देहरादून से इस समय बड़ी खबर है आपको बता दे कि भ्रष्टाचार में संलिप्तता पर लगभग 58 अधिकारी और कर्मचारी सतर्कता विभाग के राडार पर आ चुके है । आपको बता दे कि सबसे अधिक संख्या निर्माण से जुड़े विभागों के अफसरों की है। ओर दूसरे नंबर पर जन सुविधाओं से जुड़े विभागों के अधिकारी हैं। मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद विजेल्स कुछ बड़े भ्रष्टाचारियों पर साल के अंत तक कार्रवाई की तैयारी में जुट चुकी है।
देवभूमि उत्तराखंड में अब तक 18 साल के अंदर भ्रष्टाचार में संलिप्त 216 अधिकारी और कर्मचारी गिरफ्त में आ चुके हैं। ऑफ इनमें से लगभग 55 राजपत्रित अधिकारी भी शामिल हैं। आपको बता दे कि हर साल भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई में इजाफा हो रहा है। यही कारण है कि इस साल विजिलेंस विभाग में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आई शिकायतों में से शासन ने 160 पर खुली और 21 पर गोपनीय जांच बिठाई है। सतर्कता विभाग के सूत्रों बोलते है कि इस साल दर्ज हुई खुली जांच की 110 शिकायतों का निस्तारण किया जा चुका है। शेष 50 पर जांच जारी है। मृत्युंजय मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई के बाद यह संख्या अब 49 रह गई है।
इसी तरह गोपनीय जांच में भी सतर्कता ने 21 में से 13 का जांच के बाद निस्तारण कर दिया है। अभी आठ मामलों में जांच जारी है। इनमें अधिकांश मामले राजपत्रित अधिकारियों से जुड़े हैं।
आपको बता दे विजिलेस ने इस साल 11 माह में 11 भ्रष्टाचारियों को गिरफ्तार किया है और अधिक भ्रष्टाचार के मामले हरिद्वार और हल्द्वानी क्षेत्र से पकड़े गए। साथ ही ये भी बता दे कि भ्रष्टाचार के कारण हर माह एक के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई हुई है।
वही सूत्र बोल रहे है कि सतर्कता राज्य सरकार के ऐसे कर्मचारी और अधिकारियों पर नजर रखे हुए है, जो वर्षों से एक ही जनपद, ब्लाक में तैनात हैं। इनके बैंक खातों से लेकर शौक-मौज पर भी विजिलेंस की नजरें हैं। साथ ही इनके आय के स्रोत और खर्चों की जानकारी विजिलेंस हर माह जुटाती है। ताकि मौका पाते ही इनके खिलाफ कार्रवाई हो सके।
बहराल त्रिवेन्द्र सरकार जीरो टालरेश की नीति से काम कर रही है जिसका रिजल्ट देखने को भी मिल रहा है। और जीरो टालरेश का खोफ भी अब अधिकारी कर्मचारी मै देखा जाता है जिसके लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की तारीफ यहा पर बनती है ।



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