सीएम तक भी ख़बर पहुँचा देना भाई, 5 साल बाद भी पुल नही बने ,बल्लियों के सहारे नदी पार कर रही ननद-भाभी अब दुनिया में नही रही !

उत्तराखंड: बल्लियों के सहारे नदी पार कर रही ननद-भाभी तेज बहाव में बहीं, एक का शव बरामद


मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत जी तक उनके हितैषी उन तक  ये  ख़बर जरूर पहुँचा देना , क्योंकि आगे पीछे घूमने वाले कुछ लोग तो सिर्फ अपनी ही खीचड़ी पकाते है। उन्हें जनहित से क्या लेना देना उनका खुद का तो हित यही है कि बस सीएम के साथ आगे पीछे उनकी फोटो या वीडियो किल्प दुनिया देख ले मीडिया में आ जाये और होता भी यही है वो अपने मकसद मे कामयाब भी हो जाते है इससे ज्यादा वो किसी के नही ।


मुख्यमंन्त्री जी पहाड़ के हालत से आप वाकिफ है इसलिए सीधे यही कहेंगे कि कांग्रेस ने कुछ नही क्या बीजेपी के अनुसार जब उनकी सरकार थी, तो आप तो कुछ कर दीजेए पहाड़ के दुःख दर्द को कम। आज भी बल्लियों के सहारे पिंडर नदी पार कर रहे लोग नदी मे गिर कर मर रहे है । अभी की बात है कि ननद-भाभी पैर फिसला ओर वे नदी में जा गिरी। इनमें एक महिला का शव बरामद हो गया है जबकि दूसरी महिला का अब तक पता नहीं चल सका है।
मुख्यमंत्री जी सिस्टम की काहिली का आलम यह है कि वर्ष 2013 की आपदा में बहे पुल-पुलियाओं का पांच वर्ष बाद भी निर्माण नहीं किया गया है। लोग जोन जोखिम में डालकर लकड़ी की अस्थायी पुलिया के सहारे नदी-नाले पार करने को मजबूर हैं। 

आपको बता दे कि सोमवार को चमोली जिले के देवाल ब्लाक के अंतर्गत ननद-भाभी नदी में बह गईं। खेता गांव निवासी खिलाफ सिंह ने बताया कि भौरियाबगड़ में पिंडर नदी पर लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाने के लिए ग्रामीणों ने दो बल्लियां रखी थीं। 

सोमवार को भौरियाबगड़ की खष्टी देवी (35) और उसकी ननद आनंदी (19) इन्हीं बल्लियों के सहारे नदी पार कर रही थीं, तभी पैर फिसलने से दोनों पिंडर नदी में जा गिरी। खष्टी देवी का शव नदी से 500 मीटर दूर मिला, जबकि आनंदी का अभी तक पता नहीं चल सका है।
दर्जनों पुल और पैदल पुलिया बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे
यहा बता दें कि वर्ष 2013 की आपदा में रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में दर्जनों पुल और पैदल पुलिया बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे। आज पांच साल गुजरने के बाद भी कई स्थानों पर पुलों और पैदल पुलियाओं का निर्माण नहीं किया गया है।

चमोली जिले की उर्गम घाटी में चार गांवों के लोग कल्प गंगा को लकड़ी की बल्लियों के सहारे पार करने को मजबूर हैं। थराली के चपेड़ों, देवाल ब्लाक के बोरागाड़ और सुतलीगाड़ में बहे पुल भी आज तक नहीं बने हैं।

यहां भी लोग लकड़ी केअस्थायी पुलों के सहारे नदियों को पार कर रहे हैं। यहां अब नदियों का जल स्तर घटने पर ग्रामीण स्वयं अस्थायी पुल बनाने में जुटे हैं। रुद्रप्रयाग जिले में विजयनगर, विद्यापीठ और चंद्रापुरी में भी पुलों का निर्माण नहीं किया गया है। इससे लोग ट्राली केसहारे नदियों को पार कर रहे हैं।
उमीद करता है बोलता उत्तराखंड की मुख्यमंत्री की हितेषी ओर राज्य हित के लोग मुख्यमंत्री तक इस ख़बर को सही तरीके से पहुँचायेगे ओर राज्य के मुख्यमंत्री जल्द ही पहाड़ के सभी ऐसे हालतों वाली जगह तेज़ी से पूल या पुलिया निर्माण   के आदेश देगे ।  इस बात की  उम्मीद हम करते है।

 

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