उत्तराखंड के पौड़ी जिले में जिंदा जलाई गई छात्रा सात दिन तक जूझने के बाद जिंदगी की जंग हार गई। छात्रा ने सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान रविवार को दम तोड़ दिया। मृतक के मौसा ने बताया कि उनकी मौत करीब 11 बजे हुई। दुःखद
आपको बता दें कि गत रविवार को छात्रा परीक्षा देकर लौट रही थी, उसी समय रास्ते में गहड़ गांव का मनोज सिंह उर्फ बंटी उसका पीछा करने लगा। कुछ देर बाद एक सुनसान जगह कच्चे रास्ते पर उसने छात्रा को जबरन रोककर उससे जबरदस्ती करनी शुरू कर दी। 

छात्रा के विरोध करने पर आरोपी ने उसके ऊपर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और मौके से फरार हो गया। कुछ देर बाद मौके से गुजर रहे एक ग्रामीण ने छात्रा को जली हुई हालत में रास्ते में पड़ा देखा तो इसकी सूचना पुलिस को दी।
जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और 108 एंबुलेंस की मदद से छात्रा को जिला अस्पताल पौड़ी लाई। यहां डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद छात्रा को मेडिकल कॉलेज श्रीनगर रेफर कर दिया।
इसके बाद छात्रा को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया लेकिन सुधार न होने पर उसे दिल्ली सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था। जहां आज छात्रा ने दम तोड़ दिया।


वही पौड़ी हादसे की पीड़िता की मृत्यु पर सीएम रावत बेहद दुःखी है। सीएम त्रिवेन्द्र ने कहा कि लाख कोशिशों के बावजूद भी पीड़ित छात्रा को न बचाने का मलाल रहेगा वही देहरादून प्रदेश में महिलाओं के साथ बढ़ी छेड़छाड़ की घटनाओं पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत सख़्त हो गए है। सीएम ने पुलिस अधिकारियों को कड़े निर्देश दिये और कहा कि अब मनचलो का हो सही से इलाज महिलाओं से छेड़छाड़ नहीं होगी बर्दाश्त।


बहराल जिस तरह से पौड़ी गढ़वाल की लड़की के साथ जो दुःखद अपराध हुवा उससे सीएम त्रिवेंद्र रावत बेहद दुःखी है।
पूरा उत्तराखंड दुःख के साये में है देवभूमि मे पहाड़ की बेटी को युवक ने जिंदा पेट्रोल छिड़कर जला डाला था
जब सीएम त्रिवेंद्र रावत ने पीड़ता की तबियत ओर हाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे तो वो पल हर किसी को रुला देने वाले थे जब एक पीड़िता की मां अपने आंसू रोक नहीं पा रही थी । वो लगातार रो रही थी और मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र को सामने देखते ही पीड़िता की मां उस समय अपनी हिमत खो बैठी थी ओर रविवार से दिल मे दबाये दर्द को आंखों से आँसू निकालकर बया कर डाला । एक माँ रो रही थी । ओर उनके
आसुओं के सैलाब ने कहा था कि सीएम साहब मेरी बेटी को बचा लीजिये।
वो दुखद पल थे जब सीएम त्रिवेंद्र की आंखे भी नम हो गई थी पर जैसे तैसे मुख्यमंत्री ने पीड़िता की मां को ढांढस बंधाया था और समस्त इलाज का खर्चा राज्य सरकार के उठाने की जानकारी दी थी सीएम ने कहा था कि धीरज रखो , पूरी ताकत लगा देंगे बिटिया को बचाने में। ओर सरकार चाहेगी कि उसे सख्त से सख्त सजा मिले। जिसके बाद
सीएम ने पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए उसे एम्स ऋषिकेश से दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया था ।
आपको तो मालूम ही है कि एक तरफा प्यार में पागल ओर हैवान बना युवक बेहद निर्दयी था ओर उस सरफिरे कि बातें सुनाते समय आग में झुलसी युवती की मां की आंखे भर आईं थी । पीड़िता की मां ने खुलासा किया था कि उनकी बेटी को आग के हवाले करने के बाद खुद आरोपी मनोज सिंह ने उन्हें फोन करके बताया और फोन पर यह भी कहा कि मैंने तुम्हारी बेटी को आग लगा दी है, अब तुम बचा सकते हो, तो बचा लो।
पीडिता की माँ ने बताया था कि आरोपी मनोज सिंह उर्फ बंटी ने दो साल पूर्व में उनकी बेटी के साथ बदसलूकी की थी। इस पर उनकी बेटी ने आरोपी मनोज को सबके सामने फटकार लगाई थी। इसी बात का बदला लेने को आरोपी मनोज ने रविवार को इस घटना को अंजाम दिया।
युवती की मां ने राज्य सरकार से मांग की है कि आरोपी को फांसी की सजा दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना राज्य में दोबारा से न घटित हो, इसके लिए राज्य सरकार आरोपी को या तो फांसी की सजा दें या फिर आरोपी को जनता के हवाले करें।
वही इससे पहले महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य भी सोमवार को युवती का हालचाल जानने के लिए एम्स पहुंची थी । ओर उन्होंने युवती के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए चिकित्सकों को उपचार में कोई की कमी न करने को भी कहा था राज्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार छात्रा व उसके परिजनों के साथ है। छात्रा के परिजनों को हर प्रकार से मदद की जाएगी।

मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान पौड़ी की छात्रा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है। इस प्रकार की घटना को दुःखद बताते हुए मुख्यमंत्री

ने कहा  कि इस प्रकार की घटनाओं में सलिप्ंत अपराधियों के विरूद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस बच्ची को बचाने का भरसक प्रयास किया गया। डॉक्टर्स के परामर्श पर बेहतर सुविधा देने के लिए सफदरजंग अस्पताल भेजा गया।
दुर्भाग्य से तमाम प्रयासों के बाद उस बच्ची को नहीं बचाया जा सका।
ये हमारे लिए बहुत ही दुखद है।
महिलाओं के उत्पीड़न के मामलों पर सरकार सख्त है।
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए उन्हें कठोरतम सजा दिलाना सुनिश्चित किया जाए।



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