का मुंह देखना पड़ा था। राम लहर के चलते उन्हें भाजपा के बलराज पासी ने शिकस्त दी थी, लेकिन 1998 में भाजपा की इला पंत ने बिना किसी लहर के अपनी पारिवारिक सीट पर एनडी तिवारी को शिकस्त देकर कब्जा किया।
2002 से 2014 तक तीन बार हुए चुनाव में सीट पर कांग्रेस ने विजयश्री प्राप्त की, जिसमें एक बार डा.महेंद्र पाल एवं दो बार केसी सिंह बाबा विजयी हुए। उसके बाद 2014 में भाजपा से भगत सिंह कोश्यारी नैनीताल सीट से भारी मतों से विजई हुए। वर्तमान में नैनीताल सीट में यूएस नगर की 9 एवं नैनीताल जिले की 5 विस शामिल हैं।

नैनीताल सीट पर आजादी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में
-1951 सीडी पांडे (कांग्रेस), 1957 सीडी पांडे (कांग्रेस), 1962 केसी पंत (कांग्रेस), 1967 केसी पंत (कांग्रेस), 1971 केसी पंत (कांग्रेस जे), 1977 भारत भूषण (भालोद), 1980 एनडी तिवारी (कांग्रेस), 1984 सत्येंद्र गुड़िया (कांग्रेस), 1989 डा.महेंद्र पाल (जनता दल), 1991 बलराज पासी (भाजपा), 1996 एडी तिवारी (कांग्रेस), 1998 इला पंत (भाजपा), 1999 एनडी तिवारी (कांग्रेस), उप चुनाव 2002 डा.महेंद्र पाल (कांग्रेस), 2004 केसी बाबा (कांग्रेस), 2009 केसी बाबा (कांग्रेस)
2014 भगत सिंह कोश्यारी (बीजेपी)

अब देखना होगा भगत सिंह कोश्यारी की ना नुकुर के बाद कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की दावेदारी को भाजपा आलाकमान किस तरह से देखता है क्योंकि भाजपा में नैनीताल सीट को लेकर एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति हो रखी है। बहराल अब देखना ये होगा कि नैनीताल लोकसभा सीट से काँग्रेस से क्या हरिश रावत मैदान मे उतरते है या कोई और ।



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