आपको बता दे कि उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच से जुड़े गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लगभग सवा लाख कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से कार्यबहिष्कार किया है। आपको बता दे कि इस हड़ताल के चलते कही विभागों में कोई भी काम नहीं हुवा । ओर इस हड़ताल से आज आम जनमानस परेशान रहा । आपको बता दे कि हड़ताली कर्मचारी ने अपने-अपने जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन भी किया इसके साथ ही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत को ज्ञापन भेजा गया।


जानकारी है कि अटल आयुष्मान योजना के तहत जारी यू-हेल्थ कार्ड में कर्मचारियों का पैसा काटने के बाद दून अस्पताल की शर्त का मंच विरोध कर रहा है। इस संबंध में जारी हुए शासनादेश में संशोधन की मांग समेत अन्य मांगों को लेकर अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच आंदोलनरत है।


आपको बता दे कि इनकी मांग है कि अटल आयुष्मान योजना के शासनादेश को संशोधित किया जाए। केंद्र के समान समस्त कार्मिकों को भत्ते दिए जाएं। सातवें वेतन आयोग के तहत प्रमोशन और वेतनमान की समस्या निस्तारित की जाए।
पुरानी पेंशन व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए।
सेवानिवृत्ति के समय गृह जनपद में तैनाती दी जाए।
अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की व्यवस्था यथावत रखी जाए।
वेतन विसंगति समिति की कर्मचारी विरोधी निर्णयों को लागू न किया जाए।


वही आज इनके काम पर ना जाने से लगभग 60 विभागों में हड़ताल का असर साफ तौर पर देखा गया आपको बता दे कि उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी समन्वय मंच की हड़ताल में इंजीनियरों, परिवहन महासंघ और मिनिस्ट्रिीयल कर्मियों की संख्या ज्यादा होने से विभागों में जरूरी कामकाज ठप रहा । इससे जनता को मुश्किलें उठानी पढ़ी वही खासकर आरटीओ में मिनिस्टीरियल कर्मियों की हड़ताल से आम लोगों को ज्यादा परेशानी हुई ।


आपको ये भी बता दे कि उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच से आठ राजकीय मान्यता प्राप्त संगठन जुड़े हैं। जिनमे डिप्लोमा इंजीनियरिंग महासंघ, राजकीय वाहन चालक महासंघ, मिनिस्टीरियल फेडरेशन, सिंचाई विभाग कर्मचारी संघ, डिप्लोमा फार्मेसिस्ट, राजकीय वाहन चालक संघ, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग महासंघ, उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन, वैयक्तिक अधिकारी महासंघ शामिल हैं। नए साल के दूसरे दिन लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग में इंजीनियर, मिनिस्ट्रीयल, चालक, कृषि, एजुकेशन मिनिस्टीरियल, फार्मेसिस्ट, परिवहन, आरटीओ, फॉरेस्ट, आदि विभागों में काम ज्यादा प्रभावित हुवा। बहराल अगर जल्स इनकी मागो पर कोई आदेश नही निकलता या कोई बात नही बनती तो ये तय है कि आगमी दिनों मे इन कर्मचारियों के आंदोलन से जहा जनता को परेशानियों से जूझना पड़ेगा वही सरकार के लिए भी लोकसभा चुनाव से पहले इतनी बड़ी सख्या मे नाराज़ कर्मचारियों को मनाना एक चुनौती से कम नही



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