*एक्सक्लूसिव :- सदन में भाजपा के 57 पर भारी कांग्रेस के 9, जानिए कैसे?*

देहरादून । 57 विधायकों वाली भाजपा सरकार सदन के भीतर आइ अल्पमत में। सदन के भीतर विधानसभा अध्यक्ष को अजीबोग़रीब स्थिति का सामना करना पड़ा है। उत्तराखंड ( उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959 ) ( संशोधन ) विधेयक 2019 को पुर: स्थापित करने के वक़्त सदन में सत्ता पक्ष के केवल नौ ही विधायक मौजूद थे। वहीं विपक्ष के 11 विधायक बैठे रहे। दूसरी तरफ़ अध्यक्ष की तरफ़ से विधेयक पारित कराने के लिए विधायकों के हाँ की संख्या पर स्थिति अजीब बनी। जब विपक्ष ने ही सत्ता पक्ष के विधायकों की संख्या पर सवाल खड़ा कर दिया। हालाँकि बाद में सदन के भीतर सत्ता पक्ष के विधायकों के पहुँच जाने के बाद विधेयक को पारित माना गया है। जिसको लेकर उप नेता विपक्ष करण महरा ने भी आपत्ति दर्ज की है।

कृषि के सवाल पर फंसे सुबोध
उत्तराखंड बजट सत्र का आज का दिन काफी हंगामेदार रहा । सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रशनकाल में निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार का पहला सवाल न्यू इंण्डिया मन्थन-संकल्पसे सिद्वि तक सरकार की कौन-कौन सी प्राथमिकतायें है। साथ ही उत्तराखंड में पिछले 2 सालों में कृषि और औधानिकी में क्या-क्या कार्य हुए। कृर्षि मंत्री सुबोध उनियाल ने दोनों सवाल के लिखित के साथ ही सदन में भी जवाब दिये। लेकिन कृषि मंत्री के जवाबों से विधायक प्रीतम सिंह पंवार सतुष्ट नजर नहीं आये। जिसके बाद कृषि मंत्री द्वारा जल्द ही विधायक को आकड़े उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया। निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने कहा कि सदन में मंत्री तैयारी करके नहीं आते जिससे सवाल का सही जवाब नहीं मिल पाता।

मदन कौशिक की घेराबंदी भी कामयाब

उत्तराखंड के बजट सत्र में झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल के सवाल कि स्थानीय विकास प्राधिकरणों को समाप्त कर दिया जाये और उसके स्थान पर जिला स्तरीय विकास प्राधिकराणों का गठन किया जाये। विधायक के इस सवाल पर सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के सभी विधायक भी समर्थन में उठ खड़े हुए। आवास विकास मंत्री मदन कौशिक के जवाब से अंसतुष्ट सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायको ने मंत्री को सदन में घेरा। सभी विधायकों ने एक सुर में मांग थी कि ग्रामीण क्षेत्रों को प्रधिकरण को बाहर किया जाए। प्राधिकरणों के बेवजह के नियमों की वजह से ग्रामीण लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष से इस पर एक समिति के गठन की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों की मांग पर एक समिति के गठन की मंजूरी दी।
वहीं आवास-विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा की सभी विधायकों की चिंता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा सदस्यों की एक समिति बनाने को कहा गया है। मदन कौशिक ने कहा कि ये समिति प्राधिकरणों की जांच करके सदन को रिपोर्ट देगी।

रेखा आर के सामने बौने साबित हुए कर्णवाल

बजट सत्र में झबरेड़ा से भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने उत्तराखंड में नारी निकेतन और सुधार गृहों की स्थिति और उसमें रहने वाली संवासिनियों को लेकर सवाल किया। इसके साथ ही संवासिनियों पर किये जाने वाले खर्च के साथ ही इन्हें केवल दो गृहों तक ही सीमित रखने की मांग की। जिसके जवाब में महिला कल्याण मंत्री रेखा आर्य ने बताया कि प्रदेश के चार जनपद नैनीताल, देहरादून, अल्मोडा, पिथौरागढ, और पौड़ी गढवाल में राजकीय नारी निकेतन केन्द्र और सुधार गृह हैं। महिला कल्याण मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संवासिनियों पर नियमानुसार खर्च कर रही है। और सुधार गृहों को दो मंडलों तक सीमित करने का सवाल ही नहीं उठता।

