बीजेपी के गामा पर भारी पड़ेगी रजनी ! बल तुम भी पहाड़ी हम भी पहाड़ी !

 

आम आदमी पार्टी का दामन थामते ही पूर्व दायित्वधारी रजनी रावत ने भाजपा और कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आप के संस्थापक सदस्य अरविंद केजरीवाल ने उनके हाथ में झाड़ू पकड़ाकर देहरादून नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार की सफाई का जिम्मा उन्हें सौंपा है।  
जानकार कहते है कि रजनी बिगाड़ सकती हैं कांग्रेस-भाजपा का समीकरण
आपको बता दे कि रजनी रावत के लगातार तीसरी बार महापौर पद पर दावेदारी से भाजपा और कांग्रेस के समीकरण बिगड़ सकते हैं। वर्ष 2008 व 2013 के नगर निगम चुनावों में रजनी रावत अपनी दमदार उपस्थिति से दोनों पार्टियों को कड़ी टक्कर दे चुकी हैं। वर्ष 2008 के नगर निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे विनोद चमोली को 60867 मत पड़े थे। जबकि, रजनी रावत 44294 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रही थीं।
वहीं कांग्रेस प्रत्याशी रहे सूरत सिंह नेगी को 40643 मतों पर संतोष करना पड़ा था। वर्ष 2013 के चुनाव में बीजेपी से महापौर पद के प्रत्याशी रहे विनोद चमोली को 80530 मत मिले, जबकि कांग्रेस के सूर्यकांत धस्माना को 57618 मत प्राप्त हुए थे। वहीं रजनी रावत 47589 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही थीं। लेकिन, रजनी रावत की उपस्थिति से कांग्रेस को खासा नुकसान हुआ था। इस बार भी रजनी रावत के मैदान में उतरने के बाद कांग्रेस-भाजपा के वरिष्ठ नेता कुछ भी बोलने से कतरा रहे है.।

तो वही बीजेपी ने सुनील गामा को अपना देहरादून मेयर पद का उम्मीदवार बनाया है ।, इस लिहाज़ से जिस तरह से रजनी रावत लगातार दो बार चुनाव लड़ चुकी है और वोट भी उनको अच्छा खासा मिला है उस हिसाब से रजनी बीजेपी के सुनील गामा पर भारी पड़ सकती है। गामा अगर गढ़वाली वोटो को को अपना समझते है तो रजनी भी रावत है ।

ये गामा को या बीजेपी को समझना होगा। क्योकि वोट तो रजनी रावत के अपने खुद के भी है और आप पार्टी से टिकट लेकर वो ओर मजबूत हो गई है ।

दूसरी तरफ जानकारी अनुसार पूर्व मंत्री दिनेश अग्रवाल मजूबत चेहरा है कांग्रेस के पास मेयर पद के लिए बस औपचारिक ऐलान के बाद दिनेश अग्रवाल , भी बीजेपी के गामा पर भारी रहेगे क्योकि दिनेश अग्रवाल का अनुभव काफी है ।और जनता के बीच पहचान भी ।इस लिहाज से बीजेपी के गामा को सिर्फ पार्टी के वोट बैंक के सहारे ही रहना पड़ेगा। अगर कोई लहर चली तो ही गामा कुछ चमत्कार कर पायेंगे ओर बिना लहर के तो गामा के भी पसीने छुटने तय है। माना जा रहा था कि अनिल गोयल को टिकट मिलेगा पर ये हुवा नही क्योकि विनोद चमोली के बाद अनिल गोयल ही मजबूत उम्मीदवार थे बीजेपी के पास खेर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ओर अध्यक्ष अजय भट्ट की सिफारिश पर गामा का सलकेशन हुवा है इसलिए गामा को जीता कर लाना ओर मेयर बनाना मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के लिए भी अग्नि परीक्षा है । बहराल देखते है आगे क्या समीकरण ओर बनते है पर अगर बीजेपी ये सोच रही है कि गढ़वाली वोट बैंक गामा पर आयेगा तो ये उनकी सोच ठीक नही ।

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