सफाई पर एकजुट नजर आए विधायक

सदन में भाजपा के टिहरी से विधायक धन सिंह नेगी ने सरकार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन के तहत नगर क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण की समस्या के स्थाई समाधान और नगर पालिका क्षेत्रों में अब तक ट्रेचिंग ग्रांउड न होने का सवाल उठाया। विधायक के इस सवाल को सत्ता पक्ष के साथ ही विपक्ष के सभी विधायकों का भी समर्थन मिला। ट्रेचिंग ग्राउंड को लेकर सवाल उठाया गया और विधायकों ने मांग की प्रत्येक नगर पालिका क्षेत्र में एक एक ट्रेचिंग ग्राउंड खोलने जाये। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 2 साल में सरकार कूड़ा निस्तारण और ट्रेचिंग ग्रांउड की समस्या का समाधान नहीं तलाश पाई है। इस पर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि टिहरी विधानसभा के लिए डीपीआर तैयार शासन स्तर में फाइल चल रही है। और स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों की स्वच्छता पर सरकार का पूरा फोकस है। मदन कौशिक ने कहा कि प्रदेश के 51 निकायो में सफाई की व्यवस्था, 24 में जल्द शुरू होगी। सभी जिला अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए है। मदन कौशिक ने कहा कि भूमि की उपलब्धता के चलते ये मामला अटका हुआ है।

सदन में गूंजा वन क्षेत्र में सड़कों का मामला

टिहरी जनपद की धनौल्टी विधानसभा से निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह ने तारांकित प्रश्न के तहत राज्य में वन विभाग के परम्परागत वन मार्ग और सड़को की कुल संख्या और वर्तमान स्थिति और कितने मार्ग बंद पड़े हैं को लेकर वन मंत्री से सवाल पूछा। जिसके जवाब मे संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि राज्य में कुल 2583 दो हजार पांच सौ तिरासी वन मार्ग हैं। जिनमें से वर्तमान में 72 वन मार्ग बंद पडे हैं। जिन्हें जल्द ही सुचारू कर दिया जायेगा। विधायक ने अपने विधानसभा के वन क्षेत्र की सड़को से जुड़ा सवाल भी उठाया, जिसके जवाब से वह संतुष्ट नजर नहीं आये।

कश्मीरी छात्राओं पर आमने सामने सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री

पीडीपी नेताओ द्वारा कश्मीरी छात्रों को देहरादून से ले जाने के मामले पर सियासत गर्माई हुई है। भाजपा विधायक सहित कैबिनेट मंत्रियों के इस पूरे मामले पर अलग-अलग बयान समाने आ रहे हैं। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस पूरे मामले में बड़ा बयान दिया है। महाराज का कहना है कि पीडीपी नेता का कश्मीरी छात्रों को ले जाना गलत। पीडीपी नेता छात्रों के परिजन नहीं है। पुलिस को मामले में पीडीपी नेताओ पर एफआईआर दर्ज करनी चाइए। दूसरी तरफ पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के बयान से शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का बयान जुदा नजर आया। मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि प्रदेश में रहना यहाँ से जाना छात्रों की अपनी इच्छा, सरकार का इसमें कोई हस्तछेप नहीं है। वहीं नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हिरदेश ने कहा कि छात्रों का किसी भी प्रकार से उत्पीड़न नहीं होना चाहिए।

यात्री विमानों की खस्ता हालत पर घिरी सरकार

सदन में धारचूला से कांग्रेस विधायक हरीश धामी ने नियम 58 के तहत एयर हैरिटेज और यात्री विमाने की खस्ताहालत का मुद्दा उठाया। साथ ही 9 फरबरी को पंतनगर एयरपोर्ट से नैनी सैनी एयरपोर्ट पिथौरागढ के लिये प्रस्थान करने वाले विमान का हवा में दरवाजे खुलने से हुई एमरजेंसी लैंडिग को लेकर भी सवाल पूछा और इसे यात्रियों की सुरक्षा में गंभीर चूक बताया। जिसकी उचित जांच की मांग की। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की विस्तार से जांच की जा रही है।

विपक्ष ने उठाया विशेषाधिकार हनन का मुद्दा

सदन में विशेषा अधिकार हनन का मुद्दा भी खूब गूंजा, कांग्रेस के विधायकों ने सदन में विशेषाधिकार हनन का मुद्दा उठाया और सरकार पर समय-समय पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया। उपनेता करन मेहरा ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों की समय-समय पर उपेक्षा की जा रही है। जिसको लेकर सरकार को कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन कोई कार्रवाई अभी इस पर नहीं हुई। वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि विपक्ष के सभी विधायकों को उचित सम्मान दिया जाता है। विशेषाधिकार हनन का मुद्दा नहीं बनता।



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